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निर्भया गैंगरेप: फांसी में देरी पर केंद्र की सुप्रीम कोर्ट से मांग, दया याचिका के लिए सिर्फ 7 दिन दिए जाएं

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 6:42 PM IST
निर्भया गैंगरेप: फांसी में देरी पर केंद्र की सुप्रीम कोर्ट से मांग, दया याचिका के लिए सिर्फ 7 दिन दिए जाएं
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि फांसी की सजा की प्रक्रिया साफ होनी चाहिए.

निर्भया मामले (Nirbhaya rape case) में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) का दरवाजा खटखटाया है. निर्भया मामले में फांसी में हो रही देरी पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 6:42 PM IST
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नई दिल्‍ली. निर्भया मामले  (Nirbhaya rape case) में दोषियों को होने वाली फांसी के मामले में किसी न किसी कारण से देरी हो रही है. दोषियों को बार बार तारीख पर तारीख मिलती जा रही है. अब इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) का दरवाजा खटखटाया है. निर्भया मामले में फांसी में हो रही देरी पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की. केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि फांसी की सजा की प्रक्रिया साफ होनी चाहिए. इस मामले में देरी की वजह दूर करनी चाहिए.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि फांसी की सजा मिलने वाले दोषियों के पास मर्सी पिटीशन दाखिल करने के लिए सिर्फ 7 दिन की डेडलाइन बना दी जानी चाहिए. इसी तरह क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने की समय सीमा भी बनाई जानी चाहिए. गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद क्यूरेटिव पिटीशन के लिए समय सीमा बनाई जानी ज़रूरी है. ये करने से जल्द से जल्द दोषी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सकेगा.

दया याचिका कारिज हो तो 7 दिन में हो फांसी
केंद्र सरकार ने कहा की अगर किसी की दया याचिका खारिज हो जाती है तो उसे सात दिनों के अंदर फांसी दे दी जाए. उसकी पुनर्विचार याचिका या भूल सुधार याचिका का कोई महत्व ना हो. अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देते हैं तो सात दिनों में फांसी हो जानी चाहिए. केंद्र सरकार ने ये भी मांग की है कि कोर्ट के साथ-साथ राज्य सरकार और जेल अधिकारी को भी डेथ वारंट जारी करने का अधिकार दिया जाए. फिलहाल सिर्फ मजिस्ट्रेट ही डेथ वारंट जारी कर सकते हैं.

केंद्र सरकार ने कहा की फांसी की सजा पाए दोषी की पुनर्विचार याचिका, भूल सुधार याचिका और दया याचिका के निपटारे की समय सीमा तय होनी चाहिए. 2014 के शत्रुघ्न चौहान फैसले में बदलाव की मांग की.



दोषियों के पास अब भी विकल्‍प
निर्भया के गुनहगारों की सजा का ऐलान हो चुका है. लेकिन उन्‍हें एक फ़रवरी को फांसी हो पाएगी इस पर अब भी सवाल हैं. निर्भया के चारों गुनहगार यानी मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को फांसी के रास्ते में अभी भी रुकावटें हैं. अभी भी मौत से बचने के लिए चारों के पास नौ लाइफ लाइन हैं.

मुकेश की पुनर्विचार याचिका, क्यूरेटिव पीटिशन और आखिर में दया याचिका तीनों खारिज हो चुकी हैं. उसके पास जो लाइफ लाइन बची है वो है राष्ट्रपति भवन से खारिज दया याचिका को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की. विनय की क्यूरेटिव पीटिशन खारिज हो चुकी है. पर दया याचिका पर फैसला अभी बाकी है. दया याचिका खारिज होने के बाद फैसले को ऊपरी अदालत में चैलेंज करने का अधिकार भी उसके पास होगा. तीसरे दोषी पवन के पास तीन लाइफ लाइन हैं. एक क्यूरेटिव पीटिशन, दूसरी दया याचिका और तीसरी खारिज होने के बाद दया याचिका को अदालत में चुनौती देने का रास्ता. ऐसी ही लाइफ लाइन अक्षय के पास भी है.

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First published: January 22, 2020, 5:31 PM IST
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