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निर्भया कांड के दोषियों ने अब तक नहीं बताया कि आखिरी बार परिवार से कब मिलना चाहेंगे

भाषा
Updated: January 16, 2020, 4:57 AM IST
निर्भया कांड के दोषियों ने अब तक नहीं बताया कि आखिरी बार परिवार से कब मिलना चाहेंगे
निर्भया के गैंगरेप और मर्डर मामले में फांसी की सजा पा चुके चारों दोषियों की फाइल फोटो

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से आज दी गई दलीलों के बाद 22 जनवरी को चारों को फांसी दिये जाने की संभावना कम ही है.

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नई दिल्ली. निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड (Nirbhaya Gangrape and Murder Case) के चार दोषियों में से किसी ने अभी तक तिहाड़ जेल (Tihar Jail) अधिकारियों को सूचित नहीं किया है कि वे अपने परिवार (Family) से अंतिम बार कब मिलना चाहेंगे.

हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से आज दी गई दलीलों के बाद 22 जनवरी को चारों को फांसी दिये जाने की संभावना कम ही है.

जेल ने चारों के परिजनों से मिलने पर नहीं लगाई है कोई रोक
जेल अधिकारियों (Jail Officers) ने बुधवार को बताया कि चारों में से किसी पर भी अभी परिजनों से मिलने पर रोक नहीं है.

एक अधिकारी ने बताया कि दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह अपनी पत्नी (Wife) से फोन पर बात करता है लेकिन वह नवंबर, 2019 के बाद उससे मिलने नहीं आयी है. कारण पूछने पर अक्षय ने जेल अधिकारियों को बताया कि वह तभी आएगी जब वह बुलाएगा.

22 तारीख को दी जानी थी फांसी लेकिन दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘उन्हें परिवार से मिलने की अनुमति है और अभी तक परिजन (Family) से मिलने पर कोई रोक नहीं है.’’इस मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों विनय, अक्षय, मुकेश कुमार और पवन गुप्ता को 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी दी जानी थी. लेकिन दिल्ली सरकार ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि चूंकि इनमें से एक की दया याचिका राष्ट्रपति (President) के पास लंबित है, ऐसे में उन्हें फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता.

मौत का वारंट जारी होने के बाद अलग-अलग कोठरियों में रखे गए हैं चारों
सत्र अदालत द्वारा सात जनवरी को मौत का वारंट (Death Warrant) जारी होने के बाद से चारों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है.

जेल अधिकारी ने बताया, ‘‘प्रत्येक कोठरी के पास चौबीसों घंटे तीन-चार गार्ड होते हैं और वहां सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) भी लगे हैं. कोठरी में कोई पंखा नहीं है. उन्हें अकेले रखा गया है, उन्हें किसी से मिलने की अनुमति नहीं है. हम उन्हें आपस में भी बात करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.’’

डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक लगातार चारों से कर रहे हैं बात
उन्होंने बताया कि कोठरी के बाहर खुली जगह है जहां वह टहल सकते हैं, व्यायाम या योग कर सकते हैं. डॉक्टर और मनोचिकित्सक (Psychiatrist) लगातार चारों से बात कर रहे हैं ताकि उनका दिमाग सही रहे.

महानिदेशक (कारागार) संदीप गोयल ने कहा, ‘‘लगातार मेडिकल जांच (Medical Test) हो रही हैं और मनोवैज्ञानिक उनकी काउंसलिंग भी कर रहे हैं, उनसे बातचीत कर रहे हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि उनका दिमाग ठीक है.’’

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First published: January 16, 2020, 4:57 AM IST
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