खादी उद्योग अब बनाएगा फैब्रिक के जूते, नितिन गडकरी ने की पहल

भारतीय फुटवियर उद्योग का आकार लगभग 50,000 करोड़ रुपये का है. photo: @nitin_gadkari
भारतीय फुटवियर उद्योग का आकार लगभग 50,000 करोड़ रुपये का है. photo: @nitin_gadkari

Nitin Gadkari Launching Khadi Shoes: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा डिज़ाइन किये गये खादी के कपड़े से बने उच्च गुणवत्ता वाले फुटवियर की बिक्री की शुरुआत की. ये फुटवियर रेशमी, सूती और ऊनी खादी के कपड़े से बने हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 11:13 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली: अब भारत के लोगों को भी फुटवियर में भी दस्तकारी किए हुए खादी (Khadi India) के कपड़े की सुंदरता महसूस करने का मौका मिलेगा. केन्द्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा डिज़ाइन किये गये खादी के कपड़े से बने उच्च गुणवत्ता वाले फुटवियर की बिक्री की शुरुआत की. ये फुटवियर रेशमी, सूती और ऊनी खादी के कपड़े से बने हैं. गडकरी ने केवीआईसी के ई-पोर्टल www.khadiindia.gov.in के माध्यम से खादी के इन फुटवियरों की ऑनलाइन बिक्री की भी शुरूआत की. गडकरी ने खादी के कपड़े से बने फुटवियरों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के अनूठे उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय बाजार पर कब्जा करने की अपार क्षमता है.

इससे पहले नीतिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने केवीआईसी से महिलाओं के हैंडबैग, पर्स, बटुआ जैसे चमड़े के उत्पादों के विकल्प के रुप में दस्तकारी किये हुए खादी के कपड़ों में विकास करने का निर्देश दिया था. गडकरी ने कहा, “खादी का फुटवियर एक अनूठा उत्पाद है. इसमें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और पटोला सिल्क, बनारसी सिल्क, सूती, डेनिम का उपयोग युवाओं को आकर्षित करेगा, जो इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं. ये फुटवियर सस्ते हैं. गडकरी ने उम्मीद जतायी कि ऐसे उत्पादों का विकास और विदेशों में निर्यात करके खादी इंडिया 5000 करोड़ रुपये के बाजार पर कब्जा कर सकता है.


ये फुटवियर महिलाओं के लिए 15 डिज़ाइनों और पुरुषों के लिए 10 डिज़ाइनों में लॉन्च किए गए हैं. इन फुटवियरों को अनूठा एवं फैशनेबल बनाने के लिए गुजरात के पटोला सिल्क, बनारसी सिल्क, बिहार के मधुबनी प्रिंटेड सिल्क, खादी डेनिम, तसर सिल्क, मटका - कटिया सिल्क, विभिन्न प्रकार के सूती कपड़े, ट्वीड ऊन और खादी के पॉली वस्त्र जैसे उत्तम खादी उत्पादों का उपयोग किया गया है. डिजाइन, रंग और प्रिंट की एक विस्तृत श्रृंखला में उपलब्ध, इन फुटवियरों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए पहने जाने वाले कपड़ों – औपचारिक, आकस्मिक और उत्सव के अवसर – के अनुकूल लगने के लिए डिज़ाइन किया गया है. खादी के इन फुटवियरों की कीमत 1100 रुपये से लेकर 3300 रुपये प्रति जोड़ी है.



भारतीय फुटवियर उद्योग का आकार लगभग 50,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें लगभग 18,000 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है. इसमें खादी उद्योग का लक्ष्य कम से कम 2% भाग पर कब्जा करना है, जो कि अनुमानित रूप से लगभग 1000 करोड़ रुपये के बराबर है. खादी के कपड़े के फुटवियर विकसित करने के पीछे का विचार प्रधानमंत्री के "स्थानीय से वैश्विक" के दृष्टिकोण के साथ मेल खाता है. इससे पहले, केवीआईसी ने टाइटन के साथ मिलकर अपनी पहली खादी कलाई घड़ी सफलतापूर्वक लॉन्च की थी, जोकि एक ट्रेंड सेटर रही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज