महंगे इलाज की वजह से किसी को भी अस्पताल से वापस लौटाना नहीं चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

महंगे इलाज की वजह से किसी को भी अस्पताल से वापस लौटाना नहीं चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को ये तय करना होगा की दावा की कीमत और अस्पताल में दी जाने वाली सेवाओं की फीस क्या होगी (फाइल फोटो)

प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice) एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अधिवक्ता सचिन जैन की याचिका की वीडियो कॉन्फ्रेंस (Video Conference) के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणियां कीं.

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  • Last Updated: July 14, 2020, 10:51 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के इलाज की कीमत तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया. कोर्ट का ये आदेश निजी अस्पतालों (Hospital) द्वारा कोरोना के इलाज में मनमाना पैसा वसूलने की वजह से आया. एक जनहित याचिका में मांग की गई थी कि महामारी (Pandemic) की स्थिति में निजी अस्पताल में भी कोरोना का मुफ्त इलाज हो या फिर सस्ता इलाज हो. याचिका में शिकायत कि गई थी कि निजी अस्पताल (Private Hospital) मनमाना पैसा वसूल रहे है.

इसपर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि केंद्र सरकार को ये तय करना होगा की दावा की कीमत और अस्पताल (Hospital) में दी जाने वाली सेवाओं की फीस क्या होगी. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि कोई भी मरीज़ (Patient) इसलिए वापस नहीं जाए की वह फीस नहीं दे सकता.

हर चीज की कीमत शहर और अस्पताल के हिसाब से तय की जाए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत के लिए किसी भी चीज की कीमत तय करना मुश्किल है क्योंकि हर जगह की जरूरत और खर्च अलग है. इसलिए सरकार को ये काम करना चाहिए. सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि केंद्र सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) के तहत एक दिशानिर्देश बनाए जिस में हर चीज की कीमत उस शहर और अस्पताल के हिसाब से तय की जाए. सरकार को ये काम दो हफ्ते में करना होगा.
प्रधान न्यायाधीश (Chief Justice) एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अधिवक्ता सचिन जैन की याचिका की वीडियो कॉन्फ्रेंस (Video Conference) के माध्यम से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणियां कीं. सचिन जैन ने देश भर में निजी अस्पतालों (Private Hospital) में कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों के इलाज के महंगे खर्च को नियंत्रित करने का निर्देश देने के लिये यह याचिका दायर कर रखी है.



सरकार संक्रमण के सारे बिंदुओं पर कर रही गौर
केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सरकार कोरोना वायरस संक्रमण से संबंधित सारे बिन्दुओं पर गौर कर रही है और याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्त की गयी चिंताओं पर भी ध्यान दिया जायेगा.

याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मामले में केन्द्र द्वारा पहले दाखिल किये गये हलफनामे का जिक्र किया जिसमे कहा गया था कि चिकित्सीय प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) कानून, 2010 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सार्वजनिक जमीन पर बने निजी अस्पतालों को कोविड-19 के मरीजों का मुफ्त इलाज करना होगा.

राज्य सरकारें ही कर सकती हैं नीतियों को परिभाषित
हलफनामे में इस बात को दोहराया गया कि इस बार में नीतियों को संबंधित राज्य सरकारें ही परिभाषित और लागू कर सकती हैं. निजी अस्पतालों की फेडरेशन के वकील ने कहा कि राज्यों के अपने मॉडल हैं और सभी राज्यों में एक समान खर्च नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा कि जहां तक धर्मार्थ अस्पतालों का संबंध है तो वे पहले से ही कोविड-19 के मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य कोरोना वायरस संक्रमण की समस्या से जूझ रहा है और ऐसा नहीं है कि महामारी के इस दौर में निजी अस्पताल पैसा बना रहे हैं.

दावा किया गया कि कुछ निजी अस्पताल कोविड-19 के इलाज के लिए मनमाने पैसे वसूल रहे
जैन ने न्यायालय में दावा किया कि महामारी के इस दौर में कुछ निजी अस्पताल कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिये मनमाने पैसे वसूल रहे हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संबंधित प्राधिकारियों को इस पहलू को ध्यान में रखते हुये दिशा निर्देश बनाने पर विचार करना चाहिए.

न्यायालय ने पिछले महीने ही निजी अस्पतालों से जानना चाहा था कि क्या वे कोविड-19 से संक्रमित मरीजों को सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत निर्धारित खर्च पर इलाज मुहैया कराने के लिये तैयार हैं?

आयुष्मान भारत से गरीबों और कमजोर तबके को दी जा रहीं स्वास्थ्य सुविधाएं
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का मकसद गरीबों और कमजोर तबके को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान कराना है. न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि वह सरकार से रियायती दर पर भूमि प्राप्त करने वाले निजी अस्पतालों से ही एक निश्चित संख्या में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के मुफ्त इलाज के लिये कह रहा है.

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मेहता ने कहा था कि सरकार समाज के निचले तबके की मदद के लिये अपनी तरह से भरसक प्रयास कर रही है और इलाज का खर्च वहन नहीं कर पाने वाले व्यक्ति आयुष्मान भारत योजना के दायरे में शामिल हैं. (भाषा के इनपुट सहित)
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