लाइव टीवी

निर्भया गैंगरेप केस: दोषी की पुनर्विचार याचिका- वायु-जल प्रदूषण से जिंदगी हो रही छोटी तो फांसी की सजा क्यों?

News18Hindi
Updated: December 10, 2019, 5:40 PM IST
निर्भया गैंगरेप केस: दोषी की पुनर्विचार याचिका- वायु-जल प्रदूषण से जिंदगी हो रही छोटी तो फांसी की सजा क्यों?
निर्भया गैंगरेप केस के आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है.

न्यायालय ने 2017 में निर्भया कांड के दोषियों को मौत की सजा देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था. उच्च न्यायालय ने इन मुजरिमों को मौत की सजा सुनाने के निचली अदालत के फैसले की पुष्टि की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 10, 2019, 5:40 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. राजधानी में दिसंबर, 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार (Nirbhaya Gangrape Case) और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से अंतिम दोषी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की. निर्भया केस में चौथे दोषी अक्षय ने अपनी पुनर्विचार याचिका में अजीबो-गरीब तर्क देते हुए लिखा कि दिल्ली (Delhi) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) बहुत ज्यादा है और यह गैस चैंबर बन चुकी है.

पुनर्विचार याचिका में आगे लिखा गया कि सिर्फ यही नहीं दिल्ली में पानी की हालत भी बहुत खराब है, दिल्ली का पानी जहर बन चुका है जिसकी पुष्टि भारत सरकार (Goverment of India) ने संसद में जमा की गई अपनी रिपोर्ट में भी की है. उसने लिखा कि सभी जानते हैं कि दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में पानी और हवा को लेकर क्या हो रहा है. जिंदगी ऐसे ही कम हो रही है तो मौत की सजा की क्या ही आवश्यकता है.



वेद-पुराण का दिया तर्क

अक्षय ने अपनी पुनर्विचार याचिका में लिखा कि वेद, पुराण और उपनिषदों में कहा गया है कि इंसान की उम्र धीरे-धीरे कम हो रही है.  सतयुग और त्रेता युग में लोग हजार साल जीते थे, द्वापर में वह सौ साल जीने लगे और कलयुग में इंसानों की आयु और कम हो गई है, अब यह 50-60 साल हो गई है और शायद ही हम किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सुन पाते हों जो सौ साल तक जिया हो.



तीन दोषियों की याचिका हो चुकी है खारिजआपको बता दें उच्चतम न्यायालय ने नौ जुलाई, 2018 को इस सनसनीखेज अपराध में संलिप्त चार में से तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकायें खारिज कर दी थीं. अभी तक पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करने वाले दोषी 31 वर्षीय अक्षय के वकील ए पी सिंह ने बताया कि उसने मंगलवार को इस संबंध में याचिका दायर की है.

दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में 23 वर्षीय निर्भया से छह व्यक्तियों ने बर्बरता पूर्वक सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था. निर्भया की 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर में माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी.

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रखा था बरकरार
शीर्ष अदालत ने इससे पहले मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिका यह कहते हुये खारिज कर दी थी कि फैसले पर विचार करने का कोई आधार नहीं है. न्यायालय ने 2017 में निर्भया कांड के दोषियों को मौत की सजा देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था. उच्च न्यायालय ने इन मुजरिमों को मौत की सजा सुनाने के निचली अदालत के फैसले की पुष्टि की थी.

इस वारदात में शामिल छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य आरोपी नाबालिग था और उसे तीन साल की सजा पूरी करने के बाद सुधार गृह से रिहा कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें-
निर्भया कांड के दोषी अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की पुनर्विचार याचिका

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 10, 2019, 4:53 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर