'आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्‍मू-कश्मीर में कोई राजनीतिक कैदी नहीं'

Jammu-kashmir, Article 370, Home Ministry-गृह मंत्रालय का ये भी मानना है कि कश्मीर में क्लैंप डाउन यानि पूर्ण प्रतिबंध नहीं है जो भी कदम उठाए गए हैं वो मौजूदा हालात को देखते हुए उठाए गए हैं, जिसमें आम लोगों को रोजमर्रा की चीजों की दिक्कत न हो इसका खासा ध्यान रखा जा रहा है.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 4:18 PM IST
'आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्‍मू-कश्मीर में कोई राजनीतिक कैदी नहीं'
गृह मंत्रालय का मानना है कि कश्मीर में पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. (फाइल फोटो)
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 4:18 PM IST
केंद्र सरकार का मानना है कि जम्‍मू-कश्मीर (Jammu-kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद कोई राजनीतिक कैदी नहीं है, जिन भी लोगों को डिटेंशन में रखा गया है उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्‍ट और अन्य धाराएं पहले से लगी हैं, जिसका फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया है. आपको बता दें कि कश्मीर से जुड़ी राजनीतिक पार्टियों ने आरोप लगाया था कि उनके नेताओं को कैद करके रखा गया है, जिसके बाद केंद्र का ये रुख जाहिर हुआ है. इसके अलावा घाटी में कानून व्यवस्था पूरी तरीके से कायम रहे इसकी भी लगातार कोशिश की जा रही है.

गृह मंत्रालय ने किया हालात का आकलन
सूत्रों के मुताबिक आर्टिकल 370 हटाने के बाद पिछले एक हफ्ते में गृह मंत्रालय ने घाटी के हालात का आकलन किया है और घाटी के मौजूदा वैसे ही हैं जैसे हुरियत के हड़ताल बुलाने पर थे. कई बार तो इससे बदतर भी हालात रहे थे. यही नहीं, पिछले कुछ सालों में कई बार मौजूदा हालात की तुलना में और ज्यादा हालात खराब थे और तब कानून व्यवस्था कायम रखने का पूरा काम किया गया. आर्टिकल 370 हटने के बाद केंद्र सरकार की पहली और सबसे अहम प्राथमिकता थी कि कश्मीर के लोगों को जान का नुकसान न हो, जिसमें काफी हद तक सरकार अपने प्रयासों को सफल भी मान रही है. हालांकि इसमें सुरक्षाबलों और स्थानीय प्रशासन दोनों का योगदान है.

गृह मंत्रालय का ये भी मानना है कि कश्मीर में क्लैंप डाउन यानि पूर्ण प्रतिबंध नहीं है जो भी कदम उठाए गए हैं वो मौजूदा हालात को देखते हुए उठाए गए हैं, जिसमें आम लोगों को रोजमर्रा के चीजों की दिक्कत न हो इसका खासा ध्यान रखा जा रहा है. अब तक जो जानकारी सरकार को मिली है उसके मुताबिक दुकानें खुल रही हैं और सामान्य दिनचर्या चल रही है. जबकि कश्मीर के सारे जिलों का प्रशासन सामान्य दिशा की ओर चल रहा है.

सोशल मीडिया को लेकर मंत्रालय ने कही ये बात
जहां तक सोशल मीडिया में वायरल मैसेज कश्मीर के बारे में फैलाए जाने का सवाल है तो गृह मंत्रालय का मानना है सोशल मीडिया पर जो बातें फैलाई जा रही है वो सही नहीं हैं. कई मामलों में सोची समझी साजिश भी है कुछ गलत बातों को फैलाने में. इसके लिए सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी लगातार ऐसी चीजों पर नजर रख रही है जो सोशल मीडिया पर जानबूझकर फैलाई जा रही हैं और संबंधित एजेंसियों के सामने जो भी जानकारी सामने आएगी कार्रवाई की जाएगी, इसमें पाकिस्तान द्वारा शांति भंग करने की कोशिश भी शामिल है.

नेताओं को एयरपोर्ट पर रोका गया
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जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 370 लगने के बाद कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को एयरपोर्ट पर रोका गया है, जिसके बारे में गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि घाटी में नागरिकों के अधिकारों को पूरी तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा. राजनेताओं को घाटी की यात्रा रोकने का फैसला पूरी तरीके से स्थानीय प्रशासन का है जो उन्होंने जमीनी हालात को देखते हुए लिया. केन्द्रीय एजेंसियों का इसमें कुछ लेना नहीं है. जहां तक विदेशी मीडिया ने जो कुछ रिपोर्ट कश्मीर के हालात के बारे में दिखाई हैं उन्हें केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरीके से गलत करार दे रही हैं. कुल मिलाकर गृह मंत्रालय हालात को सामान्य करने की दिशा में कड़े कदम उठा रहा है और खास नज़र उन लोगों पर है जो गलत संदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर फैला रहे हैं.

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First published: August 13, 2019, 4:06 PM IST
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