संसद के बढ़े सत्र के दौरान नहीं होगा दोनों सदनों में प्रश्नकाल, ये है कारण

प्रश्नकाल की आवश्यक प्रक्रिया कम से कम 10 दिनों की है, जबकि सत्र को केवल 9 दिनों के लिए ही बढ़ाया गया है. इतना समय सवाल पूछने, सवाल की श्रेणी तय करने और संबंधित मंत्रालय से जवाब प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसीलिए ये फैसला किया गया है...

vineet kumar | News18India
Updated: July 27, 2019, 1:28 PM IST
संसद के बढ़े सत्र के दौरान नहीं होगा दोनों सदनों में प्रश्नकाल, ये है कारण
संसद के बढ़े सत्र के दौरान नहीं होगा दोनों सदनों में प्रश्नकाल
vineet kumar | News18India
Updated: July 27, 2019, 1:28 PM IST
संसद का मौजूदा सत्र 9 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है, लेकिन इस दौरान दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं होगा. तो क्या सरकार सवालों से बच रही है और सिर्फ बिल को पास करवाने के लिए संसद का मौजूदा सत्र बढ़ाया है. जबकि बिल को पास करवाने के साथ साथ संसद में सरकार से सवाल पूछना सांसदों का मुख्य कर्तव्य और अधिकार है. फिर इस बढ़े समय में प्रश्नकाल को क्यों नहीं शामिल किया गया. दरअसल प्रश्नकाल की आवश्यक प्रक्रिया कम से कम 10 दिनों की है, जबकि सत्र को केवल 9 दिनों के लिए ही बढ़ाया गया है. इतना समय सवाल पूछने, सवाल की श्रेणी तय करने और संबंधित मंत्रालय से जवाब प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसीलिए ये फैसला किया गया है.

ये है प्रश्नकाल में प्रश्न पूछे जाने की प्रक्रिया
दरअसल प्रश्न काल के दौरान सवाल जवाब की प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया के तहत प्रश्न पूछने के लिए सभी सांसदों को कम से काम 10 दिन पहले सदन के अध्यक्ष को प्रश्न सूचित करना होता है. इसके बाद ही लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में ये तय करते हैं कि यह सवाल पूछे जा सकते हैं या नहीं. लोकसभा के स्पीकर या राज्यसभा के चेयरमैन ही ये तय करते हैं कि प्रश्न तारांकित या फिर आतारांकित श्रेणी का है. फिर कम से कम 5 दिन का समय सम्बद्ध मंत्रालय को दिया जाता है, ताकि उस प्रश्न का जवाब तैयार किया जा सके.

बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं दोनों सदन
बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं दोनों सदन


सत्र बढ़ाने के पीछे सरकार की मंशा
संसद का सत्र बढ़ाने के पीछे सरकार की मंशा अधिक से अधिक बिल को पास करवाने की है. इस बार दोनों ही सदन बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं और लोकसभा में तो लगभग डेढ़ सौ फीसदी काम हो रहा है, इसीलिए सरकार अधिक से अधिक बिल पास करवाना चाहती है. ट्रिपल तलाक, मोटर व्हीकल, आरटीआई अमेंडमेंट जैसे बिलों को सरकार संसद के इसी सत्र में पास करवाकर कानून बनवाना चाहती है.

इसलिए बढ़े सत्र से हटाया गया प्रश्नकाल
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26 जुलाई तक चलने वाले सत्र का कार्यकाल 25 जुलाई को बढ़ाया गया. इस कारण प्रश्न पूछने की प्रक्रिया में जो आवश्यक समय होता है, वो नहीं मिल पाया. इसलिए संसद के बढ़े सत्र में से प्रश्नकाल को हटा दिया गया है. गौरतलब है कि प्रश्नकाल के दौरान पूछे जाने वाले तारांकित सवालों के जवाब मौखिक तौर पर मंत्री सदन में देते हैं जबकि अतारांकित प्रश्नों का जवाब लिखित तौर पर दिया जाता है. तारांकित सवालों में पूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं.

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First published: July 27, 2019, 11:40 AM IST
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