COVID-19: कोरोना के इलाज में कारगर साबित हो सकता है Nitric Oxide- रिसर्च में दावा

  (AP Photo/Anupam Nath)
(AP Photo/Anupam Nath)

कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के बीच दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार इसका कारगर इलाज खोज रहे हैं. इसी कड़ी में शोधकर्ताओं का दावा है कि नाइट्रिक ऑक्साइड एकमात्र ऐसा पदार्थ है, जो अब तक SARS-CoV-2 पर सीधा प्रभाव डालता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 2:20 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus In India) के प्रकोप से बेहाल दुनिया में वैज्ञानिक लगातार इसका सटीक इलाज खोज रहे हैं, ताकि लोगों को इस संक्रमण से मुक्ति मिले और जीवन फिर से पहले जैसी हो जाए. अब एक खोज में शोधकर्ताओं ने पाया है कि साल 2003 के SARS महामारी के वक्त जिन तरीकों से उसे नियंत्रित किया गया था, कुछ ऐसा ही SARS-COV-2 वायरस के साथ भी किया जा सकता है. जर्नल रेडॉक्स बायोलॉजी में पब्लिश्ड एक स्टडी के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड (एनओ) एंटीवायरल गुणों वाला एक कंपाउंड है, जो शरीर में ही बनता है.

स्वीडन में उप्साला विश्वविद्यालय के लेखक एके लुंडकविस्ट ने कहा 'हमारी जानकारी में नाइट्रिक ऑक्साइड एकमात्र पदार्थ है, जो अब तक SARS-CoV-2 पर सीधा प्रभाव डालता है.' यह बात अलग है कि अब तक कोविड -19 के लिए कोई प्रभावी इलाज नहीं मिल पाया है, इसलिए ट्रायल किए गए उपचारों का मुख्य जोर लक्षणों से राहत देने पर है.

अस्पतालों पर बढ़ रहे भार और मृत्यु दर को कम कर सकता Nitric Oxide
शोधकर्ताओं का दावा है कि यह अस्पतालों पर बढ़ रहे भार और मृत्यु दर को कम कर सकता है. हालांकि यह साबित करना संभव नहीं है कि कौन से इलाज ने संक्रमण के पीछे वास्तविक वायरस को प्रभावित किया है. नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) शरीर में प्राकृतिक रूप से निर्मित एक कंपाउंड है. यह अलग-अलग बॉडी पार्ट्स को कंट्रोस करने में एक हार्मोन की तरह काम करता है. उदाहरण यह ब्ल्ड वेसल्स में तनाव और अंगों के बीच उनके अंदर ब्लड सर्कुलेशन को नियंत्रित करता है.
इसकी मदद से एक्यूट लंग फेलियर की स्थिति में ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल को बढ़ावा देने के लिए NO को कम कंसंट्रेशन में दिया जा सकता है. साल 2003 के SARS कोरोनावायरस महामारी के दौरान इसे सफलता के साथ आजमाया गया था. इसके इस्तेमाल में सफल परिणामों का एक प्रमुख कारण यह था कि रोगियों के फेफड़ों में सूजन कम हो गई.





नाइट्रिक ऑक्साइड संक्रमण से बचाव करता है. एंटीबैक्टेरियल और एंटीवायरल दोनों होने के कारण रिसरचर्स की इसमें रुचि होती है. साल 2003 में, S-Nitroso-N-acetylpenicillamine (SNAP) से रिलीज्ड NO एक अलग एंटीवायरल प्रभाव साबित हुआ. रिसरचर्स ने अब इस बात की खोज है कि मौजूदा कोरोनोवायरस इस कंपाउंड पर कैसे रिएक्ट करता है. स्टडी में लिखा गया है कि 'जब तक हमें कोई असरदार वैक्सीन नहीं मिलती हमें उम्मीद है कि NO इन्हेल करार लाभकारी हो सकताहै.'
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