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‘आत्मनिर्भर’ पैकेज की आलोचना पर बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण- सिर्फ कैश देने से फायदा नहीं होता

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 5:54 AM IST
‘आत्मनिर्भर’ पैकेज की आलोचना पर बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण- सिर्फ कैश देने से फायदा नहीं होता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार ने देश की इकोनॉमी उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के ‘आत्मनिर्भर पैकेज’ (AtmaNirbhar package) की घोषणा की है. इसमें आम आदमी को सीधे मदद की बात कम है. सरकार की इस बात के लिए आलोचना हो रही है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने लॉकडाउन (Lockdown) से हुए नुकसान के बाद इकोनॉमी को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के ‘आत्मनिर्भर पैकेज’ की घोषणा की है. इसमें आम आदमी को सीधे मदद की बात कम ही है. सरकार की इस बात के लिए आलोचना भी हो रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance minister Nirmala Sitharaman) ऐसी आलोचना से इत्तफाक नहीं रखतीं. कहती हैं- हाथ में पैसा देना ही विकल्प नहीं होता. इकोनॉमी को ऊपर उठाने के और भी रास्ते हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने इकोनॉमिक पैकेज (Economic Package) की जानकारी लगातार पांच दिन, पांच किश्तों में दी. न्यूज18 ने इकोनॉमिक पैकेज के बारे में बुधवार को उनसे अलग से बात की. वित्त मंत्री ने इस दौरान पूरे पैकेज को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा, ‘गरीबों की मदद का मतलब यह नहीं है कि उन्हें सीधे हाथ में पैसा दिया जाए. मदद करने का सिर्फ यही विकल्प नहीं है.’

कंपनियों को फायदा तो हर आदमी को लाभ...
निर्मला सीतारमण ने कहा कि उन्होंने ऐसी बहस सुनी है कि लोगों को मदद करने के लिए डायरेक्ट कैश दिया जाना चाहिए था. ऐसा कहने वालों में इकोनॉमिस्ट और दूसरे समीक्षक भी शामिल हैं. लेकिन सरकार ने ऐसा करने की बजाय दूसरा रास्ता चुना है. सरकार मानती है कि मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने से कंपनियों को मदद मिलेगी और अंतत: इसका फायदा हर आदमी को मिलेगा.



लॉकडाउन के बाद एक्स्ट्रा राशन दिया


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा करने के कुछ दिन के भीतर ही रिलीफ पैकेज का ऐलान किया. कुछ लोगों को सीधे कैश दिया गया और गरीबों को अतिरिक्त राशन दिया गया. लेकिन इसके बाद भी एक बड़े पैकेज की जरूरत थी.

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पैकेज में सीधी मदद का हिस्सा सिर्फ 10 फीसदी
दरअसल, सरकार ने अपने आत्मनिर्भर इकोनॉमिक पैकेज (AtmaNirbhar package) में लोन पर जोर दिया है. इसके अलावा फंड जुटाने और गांवों में रोजगार पैदा करना प्राथमिकता है. लेकिन पैकेज में कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका पहले से ही इंतजार किया जा रहा था. सच यह है कि पीएम मोदी ने जो 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था, उसका 10% ही सरकार अपने खाते से खर्च करेगी. जबकि, पीएम ने कहा था कि सरकार जिस पैकेज की घोषणा कर रही है वह जीडीपी के 10% के बराबर है.

मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया?
पैकेज की आलोचना करने वालों का कहना है कि इसमें उन लाखों मजदूरों (Migrant Laboures) के लिए कुछ भी नहीं है जो सड़क पर चलने को मजबूर हैं. जो अपना रोजगार गंवाकर गांव लौट रहे हैं. निर्मला सीतारमण इस सवाल के जवाब का देते हुए राज्यों की बात करती हैं. वे कहती हैं, ‘ऐसे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है. ग्राउंड लेवल पर राज्य ही काम करते हैं. इसलिए उन्हें इस बात की बेहतर जानकारी है कि इस स्थिति का सामना कैसे करना है.’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा-
1. प्रवासी मजदूर कोरोना वायरस (Coronavirus) के डर से शहर छोड़कर गांव लौट रहे हैं.
2. प्रवासी मजदूरों की मदद सिर्फ सरकार ही नहीं, हम सबको करनी चाहिए. यह बहुद दुखद समय है.
3. मजदूरों के विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. उन्हें (कांग्रेस) केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने राज्यों में मजदूरों की स्थिति ठीक करनी चाहिए.
4. हमें मजदूरों का डेटा और अच्छे तरीके से रखना होगा. ताकि उनकी मदद की जा सके और जब वे काम पर लौटें तो हमें उनके बारे में पता हो.

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First published: May 21, 2020, 5:54 AM IST
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