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Nirbhaya Gang Rape Case: निर्भया के दोषियों की फांसी पर ICJ नहीं लगा सकता रोक- जस्टिस श्रीकृष्ण

चारों दोषियों को सुबह 5.30 बजे फांसी दी गई.

जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा दोषियों लिये भगवान की अदालत ही अंतिम अपीलीय अदालत है. आईसीजे अपील की अगली अदालत नहीं है.

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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण ने मंगलवार को निर्भया मामले में कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court) दोषियों की 20 मार्च को तय फांसी पर रोक नहीं लगा सकता. निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड मामले के चार दोषियों में से तीन ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाकर अपनी गैरकानूनी फांसी की सजा रोकने का अनुरोध किया है. उनका आरोप है कि उन्हें दोषपूर्ण जांच के जरिये दोषी करार दिया गया और प्रयोग का माध्यम (गिनी पिग) बनाया गया है.

    दोषियों के लिये भगवान की अदालत अंतिम
    जस्टिस श्रीकृष्ण ने दोषियों की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आईसीजे उन्हीं मामलों में कुछ कर सकता है जो उसके क्षेत्राधिकार में आते हों. मुझे नहीं लगता कि आईसीजे इस मामले में दखल देकर फांसी रोक सकता है, आईसीजे अपील की अगली अदालत नहीं है. उनके (दोषियों) लिये भगवान की अदालत ही अंतिम अपीलीय अदालत है. मानवाधिकार आयोग भी तभी दखल दे सकते हैं जब नैसर्गिक न्याय न हुआ हो.

    इस मामले में उचित प्रक्रिया के तहत पहले निचली अदालत, फिर हाईकोर्ट और उसके सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसके अलावा, सभी दोषियों ने शीर्ष अदालत में कई पुनर्विचार याचिकाएं और सुधारात्मक याचिकाएं भी दायर कीं. अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक निकाय उन मामलों पर निर्णय नहीं ले सकता है, जिन पर भारतीय न्यायपालिका पहले ही सुनवाई और अपील प्रक्रियाओं के माध्यम से निर्णय ले चुकी है.

    20 मार्च को होनी है फांसी
    चारों दोषियो की फांसी 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे होनी है. उससे पहले एक दोषी मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल कर दोबारा क्यूरेटिव लगाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन कोर्ट ने इस पर विचार करने से मना कर दिया. दोषियों के वकील ए पी सिंह ने दावा किया कि कुछ एनजीओ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में इस मामले को लेकर पहुंच गए हैं. उनका कहना था कि इस मामले में भारत की अदालतों ने जल्दबाजी दिखाई और दोषियों के हक में जाने वाली बातों की गलत ठहराया. (भाषा इनपुट के साथ)

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