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कारगिल दिवसः शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के पिता बोले- भारत इसे मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए

26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के 22 साल पूरे हो जाएंगे.

26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के 22 साल पूरे हो जाएंगे.

कारगिल दिवस के 22 साल पूरे होने पर दिवंगत कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की है. कालिया ने कहा, 'मैं देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को नमन करता हूं. पाकिस्तानी सेना की क्रूर यातना के लिए सरकार के कदम पर्याप्त नहीं थे. भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए.

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    नई दिल्ली. 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के 22 साल पूरे हो जाएंगे. करिगल के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना ने बड़े स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया है. भारत और पाकिस्तान के बीच 60 दिनों तक चलने वाले कारगिल युद्ध में सेना के कई जवान शहीद हो गए थे. इन्हीं शहीद जवानों में से एक हैं कैप्टन सौरभ कालिया. इतिहास हमेशा इस बात का गवाह रहेगा कि कैप्टन सौरभ कालिया के बलिदान से ही कारगिल युद्ध की शुरुआती इबारत लिखी गई है.

    कारगिल दिवस के 22 साल पूरे होने पर दिवंगत कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की है. कालिया ने कहा, 'मैं देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को नमन करता हूं. पाकिस्तानी सेना की क्रूर यातनाओं के खिलाफ भारत सरकार द्वारा जो कदम उठाए गए थे वो पर्याप्त नहीं थे. भारत को इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहिए.

    जानकारी के लिए बता दें कि शहीद कैप्टन सौरभ कालिया को पाकिस्तानी सेना ने अमावनीय यातनाएं दी थीं. सौरभ के अंग क्षत-विक्षत कर दिए थे. उनके शरीर पर यातनाओं के निशान थे. कैप्टन सौरभ कालिया का शव नौ जून, 1999 को क्षत-विक्षत हालत में मिला था. कैप्टन सौरभ कालिया और उनके पांच साथी कारगिल में पाकिस्तान सेना की टोह लेने गए थे. शहीद के पिता ने कहा कि उस समय वाजपेयी सरकार को यह मुद्दा पाकिस्तान या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठना चाहिए था.



    पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही रो पड़ा था पूरा पालमपुर
    कारगिल युद्ध के पहले शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया का पार्थिव शरीर पालमपुर के शहीद कैप्टन विक्रम बतरा मैदान में पहुंचा था तो माता विजया कालिया ने बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा दिया था. यह देखकर सारा पालमपुर रोया था. बेटे का क्षत-विक्षत शव देखकर परिजनों में पाकिस्तान के खिलाफ भारी आक्रोश था.

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