रमन सिंह बोले- 2019 में और बढ़ेगा मोदी का जादू, इधर एक पीएम हैं, उधर छह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को लेकर अपनी सरकार की प्लानिंग और उसमें आ रही समस्याओं पर बात की.

फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: April 16, 2018, 6:34 PM IST
रमन सिंह बोले- 2019 में और बढ़ेगा मोदी का जादू, इधर एक पीएम हैं, उधर छह
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की फाइल फोटो
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Updated: April 16, 2018, 6:34 PM IST
फ़र्स्टपोस्ट के लिए अमितेष
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कोई चुनौती नहीं है. विपक्ष की तरफ से मोदी की घेराबंदी की कोशिश पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री का जादू अभी और बढ़ेगा.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कोशिशों का जिक्र करते हुए रमन सिंह ने कहा कि वह नक्सलियों की टॉप लीडरशिप से बातचीत के लिए भी तैयार हैं. फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को लेकर अपनी सरकार की प्लानिंग और उसमें आ रही समस्याओं पर बात की.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा, 'मोदी जी की राह में फिलहाल तो कोई चुनौती नहीं दिख रही है. विपक्ष इतना ज्यादा विभाजित है कि आज की तारीख में कोई चुनौती ही नहीं है.' दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आजकल आक्रामक होकर सरकार पर वार कर रहे हैं. उनकी तरफ से विपक्षी दलों को मोदी के खिलाफ एक करने की कोशिश हो रही है. कुछ इसी तरह की कोशिश पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं. डॉ. रमन सिंह ने इन कोशिशों पर ही सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा, 'अगर आप कांग्रेस को चुनौती मानते हैं तो यूपी में कांग्रेस चौथे नंबर पर जाएगी. बिहार में तीसरे- पांचवे नंबर जाएगी, वेस्ट बंगाल में भी कांग्रेस का क्या अस्तित्व रहेगा?’

बीते 14 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुई पीएम नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान की तस्वीर

रमन सिंह ने विपक्षी एकता पर तंज कसते हुए कहा कि कई लोगों के तो अभी से 'कोट' बन गए हैं. उन्होंने कहा, 'इधर एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उधर 6 प्रधानमंत्री. देश की जनता को निर्णय लेने में भी समझ में आ जाता है कि मुलायम, मायावती, ममता से लेकर राहुल, राहुल से लेकर और 6 लोग आ गए.'


हालांकि अभी देश के कई राज्यों में हुए लोकसभा के उपचुनाव में बीजेपी की हार को उन्होंने एक तात्कालिक प्रतिक्रिया बताते हुए इसे अगले आम चुनाव से बिल्कुल अलग बता दिया. दावा किया कि अगले लोकसभा चुनाव की लड़ाई अलग होगी, उसकी तुलना हाल के उपचुनाव से नहीं की जा सकती.

इस साल ही अक्टूबर-नवंबर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इन चुनावों को लेकर रमन सिंह आत्मविश्वास से लबरेज दिख रहे हैं. उनको अपने विकासकार्यों पर भरोसा है. लेकिन, उन्हें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत योगी के अगले कदम का भी इंतजार है. बातचीत के दौरान रमन सिंह ने इस बात को भी स्वीकार किया कि अगर तीसरी ताकत (अजीत योगी) विधानसभा चुनाव के दौरान मैदान में आती है, तो इसका सीधा फायदा उन्हें ही होगा. रमन सिंह ने कहा 'हमारी सीधी लड़ाई कांग्रेस से है, यहां कोई दूसरी लड़ाई है. लेकिन, अजीत योगी का अस्तित्व तो रहेगा.'

पिछले विधानसभा चुनाव में नक्सल प्रभावित बस्तर की 12 सीटों में से 8 सीटें कांग्रेस के पास हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को भरोसा है कि इस बार यह आंकड़ा चेंज होगा. इस बार बहुत बेहतर रिजल्ट रहेगा. चुनाव के पहले अभी आंकड़े पर बोलने से वो कतरा रहे हैं. लेकिन, बेहतर रिजल्ट का दावा जरूर कर रहे हैं.

दरअसल, उनका दावा बस्तर में हुए विकासकार्यों को लेकर है. उनको ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा भी विकास के दम पर है. बस्तर संभाग के ही बीजापुर जिले में प्रधानमंत्री ने आयुष्मान योजना की शुरुआत की है. नक्सलियों के गढ़ बीजापुर के जांगला में सफल रैली के बाद अब विकास की उम्मीदें और परवान चढ़ने लगी हैं.

हालांकि वह इसे एक शुरुआत भर मान रहे हैं. उन्होंने कहा, '6 लाख 40 हजार लोग ऐसे बचे हैं जिनके घर में बिजली नहीं है. लेकिन, इसे हम इसी जून तक पूरा कर लेंगे.' नक्सलियों के प्रभाव के चलते जहां बिजली नहीं पहुंच पा रही है, वहां सोलर दिया जा रहा है.

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा 'बीजापुर और सुकमा के कुछ इलाकों में जहां हम बिजली नहीं पहुंचा रहे हैं, वहां सोलर दे रहे हैं. क्योंकि नक्सली वहां खंभे तोड़ देते हैं.' हालांकि नक्सलियों के खौफ के चलते सोलर भी स्कूली बच्चों को दिया जाता है, जिससे वो ले जाकर अपने घरों में इसे रखें. क्योंकि उन बच्चों के मां-बाप आने से कतराते हैं.


