अविश्वास प्रस्ताव से मोदी सरकार को खतरा नहीं, फिर भी जीत के दावे कर रही TDP, आखिर क्यों?

अविश्वास प्रस्ताव से मोदी सरकार को खतरा नहीं, फिर भी जीत के दावे कर रही TDP, आखिर क्यों?
मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने संसद के बाहर मीडिया को संबोधित किया

अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले टीडीपी सांसद केसीनी श्रीनिवास ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि विश्वास मत बीजेपी सरकार की ताकत का परीक्षण कम उनकी असफलताओं को सामने लाने के बारे में अधिक है.

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  • Last Updated: July 19, 2018, 12:06 AM IST
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ऐश्वर्या कुमार

एनडीए की पूर्व सहयोगी तेलगु देशम पार्टी इस बात से भली भांति परिचित है कि लोकसभा में पेश होने वाले उनके अविश्वास प्रस्ताव से नरेंद्र मोदी सरकार को कोई खास खतरा नहीं है. लेकिन इसके बाद भी पार्टी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार करने पर अपनी सफलता का जश्न मना रही है.

अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले टीडीपी सांसद केसीनी श्रीनिवास ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि विश्वास मत बीजेपी सरकार की ताकत का परीक्षण कम उनकी असफलताओं को सामने लाने के बारे में अधिक है.



टीडीपी सांसद ने कहा, "राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार की विफलताओं और अधूरे वादों पर चर्चा होनी जरूरी है. अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से यह होगा और पूरे देश को सच्चाई का पता चलेगी. यह अपने आप में एक सफलता है."
संसद के पिछले सत्र में भी टीडीपी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने अवरुद्ध कर दिया था और विपक्षी दलों के विरोध की वजह से संसद के 13 दिन बर्बाद हो गए. अनिच्छा से इस बात को स्वीकार करते हुए टीडीपी सांसद ने कहा, "इससे पता चलता है कि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष को मुद्दे उठाने और सरकार के विश्वास खोने के कारण पर बात करने के लिए मंच प्रदान करता है."

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स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बुधवार को कहा कि अगर अविश्वास प्रस्ताव पर 50 से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर हुए तो वह इसे स्वीकार करेंगी, प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों की संख्या इससे कहीं अधिक थी. शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा.

अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसे में यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष को दो तरह से मदद कर सकता है पहला आम एजेंडा स्थापित करने में और दूसरा जो पार्टी दोनों धड़ों में से किसी एक के साथ जाने को लेकर असमंजस में हैं उन्हें लुभाने में.

श्रीनिवास ने अपने प्रस्ताव में लिखा है कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने की वजह से वह केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं. हालांकि न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह एकमात्र कारण नहीं है. उन्होंने कहा, “आंध्र में उनकी (बीजेपी) की उपस्थिति एक प्रतिशत भी नहीं है तो हम राज्य के एंगल से सोच भी नहीं रहे हैं.”

श्रीनिवास ने दावा किया कि बीजेपी के कई सहयोगी नरेंद्र मोदी सरकार की कार्यशैली से नाखुश थे. उन्होंने कहा, “हर कोई असंतुष्ट है, उनके अपने सदस्य भी. लेकिन फिर आवाज नहीं उठाने की हर किसी की अपनी वजह है. हालांकि हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं.”

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू कई पार्टियों के नेताओं के साथ लगातार मुलाकात कर रहे हैं. वह तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, सीपीआई(एम), आरजेडी, सपा और बसपा के नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं. नायडू की पार्टी ने इस साल की शुरुआत में बीजेपी से अपना गठबंधन समाप्त कर लिया था. उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों से अन्य पार्टियों के सांसदों से मुलाकात करने के लिए कहा है.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जोर देती नजर आईं. उनके लिए यह 2019 के रण से पहले विपक्ष की एकता की परीक्षा की तरह है. लोकसभा में फिलहाल 535 सदस्य हैं, यहां 273 सांसदों वाली बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है.
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