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जस्टिन ट्रुडो को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की नसीहत, भारत के आंतरिक मामलों में ना बोलें

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसानों को गुमराह करने की कोशिश हुई है और फिर वही हो रहा है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसानों को गुमराह करने की कोशिश हुई है और फिर वही हो रहा है.

गुरुनानक जयंती पर एक कनाडाई सांसद की ओर से आयोजित किए गए एक फेसबुक वीडियो इंट्रैक्शन में जस्टिन ट्रुडो (Justin Trudeau) ने कहा था, "कनाडा (Canada) हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ खड़ा रहेगा."

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 7:00 PM IST
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नई दिल्ली. किसान आंदोलन (Farmers Protest) पर टिप्प्णी करने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो (Justin Trudeau) को नसीहत देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने बुधवार को कहा कि किसी भी देश को भारत के आंतरिक मामलों में नहीं बोलना चाहिए. ट्रुडो ने पिछले महीने किसान आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए किसानों के लिए चिंता जताई थी.

न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "किसी भी देश के प्रधानमंत्री को भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. भारत को किसी बाहरी दखल की जरूरत नहीं है. हम अपने मुद्दे खुद सुलझा सकते हैं. यह भारत का आंतरिक मामला है. दुनिया के किसी भी देश को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है."

किसान आंदोलन पर कनाडा के प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत कोई ऐसा देश नहीं है, कि कोई कुछ भी कह देगा. किसान आंदोलन के मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने कहा कि किसानों को गुमराह करने की कोशिश हुई है और फिर वही हो रहा है. उन्होंने किसानों से इन कृषि कानूनों के एक-एक क्लॉज पर चर्चा करने का आग्रह किया और कहा कि सरकार किसानों के हितों के खिलाफ जाकर कोई फैसला नहीं करेगी.




नवंबर महीने में जस्टिन ट्रुडो ने किसान आंदोलन को लेकर चिंता जताई थी. गुरुनानक जयंती पर एक कनाडाई सांसद की ओर से आयोजित किए गए एक फेसबुक वीडियो इंट्रैक्शन में उन्होंने कहा था कि "कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ खड़ा रहेगा."

बता दें कि अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ सिख सांसदों ने भी किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था. ट्रुडो के बयान के बाद भारत ने कनाडा के राजदूत को समन किया था और कहा था कि ट्रुडो और कनाडाई सांसदों के बयान द्विपक्षीय रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

भारत सरकार ने विदेशी नेताओं के बयान को आधी-अधूरी जानकारियों वाला करार देते हुए कहा था ये उसका आंतरिक मामला है.
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