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OPINION: S-400 डील का अमेरिका-भारत के रिश्तों पर नहीं पड़ेगा 'खराब असर'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  (फाइल फोटो- PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो- PTI)

संकेत स्पष्ट हैं, बीते कुछ समय से रूस की पाकिस्तान से और भारत की अमेरिका से करीबी बढ़ने के बीच दोनों देश अब अपने रिश्ते और बेहतर करना चाहते हैं.

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    (महा सिद्दिकी)

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19वें भारत-रूस वार्षिक समिट के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं. वह शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाऊस में आधिकारिक बातचीत करेंगे. हालांकि रूसी नेता के भारत पहुंचने के कुछ घंटे के भीतर ही दोनों नेताओं के बीच गुरुवार शाम को बैठक हुई है. इसके साथ ही 7, लोक कल्याण मार्ग में रात का खाना भी दोनों नेताओं ने साथ खाया.

    दोनों नेता 24 घंटे के भीतर दो बार बैठक करेंगे. यह बैठक इस साल मई में सोची में एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन आयोजित करने वाले पांच महीने भीतर हुई. संकेत स्पष्ट हैं, बीते कुछ समय से रूस की पाकिस्तान से और भारत की अमेरिका से करीबी बढ़ने के बीच दोनों देश अब अपने रिश्ते और बेहतर करना चाहते हैं.

    रूस में भारत के राजदूत रह चुके अनित त्रिगुणायत ने कहा, 'यह असली दुनिया है. रूस की अपनी रुचि, रणनीतिक, वैश्विक, बाजार में रुचि है, ऐसा ही भारत के साथ भी है.' उन्होंने यह भी बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि  रूस,  पाकिस्तान के रास्ते  से अलग हो रहा है.  उन्होंने कहा,  'रूस को यह एहसास हुआ कि भारत एक बड़ा बाजार और लोकतंत्र है जहां चीजें काम करें या नहीं, लेकिन कम से कम आप बात कर सकते हैं.'

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    कई दशक पहले के संबंधों के बारे में उन्होंने कहा, 'रूसियों के लिए जमीनी स्तर का स्नेह है और इसलिए यह संबंध कहीं भी नहीं जा रहा है, हालांकि इसका घटक बदल सकता है.'

    रक्षा इस रिश्ते का आधार है और दोनों पक्ष एस -400 सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं. रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत $ 6 बिलियन के लिए 5 एस -400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेंगा. भारत का मानना है कि अगर यह सौदा से आगे बढ़ता है तो "भारत-अमेरिका संबंधों पर 'नकारात्मकता' नहीं आएगी.

    बता दें 6 सितंबर को भारत-यूएस 2 + 2 वार्ता के दौरान, अमेरिकियों ने माना था कि भारत रातों रात रूसी प्रणाली पर नहीं पहुंच जाएगा. इसके साथ ही भारत की सुरक्षा को खतरे में नहीं डालना अमेरिकी हित में भी है.

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    पत्रकारों से बात करने के कुछ दिन बाद दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के प्रिंसिपल डिप्टी असिस्टेंट ऑफिसर ऐलिस वेल्स ने कहा था कि भारत पर रूस और ईरान से संबंधित प्रतिबंधों का इरादा नहीं है और स्टेट सेक्रेटरी माइक पोम्पियो द्वारा भी यही कहा गया है. यह एक और संकेत था कि एस -400 का सौदा करने से रूस पर लगाए गए प्रतिबंध अधिनियम (सीएएटीएसए) के जरिए भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगेगा.

    हालांकि, भुगतान के दौरान चुनौतियां आ सकती हैं लेकिन रूस का मानना है कि समस्या को अवसर में बदला जा सकता है.  गजप्रंबैंक के प्रतिनिधि कार्यालय के प्रमुख सर्गेई मिट्रेकिन का मानना है कि स्पष्ट चुनौतियों के बावजूद भारत-रूस रुबल और रुपया में सौदा करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं.

    सर्गेई ने कहा, 'प्रतिबंध व्यापार और रिश्तों को भी नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन वे अवसर भी पैदा करते हैं लेकिन अमेरिकियों द्वारा बनाए गए इन बाधाओं के चलते भारत और रूस करीब आने को बाध्य हो जाते हैं. भौगोलिक दृष्टि से और क्षेत्रीय रूप से नए गठजोड़ बनाने के अलावा, यह जा रहा है दुनिया भर में व्यापार मुद्रा के रूप में डॉलर की भूमिका को कम करने की दिशा में पहला कदम बनें.'

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