श्रीनगर में दफ्तरों, एनजीओ पर NIA ने मारे छापे, आतंकियों को मदद पहुंचाने का मामला

सांकेतिक तस्वीर
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बुधवार को NIA ने ग्रेटर कश्मीर अखबार के दफ्तर समेत कई एनजीओ के दफ्तरों पर भी छापे मारे. इस कार्रवाई के जरिए एनआईए (NIA) आतंकियों को मिल रही आर्थिक मदद का पता लगाने की कोशिश कर रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 5:46 PM IST
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श्रीनगर. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (National Investigation Agency (NIA)) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेटर कश्मीर अखबार (Greater kashmir Newspaper) और मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज (Khurram Parvez) समेत श्रीनगर के कई इलाकों पर छापे मारे. एनआईए ने यह कार्रवाई संदिग्ध फंड की गतिविधियों के चलते की है. इसके अलावा एथराउट एनजीओ के दफ्तरों की तलाशी भी ली गई.

एनजीओ की आर्थिक गतिविधियों पर है शक
एनआईए ने एनजीओ के अंदर हो रही रुपयों की आवाजाही का पता करने के लिए नया मामला दर्ज किया है. इसके तहत एनआईए पैसा के सोर्स, खर्च का पता लगाएगी. अधिकारियों के मुताबिक, इन एनजीओ के खिलाफ काफी समय से हावाला रैकेट, गलत तरीके से फंड जुटाने और आतंकियों को आर्थिक मदद देने के आरोप लगते रहे हैं.

उन्होंने बताया कि कम से कम तीन अन्य एनजीओ पर एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकवाद को धन मुहैया कराने के मामले में छापे मारे. इन एनजीओ की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी. एनआईए के मुताबिक इन एनजीओ को अज्ञात दानदाताओं से पैसा मिल रहा था, जिसका इस्तेमाल आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने में किया जा रहा था.




पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
2019 में एनआईए ने ग्रेटर कश्मीर अखबार के एडिटर इन चीफ फयाज कालू (Fayaz Kaloo) से कुछ आर्टिकल्स के संबंध में पूछताछ की थी. यह आर्टिकल्स बुरहान वानी की मौत के बाद अखबार में प्रकाशित हुए थे. इसके अलावा 2016 में खुर्रम परवेज को उसके श्रीनगर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, इस दौरान काफी विवाद खड़ा हुआ. आरोप लगाए जा रहे थे कि परवेज को बिना किसी अरेस्ट वॉरंट के हिरासत में लिया गया है. 76 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद सेशन कोर्ट ने उसकी रिहाई के आदेश जारी किए, ताकि उसे दोबारा पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जा सके. (इनपुट: भाषा)
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