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किसानों संग बैठक में कृषि मंत्री ने कहा- MSP में नहीं होगा कोई बदलाव

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

Farm Protest: किसान नेताओं ने बैठक में सरकार से मांग की है कि वह कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 9:52 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने बैठक में किसान नेताओं (Farmer Leaders) से कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) को नहीं छुआ जाएगा, एमएसपी (MSP) में कोई बदलाव नहीं होगा. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के साथ बैठक के बाद कहा कि कुछ मुद्दे पिछली और आज की बैठकों में उठाए गए. किसान संगठन खासतौर पर इन्हें लेकर ही चिंतित हैं. सरकार में अहंकार नहीं है, किसानों के साथ खुले दिमाग से बातचीत  की जा रही है. किसानों को चिंता है कि नए कानूनों से एपीएमसी खत्म हो जाएगी.

तोमर ने कहा सरकार यह देखने के बारे में विचार करेगी कि APMC को और मजबूत किया जाए और इसका उपयोग बढ़े. नए कानून APMC के दायरे से बाहर प्राइवेट मंडियों के लिए प्रावधान रखते हैं. इसलिए, हम एएमपीसी अधिनियम के तहत प्राइवेट के साथ-साथ मंडियों के लिए एक समान कर होने के बारे में भी विचार करेंगे. तोमर ने कहा कि यह बैठक में उठाया गया था कि अगर व्यापार मंडी के दायरे से बाहर होता है, तो यह पैन कार्ड के आधार पर होगा, जिसे आज कोई भी आसानी से प्राप्त कर सकता है. इसलिए, व्यापारी को पंजीकृत होना चाहिए. इसलिए, हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि व्यापारी पंजीकृत हो जाए.

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत कर रही है और चर्चा के दौरान आने वाला मुद्दा निश्चित रूप से एक समाधान तक पहुंच जाएगा. इसीलिए मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे अपना आंदोलन समाप्त करें ताकि दिल्ली के लोगों को उन समस्याओं का सामना न करना पड़े जिनका वे विरोध के कारण सामना कर रहे हैं.




बैठक के बाद वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा कि चर्चा के बिंदुओं को तैयार कर लिया गया है. इन बिंदुओं पर 5 दिसंबर को चर्चा की जाएगी और हमें आशा है कि विरोध प्रदर्शन उसी दिन खत्म हो जाएगा.

किसान चाहते हैं कानूनों को वापस लिया जाए
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा सरकार ने सरकार ने एमएसपी पर संकेत दिए हैं. ऐसा लगता है कि एमएसपी को लेकर उनका रुख ठीक रहेगा. वार्ता ने थोड़ी प्रगति की है. टिकैत ने कहा कि मुद्दा कानूनों को पूरी तरह से वापस लेने के बारे में है. केवल एक ही नहीं, बल्कि कई मुद्दों पर चर्चा होगी. किसान चाहते हैं कि कानूनों को वापस लिया जाए. सरकार एमएसपी और अधिनियमों में संशोधन के बारे में बात करना चाहती है.

आजाद किसान संघर्ष समिति के हरजिंदर सिंह टांडा ने कहा कि वार्ता में बहुत कम प्रगति हुई है. हाफ टाइम में ऐसा लग रहा था कि आज की मीटिंग का कोई नतीजा नहीं निकलेगा, लेकिन आधी बैठक के बाद लगा कि सरकार पर आंदोलन का दबाव है. वार्ता अनुकूल माहौल में आयोजित की गई.

टांडा ने कहा कि हम आशान्वित हैं. कानून गलत हैं. अगली बैठक में हम सरकार पर दबाव बनाएंगे. उन्हें कहना होगा कि वे कानूनों को वापस लेंगे. मेरी राय में, इसे कल के बाद बैठक के दिन में अंतिम रूप दिया जाएगा.

5 दिसंबर को होगी अगले दौर की वार्ता
किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को रद्द करने की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच चौथे दौर की वार्ता के लिए गुरुवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की. अब दोनों पक्षों के बीच 5 दिसंबर को फिर से बातचीत होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और पंजाब से सांसद एवं वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की.

सरकार ने बताया कि वार्ता दोपहर को आरंभ हुई और सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई. वहीं किसान नेताओं ने बैठक में सरकार से मांग की है कि वह कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत करें. नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की चिंताओं पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने के सरकार के प्रस्ताव को किसान प्रतिनिधियों ने ठुकरा दिया था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच एक दिसंबर को हुई बातचीत बेनतीजा रही थी.

सरकार ने अस्वीकार कर दी थी कानून निरस्त करने की मांग
सरकार ने कानून निरस्त करने की मांग अस्वीकार कर दी थी और किसान संगठनों से कहा था कि वे हाल में लागू कानूनों संबंधी विशिष्ट मुद्दों को चिह्नित करें और गुरुवार को चर्चा के लिए दो दिसंबर तक उन्हें जमा करें.

सरकार का कहना है कि सितंबर में लागू किए गए ये कानून बिचौलियों की भूमिका समाप्त करके और किसान को देश में कहीं भी फसल बेचने की अनुमति देकर कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार करेंगे, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीदारी प्रणाली को समाप्त कर देंगे और मंडी प्रणाली को अप्रभावी बना देंगे.

प्रदर्शनकारी किसानों ने बुधवार को भी ये मांग की थी कि केंद्र संसद का विशेष सत्र बुलाकर नए कानूनों को रद्द करे.
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