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Nirav Modi Extradition: कोरोना काल में आसान नहीं थी लड़ाई, CBI के सबूतों के आगे धरी रह गईं नीरव मोदी की दलीलें

नीरव की लीगल टीम ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि वो इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं. (फ़ाइल फोटो)

नीरव की लीगल टीम ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि वो इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं. (फ़ाइल फोटो)

Nirav Modi Extradition: ब्रिटेन की अदालत का कहना है कि नीरव मोदी को भारत की अदालतों को जवाब देना होगा. हालांकि, बीते कोरोना काल में तमाम जगह लगी पाबंदियों के बीच मिली यह सफलता सीबीआई (CBI) के लिए इतनी आसान नहीं थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 6:03 PM IST
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(अरुणिमा)
नई दिल्ली. कभी हीरा कारोबारी रहे नीरव मोदी को ब्रिटेन (Britain) की अदालत ने भारत लाने की अनुमति दे दी है. अदालत का कहना है कि मोदी को भारत की अदालतों को जवाब देना होगा. हालांकि, बीते गुरुवार को मिली यह सफलता सीबीआई (CBI) के लिए इतनी आसान नहीं थी. मामले की सुनवाई के दौरान मौके पर मौजूद रहने के अलावा विभाग के लोगों ने कोविड-19 (Covid-19) पाबंदियों का भी सामना किया है. वे लगातार इस प्रयास में जुटे रहे कि ब्रिटेन की अदालत से मोदी के जमानत न मिलने पाए और आखिर अपनी दलीलों, सबूतों और मेहनत के आधार पर भगोड़े आर्थिक अपराधी को जमानत नहीं मिलने दी.

तकनीक को बनाया हथियार
11 मई 2020 को लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में पहली बार नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर सुनवाई की गई थी. मोदी की टीम का नेतृत्व बैरिस्टर क्लेयर मॉन्टोग्मेरी कर रही थीं. उन्होंने भारत के आरोप के बचाव में अदालत में एक बड़ी रक्षा व्यवस्था खड़ी कर दी थी. हालांकि, इस दौरान सीबीआई इस चुनौती का सामना करने के लिए टेक्नोलॉजी पर काफी ज्यादा निर्भर रही. क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज यानी सीपीएस के वकीलों के साथ विभाग वॉट्सएप पर जुड़ा रहा, ताकि वकील मॉन्टोग्मेरी के हर सवाल का उचित जवाब दिया जा सके.
गोपनियता की शर्त पर एक सीबीआई अधिकारी ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि यह इस बात का सबसे बढ़िया उदाहरण था कि कैसे सरकारी एजेंसिया सबूत पेश करने के लिए तकनीक की मदद ले रहीं हैं. प्रत्यर्पण मामले में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि एक अधिकारी को केवल जोड़ने और एकसाथ लगाने के लिए लगाया गया था. ये अधिकारी सबूत पेश करती हाइपरलिंक्स बनाता और उसे आसानी से पढ़े जाने के लिए एक डिवाइस में तैयार करता. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि नियमित रूप से सीपीएस वकीलों को जानकारी देने के लिए पहुंचना और सुनवाई में शामिल होने, एजेंसी के लिए काफी मददगार रहा.



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कोविड दौर के चलते आईं नई मुसीबतें
सितंबर 2020 में सुनवाई सामने आने पर सीबीआई के सामने कोविड-19 ने नई चुनौतियां पेश की. यह तब की बात है, जब ब्रिटेन में मामले बढ़ रहे थे और देश में आने वालो को 14 दिनों की क्वारंटीन में भेजा जा रहा था. भारत-ब्रिटेन के बीच फ्लाइट्स भी रद्द कर दी गई थीं, लेकिन सुनवाई के लिए सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर, डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन और दो अन्य अधिकारियों को क्वारंटीन नियमों से छूट दी गई. उन्होंने आवाजाही के लिए एयर इंडिया के विशेष विमान का इस्तेमाल किया.

