कोचिन: NIA ने एयरक्राफ़्ट कैरियर से उपकरण चोरी मामले में दायर किया आरोपपत्र

कोचिन: NIA ने एयरक्राफ़्ट कैरियर से उपकरण चोरी मामले में दायर किया आरोपपत्र
मामले की तफ्तीश के दौरान करीब पांच हजार लोगों के फिंगर प्रिंट और हथेलियों के निशान लिए गए.

NIA files charge-sheet: एनआईए के मुताबिक इस केस में सुमित कुमार सिंह और दयाराम आरोपियों हैं. आरोपी सुमित कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के मुंगेर का रहने वाला है जबकि दयाराम राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 3:03 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना (Corona virus ) संक्रमण काल में दौरान पिछले पांच महीने में करीब पांच हजार लोगों के फिंगर प्रिंट और हथेली के निशान को लेकर उसकी फोरेंसिक जांच करवाने के बाद केन्द्रीय जांच एजेंसी एनआईए (NIA ) ने एयरक्राफ़्ट कैरियर से उपकरण चोरी मामले को आखिरकार सुलझा लिया है. इस मामले में एनआईए की टीम कोरोना वायरस से बचते हए हजारों लोगों के संपर्क में भी आए, उसके बावजूद इस मामले को सही तरीके से सुलझा लिया गया. मामले का पूरी तरह तफ्तीश करने के बाद एनआईए ने चार सितंबर को कोर्ट में आरोपपत्र (Charge sheet ) दायर कर दिया है . एनआईए के कोच्ची स्थित विशेष अदालत में दायर आरोपपत्र में दो आरोपियों के बारे में विस्तार से तमाम आरोपों के बारे में तमाम सबूतों के साथ जानकारी दी गई है . एनआईए के मुताबिक केस में सुमित कुमार सिंह और दयाराम आरोपियों हैं. आरोपी सुमित कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के मुंगेर का रहने वाला है जबकि दयाराम राजस्थान के हनुमानगढ़ का रहने वाला है. एयरक्राप्ट कैरियर से कई महत्वपूर्ण उपकरणों की चोरी के आरोप में करीब तीन महीने पहले ही इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद कई दिनों तक हुई पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियों को प्राप्त करने के बाद उससे संबंधित तफ्तीश की गई और करीब 9 महीनों के बाद ये आरोपपत्र कोच्ची स्थित स्थानिय कोर्ट में दायर कर दिया गया है.

5 हजार लोगों का फिंगर प्रिंट और हथेलियों के निशान लिए गए
केन्द्रीय जांच एजेंसी एनआईए के लिए आरोपियों को गिरफ्तार करना और इस मामले में तफ्तीश करना बेहद मुश्किल हो रहा था. दरअसल शुरुआती दौर में ये पता ही नहीं चल पा रहा था किसने इस चोरी को अंजाम दिया. इस मामले में सबसे बड़ी समस्या आ रही थी कोरोना संक्रमण की वजह से जांचकर्ताओं का मिलना और उससे संबंधित जांच रिपोर्ट को खंगालना . NIA के जांचकर्ताओं की तरफ से इस मामले की तफ्तीश के दौरान करीब पांच हजार लोगों के फिंगर प्रिंट और हथेलियों के निशान लिए गए. उसके बाद जांच रिपोर्ट आने के बाद समित कुमार सिंह और दयाराम नाम के आरोपी के बारे में जानकारी मिली. इन दोनों आरोपियों ने एयरक्राप्ट कैरियर से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की चोरी की थी , जिसमें पांच माइक्रो प्रोसेसर , 10 रैम, और पांच सॉलिड स्टेट ड्राइवर चुराया था.

ऐसे पहुंचे आरोपी तक
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद कोच्ची स्थित शिपयार्ड में ये मामला काफी चर्चा का केन्द्र बन गया था कि ये चोरी किसने की और क्यों की ? उसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय थाने में ये मामला दर्ज किया गया. लेकिन इस मामले में संदिग्ध लोगों की भूमिका को देखते हुए जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपा गया. इस मामले में जांचकर्ताओ को सबसे पहले उस वक्त ये जानकारी मिली की दो लोग लोकल मार्केट में कई दुकानदारों के साथ संपर्क स्थापित करते हुए एयरक्राप्ट कैरियर के इलेक्टॉनिक समान को बेचने का प्रयास कर रहा था, जिसके लिए वो लाखों रूपये की डिमांड कर रहा था, लेकिन दुकानदार उसे वो कीमत देने के लिए तैयार नहीं थे. इसी दौरान एनआईए ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.



एनआईए ने चोरी के इस मामले में क्यों दर्ज किया था एफआईआर ?
कोच्चि शिपयार्ड में निर्माणधीन इंडीजीनस एयरक्राप्ट कैरियर के कई उपकरणों की चोरी मामले पर केन्द्रीय खुफिया एजेंसी काफी सतर्क हो गई थी , क्योंकि ये शिपयार्ड काफी संवेदनशील है . इसके साथ ही अगर वहां पर निर्माणधीन इंडीजीनस एयरक्राप्ट कैरियर से अगर कई महत्वपूर्ण उपकरण चोरी होते हैं तो वो बड़ा मसला बन जाता क्योंकि अक्सर दूसरे देशों के एजेंट और आतंकी गतिविधियों में शामिल एजेंट इस तरह के मामले को अंजाम देते हैं जिससे ये पता करने की कोशिश होती है की इस एयरक्राप्ट कैरियर में किस तरह के उपकरण लगे हैं और उस उपकरण में लगे हुए डाटा यानी तमाम जानकारियों को प्राप्त करना ही लक्ष्य होता है. लिहाजा इसी मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए ने ये एफआईआर दर्ज करके इस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई थी और उसके बाद इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया .
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