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यमुना के सफाई की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं : NGT

(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर)

एनजीटी की हालिया रिपोर्ट में कमिटी ने कहा है कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड के बीच कोई सामंजस्य ही नहीं बैठ रहा है.

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    नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल द्वारा गठित किए गए यमुना पॉल्यूशन मॉनिटरिंग कमिटी ने कहा है कि विभाग के स्तर पर दिल्ली के नालों और यमुना की सफाई की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा. एनजीटी की हालिया रिपोर्ट में कमिटी ने कहा है कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड के बीच कोई सामंजस्य ही नहीं बैठ रहा है.

    विभाग का मानना है कि पानी की गुणवत्ता की जिम्मेदारी उसकी नहीं है. यह दिल्ली जल बोर्ड का काम है. दिल्ली जल बोर्ड कहता है कि यहां के नालें उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते. एनजीटी का फैसला और कमिटी एक्शन प्लान पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए (aeration)वायु-मिश्रण और ओजोनेशन करने का सलाह देते हैं, लेकिन विभाग स्तर पर इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार ही नहीं है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार 10 नहरों में ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता सुधारने के लिए कंसल्टेंट्स नियुक्त किए गए हैं. यहां पानी की गुणवत्ता को सुधारने का कार्य किया जाना है, लेकिन इसमें वायु-मिश्रण और ओजोनेशन शामिल नहीं है.ऑ

    (यह भी पढ़ें- यमुना की सफाई पर बोले केंद्रीय मंत्री, 'सवा साल में पानी पीने लायक हो जाएगा')

    समिति ने यह भी कहा, 'यमुना में बहने वाले कम से कम चार प्रमुख नालों के गंदे पानी का इन-सीटू ट्रीटमेंट (in-situ treatment) एक्शन प्लान बनने जा रहा है.प्रारंभिक मूल्यांकन किए जाने के बाद, समिति योजना की समीक्षा करने के लिए एक बैठक बुलाएगी.

    यमुना में सबसे अधिक प्रदूषक चार प्रमुख नालों, नजफगढ़, सप्लिमेंट्री, शाहदरा, बारापुलाह के माध्यम से आता है. अनुपचारित सीवेज को ट्रैप करने और इसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में ले जाने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही हैं.

    कमिटी का कहना है कि हालांकि इसके लिए समन्वति अप्रोच आजमाने की जरूरत है. उदाहरण के तौर पर 2000 करोड़ की लागत वाली इंटरसेप्टर परियोजना की शुरुआत अनुपचारित सीवेज को इकट्ठा करने के लिए की गई थी. लेकिन इसका पूरा इस्तेमाल तब तक नहीं हो सकता जब तक इसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ लिंक नहीं किया जाता. वैसे ही अनधिकृत कॉलोनियों से निकलने वाले नालों को भी सीवरेज नेटवर्क सिस्टम से जोड़ा जाना चाहिए.

    एनजीटी के चेयरपर्सन ए के गोयल ने जुलाई में मॉनिटरिंग कमिटी का गठन किया था और 31 दिसंबर 2018 तक नदी की सफाई के लिए एक कार्य योजना और एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था.

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