बातचीत के दौरान उन्होंने कहा 'अभी लड़ाई जो चल रही है वो बिजली-सड़क को लेकर है. 800 करोड़ रुपये की सड़क और बन रही है. हमारे लिए दोहरी चुनौती होती है, एक तो सड़क बनाना और दूसरा सड़क बनाने वालों को सुरक्षा देना. यही करते-करते हम 14 साल में यहां पहुंचे हैं.'

यूं तो रमन सिंह अपनी सरकार की कई योजनाओं को लेकर विकास के रास्ते पर चलने की बात कर रहे हैं. लेकिन, पीडीएस योजना को वो अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, जिसके तहत आदिवासी समेत सभी गरीब परिवारों को अनाज मुहैया कराया जाता है.

रमन सिंह कहते हैं, ‘हमारा सबसे बड़ा एचीवमेंट तो पीडीएस है. इससे कुपोषण, भूखमरी के मामले में सबसे ज्यादा फर्क आया है. पहले तो वो कोदो कूट के पीते थे, कमाने-खाने आंध्र जाते थे. लेकिन, अब उनको गारंटी हो गई है कि उन्हें खाने के लिए चावल मिल जाएगा.'


बिजली और सड़क के बाद छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में तैयारी सभी कॉलेज स्टुडेंट्स के हाथों में स्मार्ट फोन देने की है. मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान विकास के दावे करते हुए कहा 'स्काई योजना के अंतर्गत हर कॉलेज स्टूडेंट को स्मार्ट फोन देने की तैयारी है. इसमें सभी कॉलेज के छात्र आ जाएंगे. मसलन गेजुएशन से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन के अलावा सभी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स के हाथों में स्मार्ट फोन होगा.'

सरकार की कोशिश इसी साल मई के अंत तक स्काई योजना की शुरुआत करने की है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कॉलेज स्टुडेंट्स को मुफ्त में मोबाइल देकर सरकार युवा वर्ग को अपनी तरफ लाने में लगी है. हालांकि सरकार को इन इलाकों में सड़कों को बनाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

फोटो- रमन सिंह के फेसबुक वाल से साभारछत्तीसगढ़ में लगभग 150 किलोमीटर एनएच कच्ची सड़क थी. इसके बनने में हुई देरी के पीछे का कारण बताते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह कहते हैं 'इस इलाके में एनएच बनने में वक्त लगा. हमने बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) को लाया था. लेकिन, मूल विषय ये है कि बीआरओ 8 साल काम करके भाग गया.' उन्होंने कहा, 'बीआरओ को आग्रह करते रहे इससे हमारा समय खराब हुआ. बीआरओ नॉर्थ ईस्ट में बना लेता है लेकिन, यहां हाथ उठाकर चला गया. कई बार हमलोगों ने जाकर ऊपर भी बात भी की. रमन सिंह कहते हैं कि यहां काम करना, कठिन लड़ाई है. क्योंकि लोग लूंगी पहनकर घूम रहे हैं. अचानक फायर कर दिया जवान पर तो जवान क्या करेगा?'

मुख्यमंत्री रमन सिंह कहते हैं 'आमने-सामने बॉर्डर पर लड़ना आसान है, आप पोस्ट को देख रहे हो. आपकी वर्दी अलग है, उसकी वर्दी अलग है. सीमा अलग है. अंधाधुंध फायर करो, बम चला दो, गोली चला दो. यहां कुछ नहीं कर सकते. मालूम है कि नक्सली वहां बैठे हैं. मगर आप सभी को उड़ा नहीं सकते. नक्सली गांव वालों के बीच में बैठे होते हैं. चारों तरफ महिलाओं और बच्चों को बिठाकर रखते हैं. जिससे पहले मरें तो ये मरें. नक्सली चार लेयर में रहते हैं. यही सबसे बड़ी चुनौती है.'

नक्सल प्रभावित इलाके की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि घटना को अंजाम देकर एक राज्य से दूसरे राज्य में नक्सली चले जाते हैं. हालांकि उन्हें भरोसा है कि विकास की राह पर चलकर नक्सलियों की धार को कुंद किया जा सकता है. फिर भी रमन सिंह नक्सलियों से बातचीत की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं.

नक्सलियों से बातचीत के बारे में वो कहते हैं, 'प्रशासन के स्तर पर बात होती है उनसे. लेकिन, जिला स्तर के लोगों से बात होने से कोई बात नहीं बनेगी. उनके भी टॉप लीडर या पोलित ब्यूरो के टॉप 7 लोग हैं अगर वो बैठें तो बात हो सकती है. क्योंकि यह एक जिले की प्रॉब्लम नहीं है और एक रात की प्रॉब्लम नहीं है. कई राज्यों में इनके पैर फैले हैं. इनके नेता तो आंध्र में बैठे हैं, हैदराबाद में बैठे हैं.’


दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने भी आदिवासी बच्चों को गुमराह करने और भटकाने का आरोप उन टॉप नक्ल लीडर्स पर ही लगाया है जो खुद कभी सामने आने के बजाए पीछे से काम कर रहे होते हैं. बीजापुर के जांगला की रैली से प्रधानमंत्री के इशारे के बाद अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी नक्सलियों के टॉप लीडर्स से बातचीत की वकालत कर रहे हैं. क्योंकि उन्हें भी पता है कि निचले स्तर पर भी बात का कोई मतलब नहीं है.
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