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जेडीयू में प्रशांत किशोर और पवन वर्मा की कौन लेगा जगह? चुनाव से पहले नीतीश कुमार की बढ़ीं उलझनें

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 2:52 PM IST
जेडीयू में प्रशांत किशोर और पवन वर्मा की कौन लेगा जगह? चुनाव से पहले नीतीश कुमार की बढ़ीं उलझनें
नीतीश कुमार अब पवन वर्मा और प्रशांत किशोर की जगह किसको देंगे मौक?

सवाल उठता है कि नीतीश कुमार अपने कुनबे में किन नेताओं को शामिल करते हैं. दरअसल उन्हें ऐसे नेता की तलाश है जिन पर वो प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) और पवन वर्मा (Pavan Varma) की तरह भरोसा कर सके.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 2:52 PM IST
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(प्रभाकर कुमार)

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय महासचिव पवन वर्मा (Pavan Varma) और उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को पार्टी से बाहर निकाल दिया. ये वो नेता थे जिन पर नीतीश आंख बंद कर विश्वास करते थे. लिहाज़ा ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प हो गया है कि नीतीश इन दो बड़े नेताओं की जगह पार्टी में किसको लाते हैं.

नीतीश के बेहद करीबी थे वर्मा
नीतीश पहली बार पवन वर्मा से भूटान में मिले थे. वो उन दिनों वहां भारत के एम्बेसडर थे. नीतीश भूटान एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गए थे. कहा जाता है कि वो वहां उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पवन वर्मा को पार्टी का एडवाइजर बनने का ऑफर दे दिया. बाद में जेडीयू की तरफ से वो राज्यसभा के सदस्य बन गए. वर्मा दिल्ली में नीतिश की पार्टी का एक चेहरा बन गए थे.

प्रशांत किशोर और नीतीश की जोड़ी
प्रशांत किशोर की कहानी और भी दिलचस्प है. जेडीयू ने साल 2015 में किशोर और उनकी टीम को चुनाव प्रचार के लिए हायर किया था. बाद में वो नीतीश के इतने करीबी हो गए कि उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया. उस वक्त नीतीश के इस फैसले का विरोध भी हुआ था. पार्टी में कई लोग प्रशांत किशोर के कामकाज के तरीके से भी नाराज़ रहते थे. वो पार्टी के बड़े से छोटे हर नेता को अपने तरीके से चुनाव प्रचार करने के लिए कहते थे. जो किसी को भी पसंद नहीं था.

अब कौन?अब सवाल उठता है कि नीतीश अपने कुनबे में किन नेताओं को शामिल करते हैं. दरअसल उन्हें ऐसे नेता की तलाश है जिन पर वह प्रशांत किशोर और पवन वर्मा की तरह भरोसा कर सके. आईए एक नजर डालते हैं उन नामों पर जो आने वाले दिनों में नीतीश के करीबी हो सकते हैं.

आपसीपी सिंह
रामचंद्र प्रसाद सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के ब्यूरोक्रेट रहे हैं. जब नीतीश रेल मंत्री थे तो आरसीपी सिंह उस वक्त उनके निजी सचिव थे. आरसीपी सिंह बिहार के नालंदा से आते हैं. वही जिला जहां के नीतीश रहने वाले हैं. सिंह नीतीश से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जेडीयू में शामिल हो गए. बाद में वह जेडीयू के ऐसे नेता बने जो नीतीश के बेहद करीबी रहे. इन दोनों नेताओं का साथ पिछले 25 सालों से रहा है. आरसीपी सिंह फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं.

राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह
पिछले तीन दशकों से राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह नीतीश कुमार के अच्छे और बुरे वक्त में साथ रहे हैं. कहा जाता है कि ललन सिंह को कागजी कामों में महारत हासिल है. चाहे लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले में सबूत जमा करना हो या पार्टी का काम, हर जगह उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है. चारा घोटाला मामले में पटना हाईकोर्ट में लालू के खिलाफ याचिका डालने वालों में ललन सिंह सबसे आगे थे. बिहार की सत्ता में नीतीश कुमार की एंट्री के बाद से ही ललन सिंह उनके प्रमुख रणनीतिकार रहे हैं. ललन सिंह बिहार के भूमिहार समाज से आते हैं. भूमिहार जाति के वोटर्स के बीच उनकी अच्छी पैठ है.

संजय झा
संजय झा वर्तमान में राज्य में जल संसाधन मंत्री हैं. वह पहले भाजपा में थे. झा ने अपने करियर की शुरुआत राजीव प्रताप रूडी के प्रतिनिधि के रूप में की, जो नागरिक उड्डयन मंत्री (2003-04) थे. समय के साथ राजधानी दिल्ली में रहने के दौरान, संजय झा अरुण जेटली के बहुत करीब हो गए. कहा जाता है कि वह जेटली और कुमार के बीच बातचीत का जरिया बन गए थे. संजय झा की वजह से ही नीतीश हमेशा जेटली से उनके घर पर मिलने जाते थे.

अशोक चौधरी
राज्य में भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी पार्टी के दलित चेहरा हैं. वे पहले कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष थे. जेडीयू में आने के बाद वो अपने साथ कई नेताओं को लेकर आए. उन्होंने विदेश में पढ़ाई की है.

विजय कुमार चौधरी
विजय कुमार चौधरी भी नीतीश के करीबी माने जाते हैं. वो भूमिहार हैं और वर्तमान में बिहार विधानसभा के स्पीकर हैं.

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First published: February 2, 2020, 2:29 PM IST
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