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बुराड़ी केस: सामने आया एक और चौंकाने वाला वीडियो, परिवार के लोग जुटाते दिखे मौत का सामान

बुराड़ी केस: सामने आया एक और चौंकाने वाला वीडियो, परिवार के लोग जुटाते दिखे मौत का सामान

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

सीसीटीवी फुटेज से पता चल रहा है कि भाटिया परिवार की बड़ी बहू सविता अपनी बेटी के साथ रात में ठीक 10 बजे स्टूल ला रही हैं. वहीं, परिवार के दो सबसे छोटे सदस्य 12 साल के ध्रुव और 15 साल के शिवम को उसी फर्नीचर शॉप से तार लाते देखा गया.

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    दिल्ली के बुराड़ी इलाके के संतनगर में एक घर से एक साथ 11 लाशें मिलने के मामले में हर दिन नई-नई बातें सामने आ रही हैं. पूरा परिवार 'मोक्ष प्राप्ति' और मृत पिता से मिलने के लिए तंत्र-मंत्र और कथित धार्मिक अनुष्ठान कर रहा था. मोक्ष प्राप्ति की एक प्रक्रिया के तौर पर परिवार ने मास सुसाइड किया. इसके लिए परिवार के दो सदस्यों घर के बगल वाली फर्नीचर की शॉप से प्लास्टिक के स्टूल और तार खरीदे थे.

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    पुलिस ने फर्नीचर शॉप की सीसीटीवी फुटेज खंगाली है. इसमें किसी को भाटिया परिवार के घर के अंदर जाते नहीं देखा गया है. लेकिन, परिवार की बड़ी बहू यानी भुवनेश की बीवी सविता प्लास्टिक की 6 स्टूल लाते हुए सीसीटीवी में कैद हुई.

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    सीसीटीवी फुटेज से पता चल रहा है कि भाटिया परिवार की बड़ी बहू सविता अपनी बेटी के साथ रात में ठीक 10 बजे स्टूल ला रही हैं. वहीं, परिवार के दो सबसे छोटे सदस्य 12 साल के ध्रुव और 15 साल के शिवम को उसी फर्नीचर शॉप से तार लाते देखा गया. ध्रुव और शिवम दोनों सीसीटीवी में कैद हुए हैं.

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    पुलिस का कहना है कि घर का छोटा बेटा होने की वजह से ललित भाटिया अपने पिता भोपाल सिंह का लाड़ला था और उनके बेहद करीबी था. पिता की मौत का असर उसपर सबसे ज्यादा पड़ा. ललित सदमे में था. पास-पड़ोस के लोगों ने पुलिस को बताया कि एक हादसे में ललित की आवाज चली गई थी. काफी इलाज के बाद आवाज नहीं लौटी. तब से वह अपनी बातें लिखकर बताने लगा. परिवार के करीबियों के मुताबिक, इसी दौरान ललित ने परिवार को बताया कि पिता भोपाल सिंह उसे दिखाई देते हैं और बातें करते हैं.

    पुलिस को कुछ और हाथ से लिखे नोट्स भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि किस तरह सामूहिक खुदकुशी की पूरी योजना बनाई गई. 30 जून 2018 की आखिरी एंट्री इस घटना का राज़ खोलती है. डायरी में अंतिम एंट्री में एक पन्ने पर लिखा है 'घर का रास्ता. 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे.' इसमें आखिरी पंक्ति है- 'कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा.'


    ललित ने ही ज्यादातर ये नोट्स लिखे हैं. उसकी नोट्स से साफ पता चलता है कि ललित को वहम था कि उसे अपने मृत पिता दिखते हैं और परिवार को मोक्ष के रास्ते बताते हैं. पुलिस को कुछ और नोट्स भी मिले हैं, जो ललित की भांजी प्रियंका भाटिया की हैंडराइटिंग में है. प्रियंका की 17 जून को सगाई हुई थी.

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    कुछ नोट्स से यह भी पता चलता है कि पूरे परिवार को मरने की उम्मीद नहीं थी. उन्हें यकीन था कि भोपाल सिंह (ललित के पिता की आत्मा) आके सबको बचा लेंगे. रजिस्टर के एक पन्ने पर लिखा है, 'आखिरी वक्त पर धरती कांपेगी, आसमान हिलेगा. पर तुम घबराना मत. मैं आऊंगा. तुम्हें बचा लूंगा. बाकियों को भी बचाने में मदद करूंगा. इस प्रक्रिया के बाद हम सब एक हो जाएंगे.'

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    एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि ललित के निर्देशों के मुताबिक काम करने पर परिवार की काफी तरक्की भी हुई थी. इसलिए इस कथित 'मोक्ष प्रक्रिया' पर किसी ने सवाल नहीं उठाया. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पूरा परिवार 'शेयर्ड साइकोटिक डिसऑर्डर' का शिकार था. इस बीमारी से पीड़ित शख्स को किसी मरे हुए या तीसरे शख्स की आवाज सुनाई देने और उसे देखने का वहम हो जाता है. फिर ऐसा शख्स उसी के कहे मुताबिक काम करने लगता है. हालांकि, परिवार के रिश्तेदार और राजस्थान में रहने वाला भाई दिनेश ऐसी बातों को खारिज कर रहे हैं. दिनेश के मुताबिक, ये सब कुछ मीडिया ने प्रचार किया है.


    उधर, ध्रुव और शिवम के स्कूल टीचर्स का कहना है कि दोनों अच्छे स्टूडेंट्स थे. दोनों भाइयों को म्यूजिक में काफी रुचि थी. इस स्कूल में दोनों भाई शुरुआत से पढ़ रहे थे. किसी भी टीचर्स को कभी उनके व्यवहार में कोई अजीब बात नहीं लगी.

    बता दें कि 1 जुलाई को भाटिया परिवार के 10 सदस्यों की लाश फांसी से लटकती हुई मिली थी. जबकि परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य नारायणी देवी (75) की लाश दूसरे कमरे में फर्श पर पड़ी हुई थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की तफ्तीश जारी है.

    Tags: Burari, Suicide

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