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कोलकाता में 8 दिसंबर से होगा ‘हेलमेट नहीं, पेट्रोल नहीं’ नियम लागू, सीएम ममता जता चुकी हैं नाराजगी

हेलमेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हेलमेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोलकाता पुलिस आयुक्त अनुज शर्मा (Anuj Sharma) ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा, ‘ऐसा पाया गया कि कई मौकों पर दोपहिया वाहन चला रहे या पीछे बैठे लोग हेलमेट (Helmet) नहीं पहनते हैं और कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन बढ़ा है.’

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 1:16 PM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता (Kolkata) में सरकार एक बार फिर लापरवाह बाइक सवारों पर सख्ती दिखाने जा रही है. यहां प्रशासन ने एक बार फिर से हेलमेट जरूरी करने का फैसला किया है. कोलकाता पुलिस हेलमेट नहीं पहनने वाले मोटरसाइकिल सवारों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल (Petrol) नहीं दिए जाने की तैयारी कर रही है.

कोलकाता पुलिस ने लापरवाह दोपहिया चालकों पर लगाम लगाने के लिए ‘हेलमेट नहीं, पेट्रोल नहीं’ (No Helmet No Petrol) व्यवस्था को दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है. एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है. अधिकारी ने बताया, ‘हेलमेट नहीं, पेट्रोल नहीं’ का नियम आठ दिसंबर से लागू होगा और अगले 60 दिनों तक जारी रहेगा. कोलकाता पुलिस आयुक्त अनुज शर्मा ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा, ‘ऐसा पाया गया कि कई मौकों पर दोपहिया वाहन चला रहे या पीछे बैठे लोग हेलमेट नहीं पहनते हैं और कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन बढ़ा है.’

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ममता बनर्जी ने जाहिर की थी नाराजगी
जुलाई 2016 में बाइकसवारों के हेलमेट नहीं पहनने को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) द्वारा नाराजगी जाहिर करने के बाद शहर की पुलिस ने इसी तरह का नियम ‘ हेलमेट नहीं, पेट्रोल नहीं’ लागू किया था. कोलकाता के पेट्रोल पंप मालिकों ने इस फैसला का स्वागत किया है. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को एक पेट्रोल पंप मालिक ने बताया 'हम इस नियम का स्वागत करते हैं, लेकिन कई बार पुलिस सुरक्षा के बिना ऐसा नियम लागू करना मुश्किल हो जाता है.'

खास बात है कि कोलकाता में 2019 में 18 लाख से ज्यादा दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. वहीं, 2017 से लेकर 2019 के बीच दोपहिया गाड़ियां 83 लाख से बढ़कर 93 लाख हो गई हैं. पुलिस ने 2019 में लापरवार तरीके से गाड़ी चलाने पर 93,855 मामले दर्ज किए थे. ऐसे हर तीन में से एक मामले में दोपहिया शामिल था. इससे पहले नोएडा, अलीगढ़ और बेंगलुरू में यह नियम लागू हो चुका है.

(भाषा इनपुट के साथ)
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