35-A पर J&K प्रशासन के रुख में बदलाव नहीं, 'केवल चुनी हुई सरकार ले सकती है कोई स्‍टैंड'

कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रोहित कंसल ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 35 ए पर सुनवाई को टालने के अनुरोध पर राज्य सरकार का रुख वैसा ही है जैसा 11 फरवरी को अनुरोध किया गया था.'

पीटीआई
Updated: February 25, 2019, 12:05 AM IST
35-A पर J&K प्रशासन के रुख में बदलाव नहीं, 'केवल चुनी हुई सरकार ले सकती है कोई स्‍टैंड'
(सांकेतिक तस्वीर)
पीटीआई
Updated: February 25, 2019, 12:05 AM IST
संविधान के अनुच्छेद 35ए में बदलाव को लेकर जम्मू कश्मीर का प्रशासन कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा. जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने कहा है कि चुनी गई सरकार ही इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख पाने में समर्थ है. अनुच्छेद 35ए पर इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है.

पहले ऐसी कुछ भ्रामक खबरें आ रहीं थीं, जिनमें कहा जा रहा था कि नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एनडीए सरकार अध्यादेश के जरिए इसमें बदलाव ला सकती है.

कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रोहित कंसल ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 35ए पर सुनवाई को टालने के अनुरोध पर राज्य सरकार का रुख वैसा ही है जैसा 11 फरवरी को अनुरोध किया गया था.' दरअसल, कंसल उस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्‍या इस विवादास्‍पद मुद्दे पर गर्वनर प्रशासन के स्‍टैंड में कोई बदलाव आया है.

(यह भी पढ़ें: J&K: तनाव की खबरों के बीच राज्यपाल की सफाई, अफवाहों पर न दें ध्यान)

गर्वनर प्रशासन के मुख्‍य प्रवक्‍ता नियुक्‍त किए गए रोहित कंसल ने जम्‍मू कश्‍मीर की जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्‍यान न दें और आधारहीन और झूठी खबरों से परेशान न हों. उन्होंने कहा कि आधी अधूरी और अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर लोग घबराहट पैदा नहीं करें. इनमें से ज्यादातर सूचनाएं आधारहीन हैं.

(यह भी पढ़ें: आखिर क्यों मचा है आर्टिकल 35A पर कोहराम? जानें पूरा मामला)

इससे पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से अपील की है कि थी वे शांत रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें. मलिक ने रविवार को कहा कि अफवाहें लोगों के दिमागों में बिना वजह का डर पैदा कर रही हैं जो तनाव और जन जीवन में खलल का कारण बन रहा है.
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा, ‘कर्फ्यू और अन्य कार्रवाइयों को लेकर अफवाहों पर यकीन नहीं करें. फोर्स कुछ सुरक्षा संबंधी कार्रवाई कर रही है, लेकिन यह पूर्णरूप से पुलवामा हमले से संबंधित हैं जो अप्रत्याशित था.’
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