इन आधार पर भारत को चुनौती देता गया नीरव मोदी
सबूतों का अभाव: नीरव ने दावा किया कि उसने ऐसा कोई भी कागज साइन नहीं किया है, जो यह साबित करे कि उसका पीएनबी पर कोई दायित्व है या साजिश में उसकी कोई भी भूमिका हो. एक अधिकारी ने बताया कि हमें ऐसा सबूत पेश करना था, जो ब्रिटिश कानून के तहत माना जाए. उन्होंने बताया कि सीआरपीसी के सेक्शन 161 के तहत लगाए गए आरोपों को लंदन के कोर्ट में नीरव के वकीलों ने अस्वीकार किए जाने के तर्क दिया.

उन्होंने जानकारी दी कि सेक्शन 161 के तहत गवाह का बयान दर्ज न होने की स्थिति में हमारे पास कोई भी मौका नहीं था. इसलिए हमारे जांच अधिकारियों को अदालत में हलफनामें जमा करने पड़े कि बयान उनके सामने ही दर्ज किए गए हैं और सत्य हैं. नीरव के दोष साबित करने के लिए सीबीआई अधिकारियों ने हजारों डॉक्युमेंट्स की जांच की और नीरव और उसके तत्कालीन जनरल मैनेजर के बीच ईमेल का पता लगाया. इससे पता चला कि वो बगैर 100 फीसदी सिक्युरिटी दिए पीएनबी से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग प्राप्त करने की साजिश के बारे में जानता था. हालांकि, यहां भी नीरव की डिफेंस टीम ने कई सवाल उठाए.

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि नीरव ने साजिश के तहत तीन कंपनियों में डमी डायरेक्टर नियुक्त किए थे. सीबीआई ने आरोप लगाया कि डायरेक्टर शिक्षित नहीं थे, वे गुजरात के किसान थे, जिन्हें 10-10 हजार रुपए देकर उनके नाम पर सूरत कोऑपरेटिव बैंक में खाते खुलवाए गए थे. सीबीआई का कहना है कि इन खातों का इस्तेमाल नीरव के आर्थिक लेनदेन के लिए होता था.

राजनीतिक साजिश: नीरव की टीम ने अदालत में यह साबित करने की कोशिश की उसके खिलाफ मुकदमा एक राजनीतिक साजिश है. इसके लिए टीम ने दो पत्रकारों, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, अखबार की सैकड़ों खबरों और अलग-अलग कमीशन की रिपोर्ट्स पेश की. एक अधिकारी ने बताया 'डिफेंस टीम पूरी तरह तैयार था. एक रिसर्च टीम ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताने के लिए मीडिया रिपोर्ट्स, कमीशन रिपोर्ट्स, जेल रिपोर्ट को एक साथ पेश किया.'

मानसिक स्वास्थ्य: डॉक्टरों ने बताया कि अगर उसका प्रत्यर्पण किया गया, तो हीरा कारोबारी आत्महत्या कर सकता है. डिफेंस ने भारत सरकार से इस बात का लिखित आश्वासन मांगा कि नीरव को उसकी पसंद के हेल्थ प्रोफेशनल की मदद पहुंचाई जाएगी. पूर्व नौकरशाहों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि ऐसे लिखित आश्वासनों में कई दिन लग जाते हैं. फाइलें इधर-उधर जाती हैं, लेकिन नीरव के मामले में सुनवाई के लिए अगले दिन अदालत में पेश हो गया.

जेल हालात: उसके प्रत्यर्पण को रोकने के लिए भारत में जेलों की स्थिति का हवाला दिया गया. सीबीआई ने आर्थर रोड जेल के बैरक 12 का एक वीडियो पेश किया. इस पर डिफेंस ने चुनौती दी कि यही वीडियो विजय माल्या के मामले में भी दिखाया गया था. केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने बगैर समय गंवाए मुंबई के आर्थर रोड जेल का एक वीडियो पेश किया. अगर नीरव को भारत लाया जाता है, तो इसे यहीं रखा जाएगा.

अब आगे क्या
नीरव की लीगल टीम ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि वो इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं. अगर वे अपील करते हैं, तो अनुमति के बाद इसकी सुनवाई लंदन के हाईकोर्ट के एडमिनिस्ट्रेटिव डिविजन में होगी. इस दौरान जब तक गृहमंत्री उसे प्रत्यर्पित करने का फैसला नहीं ले लेते, नीरव वेंड्सवर्थ जेल में रिमांड पर रहेगा.
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