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महबूबा मुफ्ती के करीबी PDP नेता ने चुनाव जिताने के लिए आतंकी को दिए थे 25 लाख रुपये: NIA सूत्र

महबूबा मुफ्ती की पार्टी का नेता है वाहीद. (File Pic)
महबूबा मुफ्ती की पार्टी का नेता है वाहीद. (File Pic)

वाहिद उर रहमान पर्रा (waheed ur rehman) ने मुफ्ती सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर रहे हसीब द्राबू को चुनाव जिताने के मकसद से 2014 में हिजबुल कमांडर रियाज़ नैकू को 25 लाख रुपये दिए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2021, 3:51 PM IST
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नई दिल्‍ली. जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) में चुनाव जिताने के लिए भी आतंकियों (Terrorist) का सहारा लिया जाता है. नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच में इसका खुलासा हुआ है. एनआईए के सूत्रों की ओर से कहा गया है कि जम्‍मू-कश्‍मीर की पूर्व मुख्‍यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) के करीबी नेता और पीडीपी की यूथ विंग के प्रेसिडेंट वाहिद उर रहमान पर्रा (waheed ur rehman) ने मुफ्ती की सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर रहे हसीब द्राबू को चुनाव जिताने के मकसद से 2014 में हिजबुल कमांडर रियाज़ नैकू को 25 लाख रुपये दिए थे.

नेशनल कांफ्रेंस के समर्थकों को डराने, धमकाने और टारगेटेड किलिंग के जरिये आतंक फैलाकर नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के वोट बैंक वाले क्षेत्र में लोगों को वोटिंग करने से रोकने के लिए वाहिद उर रहमान पर्रा ने आतंकी को यह रकम दी थी. एनआईए सूत्रों के मुताबिक 2014 में पर्रा, पीडीपी नेता डॉक्टर मीर सैफुल्लाह और हिजबुल कमांडर डॉक्टर सैफुल्लाह (जो सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा जा चुका है) स्टार हॉस्पिटल से एक गाड़ी में, जिसे स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाला मोहम्मद अशरफ चला रहा था, के साथ मलंगपोरा, अवंतीपोरा भी गया था. वे सब आतंकी रियाज़ नैकू से मिलने गए थे.

दरअसल महबूबा मुफ्ती ने 2014 में हसीब द्राबू के लिए समर्थन हासिल के लिए पर्रा को पीडीपी के स्टेट सेक्रेटरी डॉक्टर मीर सैफुल्लाह से संपर्क करने को कहा था. डॉ. मीर सैफुल्लाह श्रीनगर के मल्टी स्टोरी स्टार हॉस्पिटल का मालिक था, जहां ज्यादातर अलगाववादी नेता अपना इलाज कराने के लिए आते थे.



साथ ही हाल ही में मारा गया हिजबुल का चीफ कमांडर डॉक्टर सैफुल्लाह भी ज्यादातर वक़्त स्टार हॉस्पिटल में ही छिपता था. पर्रा ने डॉक्टर मीर सैफुल्लाह से संपर्क किया और फिर मीर सैफुल्लाह ने हिजबुल कमांडर डॉ. सैफुल्लाह को एक्टिवेट किया. फिर डॉ सैफुल्लाह ने रियाज़ नैकू से संपर्क साधा. उस वक़्त रियाज़ नैकू हिजबुल का चीफ ऑपरेशनल कमांडर था और सैफुल्लाह उसके मातहत काम कर रहा था. मलंगपोरा पहुंचकर पर्रा ने इस काम के लिए रियाज़ नैकू को 25 लाख रुपये दिए थे.
इतना ही नहीं एनआईए सूत्रों के मुताबिक पर्रा ने 2018 में रजौरी और पूंछ जाकर बॉर्डर से तीन बार आतंकियों को शोपियां पहुंचाया था. इसके अलावा एनआईए को 2018 में पीडीपी विधायक ऐजाज़ अहमद मीर के घर से 6 AK सीरीज राइफल के उठाए जाने के मामले में वाहिद पर्रा के मुख्य साजिशकर्ता होने के संकेत मिले हैं.

साथ ही पर्रा पर सितंबर 2016 में पीर जू के पास हुर्रियत के पूर्व चेयरमैन रहे गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश को 5 करोड़ रुपये देने का आरोप लगा था. तब हुर्रियत बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हड़ताल व बंद करवाने के लिए फंड इकट्ठा कर रही थी. एनआईए इसकी भी जांच कर रही है.

एनआईए को जांच में ये भी पता चला है पर्रा ने 2018-19 में पाकिस्तान में हिजबुल के नंबर दो सरगना आतंकी आमिर खान की पत्नी और बेटी का पासपोर्ट बनवाने में भी मदद की थी. इसके अलावा पर्रा के कॉल डिटेल्स से ये भी पता चलता है कि वो दविन्दर सिंह और उसके साथ पकड़े गए हिजबुल के आतंकी इरफान मीर के लगातार संपर्क में था. एनआईए को ये भी शक है कि हिजबुल कमांडर नावेद बाबू को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाने की पल पल की जानकारी दविंदर सिंह पर्रा से साझा कर रहा था. एनआईए को जांच में उसके हवाला ऑपरेटर्स से रिश्ते की भी जानकारी मिली है.
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