राफेल विवाद: लोकसभा में बोलीं रक्षा मंत्री, मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथों में खेल रहा विपक्ष

राफेल विवाद: लोकसभा में बोलीं रक्षा मंत्री, मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथों में खेल रहा विपक्ष
(फाइल फोटो- निर्मला सीतारमण)

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखबार द हिंदू का हवाला देते हुए पीएम मोदी पर राफेल डील में घोटाला करने का आरोप लगाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 8, 2019, 6:15 PM IST
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राफेल सौदे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने संसद में पलटवार किया. इस डील को लेकर एक अखबार की रिपोर्ट को खारिज करते हुए लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘यह गड़े मुर्दे उखाड़ने के जैसा है.’ विपक्ष पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है. विपक्ष की वायु सेना को मजबूत बनाने में कोई रुचि नहीं है.’

(यह भी पढ़ें- राफेल डील से जुड़ी रिपोर्ट पर बोलीं रक्षा मंत्री- अखबार ने एकतरफा खबर प्रकाशित की)

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखबार 'द हिंदू' का हवाला देते हुए पीएम मोदी पर राफेल डील में घोटाला करने का आरोप लगाया था. ऐसे में लोकसभा में अखबार की रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, सरकार ने राफेल पर हर जवाब दिया है. अखबार को पूरी सच्चाई रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अखबार ने एकतरफा रिपोर्ट प्रकाशित की है.



रक्षा मंत्री ने कहा, 'एक अखबार ने रक्षा सचिव द्वारा लिखित एक फाइल प्रकाशित की, यदि कोई समाचार पत्र केवल इसे प्रकाशित करता है तो पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल खड़े होना लाजमी है. अखबार को तत्कालीन रक्षा मंत्री के जवाब को भी प्रकाशित करना चाहिए है. केवल एकपक्ष को जगह नहीं देनी चाहिए.'



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तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने उस एमओडी नोट का जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि शांत रहें, चिंता की कोई बात नहीं है, सब कुछ ठीक हो रहा है. अब, आप पूर्व पीएमओ में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली एनएसी की दखलअंदाजी को कैसे देखते हैं? वह क्या था? उन्होंने जवाब दिया कि रक्षा सचिव इस मसले का समाधान पीएम के प्रधानसचिव से चर्चा करके निकाल सकते हैं.

एएनआई ने राफेल वार्ताओं पर MoD के असहमति नोट पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के जवाब को साझा किया है. इसे देखकर ऐसा लगता है कि पीएमओ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय इस मुद्दे की प्रगति पर निगरानी रखे हुए हैं.

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First published: February 8, 2019, 5:41 PM IST
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