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निर्भया बरसी: 6 साल बाद कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं?

निर्भया बरसी: 6 साल बाद कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं?

निर्भया कांड के छह साल बीतने के बाद भी क्या देश में महिलाएं सुरक्षित हुई हैं?

निर्भया कांड के छह साल बीतने के बाद भी क्या देश में महिलाएं सुरक्षित हुई हैं?

निर्भया कांड के छह साल बीतने के बाद भी क्या देश में महिलाएं सुरक्षित हुई हैं?

    16 दिसंबर 2012 की रात पांच दरिंदों ने 23 वर्षीय 'निर्भया' के साथ गैंग रेप किया था. इसके बाद इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए कई योजनाएं बनीं, फंड आया और प्रदर्शन हुए. इस घटना के 6 साल बीतने के बाद भी क्या देश में महिलाएं सुरक्षित हुई हैं?

    राष्ट्रीय राजधानी महिलाओं के लिए सुरक्षित है या नहीं? महिला सुरक्षा के नाम पर जारी हो रहे फंड का क्या हो रहा है? आंकड़े बताते हैं कि न तो महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हुए हैं और न निर्भया फंड का सही उपयोग हो रहा है और न तो 'निर्भीक गन' महिलाओं के काम आ रही है.

    जहां हुआ निर्भया कांड वहां अपराध
    जहां निर्भया कांड हुआ, उसी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध में कोई कमी नहीं आई है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों (2016) के मुताबिक, यहां देश के बीस लाख से अधिक की आबादी वाले 19 प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे अधिक अपराध हुए. बलात्कार के भी सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए. इन शहरों में पिछले साल महिलाओं के खिलाफ कुल 41,761 मामले दर्ज किये गए. इनमें से 33 प्रतिशत यानी 13,803 मामले अकेले दिल्ली के थे. एनसीआरबी के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 40 प्रतिशत मामले बलात्कार के थे.

    दिल्‍ली में निर्भया कांड के दौरान महिला सुरक्षा की मांग करती लड़कियां , file-photo


    आधे से भी कम खर्च हुआ निर्भया फंड

    देश को हिला देने वाले 2012 के दिल्‍ली के गैंगरेप कांड के बाद केंद्र सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के मकसद से निर्भया को समर्पित एक कोष (फंड) की स्‍थापना की थी. लेकिन केंद्र सरकार निर्भया फंड का 40 फीसदी भी अभी तक खर्च नहीं कर पाई है. वहीं देश के हर जिले में 'वन स्‍टॉप सेंटर' का सपना भी अधर में लटका है.

    आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय निर्भया कांड के पांच साल बाद 660 वन स्‍टॉप सेंटर्स में से सिर्फ 148 ही खोल सका है.

    आज निर्भया की बरसी को पांच साल पूरे हो चुके हैं.


    जबकि निर्भया कांड के बाद वन स्‍टॉप सेंटर को मंत्रालय ने पीडि़त महिलाओं के लिए सबसे जरूरी चीज माना था. सबसे खास बात है कि घटनास्‍थल रहे दिल्‍ली में ऐसा एक भी वन स्‍टॉप सेंटर नहीं खोला गया है.

    सीसीटीवी कैमरे पर बसों में आपत्ति, रेलवे स्टेशनों का प्रस्ताव

    -'निर्भया' के साथ दरिंदगी बस में हुई थी. इसलिए दिल्‍ली सरकार ने डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग केंद्रीय मंत्रालय को भेजी थी. इसके तहत निर्भया फंड से पैसा मांगा था. लेकिन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मना कर दिया और कहा कि इससे महिलाओं को कोई फायदा नहीं होगा.  उधर, रेल मंत्रालय अगले दो साल में निर्भया फंड से  रेलवे स्‍टेशनों पर करीब 35 हजार सीसीटीवी कैमरे लगवाएगा. ताकि अपराध रोकने में मदद मिल सके. इस प्रोजेक्‍ट पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

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    केंद्र सरकार निर्भया फंड का 50 फीसदी भी अभी तक खर्च नहीं कर पाई है.


    ऐसे में कौन खरीदेगा निर्भीक गन?
    निर्भया गैंग रेप की घटना ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी. कानपुर फील्ड गन फैक्ट्री में महिलाओं की आत्मरक्षा के लिए साइज में छोटी और वजन में हल्की रिवॉल्‍वर बनाई गई. निर्भया के नाम पर इसका नाम भी ‘निर्भीक गन’ रखा गया. लॉंचिंग समारोह में ही भेदभाव शुरू हो गया. 10 में से तीन रिवॉल्‍वर महिलाओं को तो 7 रिवॉल्‍वर पुरुषों को दी गईं. इसका वजन सिर्फ वजन 530 ग्राम है, लेकिन कीमत 1.26 लाख रुपये है. भला इसे कितनी महिलाएं खरीद पाएंगी. 2017 तक सिर्फ पांच हजार गन बिकी थी.

    Tags: Delhi police, Nirbhaya, Supreme Court

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