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74 दिन बाद खुले एनआईटी श्रीनगर के छात्र लौटने को तैयार नहीं, हालात सामान्‍य होने का करेंगे इंतजार

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 2:27 PM IST
74 दिन बाद खुले एनआईटी श्रीनगर के छात्र लौटने को तैयार नहीं, हालात सामान्‍य होने का करेंगे इंतजार
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सितंबर में ही एनआईटी में सत्र शुरू होने की तारीख की घोषणा कर दी थी.

1960 में स्‍थापित नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी श्रीनगर (NIT Srinagar) जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को मुख्‍यधारा से जोड़ने के सरकार के प्रयासों का प्रतीक बन गया है. जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 (Article-370) हटाने के बाद आज कैंपस में सेशन शुरू कर दिया गया. बावजूद इसके स्‍टूडेंट्स सुरक्षा (Safety) के मद्देनजर कैंपस लौटने को तैयार नहीं हैं. वे सूबे में हालात पूरी तरह सामान्‍य होने का इंतजार करने की बात कर रहे हैं. जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस (J&K Police) का कहना है कि अब चिंता की कोई बात नहीं है. स्‍टूडेंट्स पुरी तरह सुरक्षित हैं और वे घाटी (Valley) लौट सकते हैं.

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  • Last Updated: October 15, 2019, 2:27 PM IST
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उदय सिंह राणा

नई दिल्‍ली. एनआईटी श्रीनगर (NIT Srinagar) में 74 दिन बाद आज यानी मंगलवार को सत्र (Session) की शुरुआत हो गई है. हालांकि, छात्र-छात्राएं सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण अब भी कैंपस (Campus) लौटने को तैयार नहीं हैं, जबकि मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय ने पिछले महीने यानी सितंबर में ही सत्र शुरू होने की तारीख की घोषणा कर दी थी. बाद में सभी स्‍टूडेंट्स को इससे जुड़ा सर्कुलर भी भेज दिया गया था. सर्कुलर को इंस्‍टीट्यूट की वेबसाइट (Website) पर भी डाल दिया गया था. बता दें कि जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्‍छेद-370 (Article-370) हटाने से पहले ही 3 अगस्‍त को सभी स्‍टूडेंट्स को कैंपस खाली करने को कह दिया गया था.

स्‍टूडेंट्स को घाटी में सुरक्षा को लेकर पूरा भरोसा नहीं
कश्‍मीर घाटी (Kasmir Valley) के लोगों ने सोमवार को तब राहत की सांस ली, जब क्षेत्र में पोस्‍टपेड मोबाइल कनेक्‍शन (Postpaid Mobile connection) सुविधा फिर शुरू हो गई. कश्‍मीर घाटी के बाहर रहने वाले ज्‍यादातर स्‍टूडेंट्स को लगता है कि सुरक्षा के लिहाज से अभी वहां जाना जोखिम भरा है. इसलिए उन्‍होंने तुरंत कैंपस न जाकर घाटी में हालात सामान्‍य होने का इंतजार करने का फैसला किया है. एनआईटी श्रीनगर में इंजीनियरिंग की दूसरे वर्ष की 19 वर्षीय स्‍टूडेंट आफरीन फिलहाल दिल्‍ली में अपने रिश्‍तेदारों के घर रह रही हैं. वह कश्‍मीर घाटी लौटने से पहले श्रीनगर में रह रहे अपने पिता की हां का इंतजार कर रही हैं. वह बताती हैं कि मेरे पिता कश्‍मीर में काम करते हैं. वह पिछले हफ्ते ही घाटी लौटे हैं. हमें अभी भी भरोसा नहीं हो रहा है कि वहां हम पूरी तरह सुरक्षित हैं.

3 अगस्‍त को ही स्‍टूडेंट्स को हो गया था अहसास
कश्‍मीर में मोबाइल नेटवर्क शुरू होने के बाद आम लोगों के साथ ही स्‍टूडेंट्स को भी घाटी की सूचनाएं इकट्ठी करने में आसानी हो रही है. घाटी में पिछले महीने ही लैंडलाइन फोन सुविधा दोबारा शुरू कर दी गई थी. हालांकि, प्रीपेड कनेक्‍शन और इंटरनेट सेवा के लिए घाटी के लोगों को थोड़ा इंतजार करना होगा. 1960 में स्‍थापित नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी श्रीनगर (NIT Srinagar) जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu-Kashmir) को मुख्‍यधारा से जोड़ने के सरकार के प्रयासों का प्रतीक बन गया है. जब 3 अगस्‍त को एनआईटी के स्‍टूडेंट्स को बसों के जरिये घाटी के बाहर ले जाया जा रहा था, तभी उन्‍हें अहसास हो गया था कि कुछ बड़ा होने वाला है. जम्‍मू की रहने वाली स्‍टूडेंट पूजा बताती हैं कि उस दिन सब कुछ सामान्‍य दिनों के जैसा ही रहा. फिर अचानक हमसे कैंपस खाली करने को कहा गया तो हम समझ गए थे कि कुछ बड़ा होने वाला है.

काफी स्‍टूडेंट्स कराना चाहते हैं कश्‍मीर से बाहर ट्रांसफरपूजा बताती हैं कि स्‍टूडेंट्स को बसों में बैठाया गया और एक साथ घाटी के बाहर ले जाया गया. मुझे नहीं लगता कि अभी भी वहां सबकुछ सामान्‍य है. एनआईटी श्रीनगर के कुछ स्‍टूडेंट्स का तो यहां तक कहना है कि अब वे कश्‍मीर में अपनी पढ़ाई नहीं करेंगे. दिल्‍ली के सागर प्रसाद 2016 में आतंकी बुरहान वानी को ढेर करने के बाद घाटी में हुए हिंसक प्रदर्शनों को याद करते हैं. उनके मुताबिक, वानी को ढेर करने के बाद वहां का माहौल कभी शांत नहीं रहा. वहां हमेशा तनाव बना रहता था. अगर अभी वहां हालात सामान्‍य हो भी जाते हैं तो वे अस्‍थायी ही होंगे. मैं श्रीनगर से ट्रांसफर की कोशिश करूंगा. हालांकि, यह आसान नहीं होगा. एनआईटी श्रीनगर में करीब 2,800 स्‍टूडेंट्स हैं. इनमें 1,800 स्‍टूडेंट्स हॉस्‍टल में रहते हैं.

प्रशासन ने फैसला लेने से पहले कर ली थी सुरक्षा समीक्षा
जम्‍मू-कश्‍मीर प्रशासन का कहना है कि घाटी में स्‍टूडेंट्स पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे कैंपस लौट सकते हैं. वहीं, राज्‍य पुलिस का कहना है कि स्‍टूडेंट्स को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के एडीजी मुनीर खान ने कहा कि किसी को चिंता करने की जरूरत क्‍यों है? हमने एनआईटी में सेशन शुरू करने का फैसला लेने से पहले ही सुरक्षा हालात की समीक्षा कर ली है. राज्‍य पुलिस किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बीच सरकार ने कुछ पाबंदियों में ढील देकर छात्रों को कैंपस लौटने के लिए प्रोत्‍साहित करने की कोशिश की है. हालांकि, आज भी बड़ी संख्‍या में कश्‍मीरी घरों में ही रहे. प्रशासन ने समाचारपत्रों में विज्ञापन देकर संदेश दिया है कि क्षेत्र के हालात सामान्‍य हो गए हैं.

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First published: October 15, 2019, 1:30 PM IST
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