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केंद्र ने संसद में कहा- धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का विचार नहीं, ये राज्य का मुद्दा

पिछले साल यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और एमपी
पिछले साल यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और एमपी "जबरन धर्मांतरण" पर अंकुश लगाने के कानून को लागू किया था. (सांकेतिक तस्वीर)

Anti-conversion Law: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि फिलहाल केंद्र सरकार का अंतर जातीय विवाह पर अंकुश लगाने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का कोई विचार नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 6:24 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा (Loksabha) में कहा कि अंतर जातीय विवाह पर अंकुश लगाने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion Law) बनाने की उसकी कोई योजना नहीं है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने संसद में कहा कि धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले प्राथमिक तौर पर राज्यों की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि कहीं भी इसका उल्लंघन होने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां उचित कार्रवाई करती हैं.

रेड्डी ने एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि फिलहाल केंद्र सरकार का अंतर जातीय विवाह पर अंकुश लगाने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का कोई विचार नहीं है. रेड्डी ने कहा कि पब्लिक ऑर्डर और पुलिस संविधान की 7वीं अनुसूची के मुताबिक राज्य का विषय है और ऐसे में, धार्मिक रूपांतरण से संबंधित अपराधों की रोकथाम, उनके बारे में पता लगाना, पंजीकरण, जांच और अभियोजन मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के विषय हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब भी इसके उल्लंघन की घटनाएं सामने आती हैं तो कानून प्रवर्तन एजेंसियां मौजूदा कानूनों के मुताबिक कार्रवाई करती हैं.

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भाजपा शासित कई राज्यों ने लागू किया है कानून
पिछले साल, भाजपा शासित राज्यों - हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक ने "लव जिहाद" को रोकने के लिए कानून बनाने की मांग की थी. नतीजतन, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और एमपी "जबरन धर्मांतरण" पर अंकुश लगाने के कानून को लागू किया था. हरियाणा ने धर्मांतरण विरोधी कानून का मसौदा तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा ने नवंबर 2020 में कहा था कि लव जिहाद के नाम पर हो रहे धार्मिक परिवर्तन की खबरों पर कड़े कदम उठाएंगे. लव जिहाद प्यार की आड़ में मुस्लिम युवकों के दूसरे धर्म की महिलाओं का कथित जबरन धर्म परिवर्तन कराने को लेकर दक्षिण पंथी समूहों द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है.

जनवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अंतर-विश्वास विवाह के कारण धार्मिक रूपांतरण पर रोक लगाने वाले विवादास्पद नए कानूनों की जांच करने के लिए सहमति व्यक्त की थी.
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