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पेट्रोल और डीजल वाहनों पर बैन को लेकर नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान

भाषा
Updated: September 23, 2019, 10:39 PM IST
पेट्रोल और डीजल वाहनों पर बैन को लेकर नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेतों की पराली को बिजली उत्पादन के लिए स्वच्छ ईंधन में बदलने की भी बात की.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेतों की पराली को बिजली उत्पादन के लिए स्वच्छ ईंधन में बदलने की भी बात की.

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  • Last Updated: September 23, 2019, 10:39 PM IST
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नई दिल्ली. सरकार ने वाहन उद्योग की आशंका को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा है कि पेट्रोल और डीजल (Petrol And Diesel) वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की कोई जरूरत नहीं है.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोमवार को यहां कहा कि पेट्रोल, डीजल वाहनों को बंद करने की जरूरत नहीं है और बिजलीचालित या इलेक्ट्रिक वाहन खुद-ब-खुद रफ्तार पकड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दो साल में सभी बसें बिजली चालित हो जाएंगी. इससे पहले सरकार के शोध संस्थान नीति आयोग ने प्रस्ताव किया था कि 2030 के बाद देश में सिर्फ बिजलीचालित वाहन ही बेचे जाएं.

बाद में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कई केंद्रीय मंत्रियों ने वाहन उद्योग की चिंता दूर  करने का प्रयास करते हुए कहा था कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है.

NITI Aayog के अध्यक्ष ने कहा- 

नीति आयोग (NITI Aayog) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कान्त की अगुवाई वाली एक समिति ने सुझाव दिया था कि 2025 से 150 सीसी इंजन क्षमता तक सिर्फ इलेक्ट्रिक तिपहिया और तिपहिया की बिक्री की जाए.

गडकरी ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई ) में ऊर्जा दक्षता पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं हमेशा बिजलीचालित वाहनों मसलन कार, बाइक और बसों की बात करता रहा हूं. अब यह खुद  शुरू हो गया है. इसे अनिवार्य करने की जरूरत नहीं है. पेट्रोल, डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है. अगले दो साल में सभी बसें इलेक्ट्रिक होंगी और ये जैव एथेनॉल और सीएनजी पर दौड़ेंगी.'
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नितिन गडकरी ने की लागत लाङभ की बात

इसके लागत लाभ पर बात करते हुए मंत्री ने कहा, 'यदि हम वाहनों को बिजली पर चलाते हैं, इसकी लागत 15 रुपये लीटर डीजल की बैठेगी. मैंने जब उद्योग से बैठक में कहा कि मैं धुआं छोड़ने वाली मशीनों को बंद करूंगा, तो  सभी घबरा गए.....अब हमारे पास जर्मनी से प्लास्टिक सिलेंडर उपलब्ध हैं. इससे एलएनजी की 50 प्रतिशत लागत और सीएनजी की 40 प्रतिशत लागत की बचत होगी.'

उन्होंने खेतों की पराली को बिजली उत्पादन के लिए स्वच्छ ईंधन में बदलने की भी बात की. उन्होंने कहा कि इससे वाहन भी दौड़ाए जा सकेंगे और किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकेगी.

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First published: September 23, 2019, 10:28 PM IST
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