• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • निर्भया गैंगरेप केस : दोषी मुकेश का दावा- मेरे भाई राम सिंह ने जेल में सुसाइड नहीं किया, उसकी हत्या हुई

निर्भया गैंगरेप केस : दोषी मुकेश का दावा- मेरे भाई राम सिंह ने जेल में सुसाइड नहीं किया, उसकी हत्या हुई

आरोपी मुकेश सिंह की फाइल फोटो

आरोपी मुकेश सिंह की फाइल फोटो

राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ गैंगरेप करने के चारों दोषियों के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया है.

  • Share this:
    नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gangrape) मामले में दोषी मुकेश सिंह (Mukesh Singh) ने सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Of India Ramnath Kovind) द्वारा दया याचिका के खिलाफ हुई सुनवाई में मुकेश की वकील अंजना प्रकाश ने दावा किया कि इस मामले में एक आरोपी की जेल में हत्या कर दी गई थी.

    कोर्ट में मुकेश की याचिका पढ़ते हुए प्रकाश ने बताया, 'मुकेश की दलील है कि आरोपियों में से एक की आत्महत्या वास्तव में एक हत्या थी लेकिन 'वर्षों तक यह बात छिपी रही.' इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में प्रकाश ने बताया कि मुकेश के साथ यौन शोषण किया गया. उन्होंने अदालत को बताया, 'जेल में उसका यौन शोषण किया गया. जेल में वह मौत जी रहा है.'

    कौन था राम सिंह
    बता दें  कि 32 साल का राम सिंह (Ram Singh) पेशे से ड्राइवर था. जिस बस में निर्भया का गैंगरेप हुआ उस बस का ड्राइवर राम सिंह ही था. राम सिंह इस केस में मुख्य आरोपी था. उसने निर्भया के साथ गैंगरेप करने के अलावा उसके दोस्त को लोहे की रॉड से पीटा भी था. घटना के कुछ समय बाद ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन इससे पहले की मामले में सजा सुनाई जाती राम सिंह ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को जेल के भीतर कथित तौर पर खुद को फांसी लगा ली थी.

    क्या है पूरा मामला
    गौरतलब है कि, दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था. सिंगापुर में 29 दिसंबर 2012 को एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गयी थी. मामले में एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. आरोपियों में से एक नाबालिग था, जिसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा के बाद उसे सुधार गृह से रिहा किया गया था. शीर्ष अदालत ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत द्वारा मामले में सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा था.

    यह भी पढ़ें :-स्कूलों पर सिसोदिया बोले- जलेबी खा रहे होंगे गौतम गंभीर, नोटिस नहीं पढ़ पाए

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज