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नीरव मोदी केस: गवाही देने पहुंचे पूर्व जज काटजू से लंदन की कोर्ट ने कहा- आपकी दलीलों पर भरोसा नहीं

रिटार्ड जज मार्कंडेय काटजू  (फ़ाइल फोटो)

रिटार्ड जज मार्कंडेय काटजू (फ़ाइल फोटो)

Nirav Modi case: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने लिखित और मौखिक दावे किये थे कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसियां सरकार की ओर झुकाव रखती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 3:01 PM IST
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नई दिल्ली.  भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) के प्रत्यर्पण (Extradition) के मामले में भारत को ब्रिटेन की अदालत में बड़ी जीत मिली है. ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की याचिका खारिज करते हुए उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है. यूके कोर्ट में सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के रिटार्ड जज मार्कंडेय काटजू भी खासा चर्चा में रहे. दरअसल काटजू कोर्ट में नीरव मोदी की तरफ से गवाही देने के लिए पहुंचे थे. लेकिन लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में जज सैमुअल गूजी ने उनके दलिलों की धज्जियां उड़ा कर रख दी. उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कह दिया कि उनकी तरफ से जो दलीलें और और सबूत पेश किए गए हैं वो भरोसे के लायक नहीं हैं.

अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून के मुताबिक जज सैमुअल गूजी ने साफ-साख कहा कि उन्हें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिससे ये कहा जा सके कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से लोग राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करेंगे. जज ने काटजू की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उनकी तरफ से दिए गए सबूत 'गैर निष्पक्ष और गैर विश्वसनीय है. जज ने आगे कहा, 'मेरे सामने सोशल मीडिया के लिंक पेश किए गए. इसके अलावा मीडिया में छपी खबरें मेरे सामने पेश की गई. जहां ये बताने की कोशिश की गई कि नेता इस केस में दखल देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है. हम ऐसे सबूतों को खारिज करते हैं.'

क्या कहा था काटजू ने
काटजू ने लिखित और मौखिक दावे किये थे कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसियां सरकार की ओर झुकाव रखती हैं.सुनवाई के दौरान पूर्व न्यायाधीश काटजू ने बताया था कि भारत के 50% जज भ्रष्ट हैं. सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार की नौकर बन गई है. भारत का मीडिया नकारात्मक खबरें दिखाता है. भारत में सरकारी नीतियों की वजह से किसी को इंसाफ नहीं मिल सकता है. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा था कि सरकार अपनी कमियों को छुपाने के लिए दूसरों को दोषी ठहरा देती है.



डिप्रेशन की दलील खारिज
नीरव मोदी के वकील ने दलील दी कि वो डिप्रेशन में है ऐसे में अगर उन्हें मुंबई के आर्थर जेल में रखा जाता है तो वो और भी ज्यादा बीमार हो जाएंगे. जज ने इन दलिलों को खारिज कर दिया और कहा कि उसका वहां डिप्रेशन कम होगा. उन्होंने ये भी कहा कि जेल में किसी कैदी को डिप्रेशन होना कोई नई बात नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि जेल ऐसी जगह नहीं है कि वहां हर किसी को खुश रखा जा सके. बता दें कि कुछ हफ्ते पहले जूलियन असांजे के केस में भी डिप्रेशन का हवाला दिया गया था. कोर्ट ने उनकी बात मान ली थी और उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी नहीं दी थी. लिहाजा मोदी के वकील ने भी इसी उम्मीद में डिप्रेशन की बात कही.
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