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दिल्ली चुनाव के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

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Updated: January 20, 2020, 12:26 PM IST
दिल्ली चुनाव के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से 2 हफ्ते में मांगा जवाब
सांकेतिक तस्वीर (NEWS18 CREATIVES)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है.

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  • Last Updated: January 20, 2020, 12:26 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) के इस्तेमाल पर रोक लगाने से मना कर दिया है. ऐसे में अब इसका इस्तेमाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में किया जा सकता है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है.

बता दें कि इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगाने के लिए एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स नाम की एक NGO ने याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट में इनके तरफ से इस केस को वकील प्रशांत भूषण लड़ रहे हैं. मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI)एसए बोबडे ने भूषण ने पूछा कि आखिर वो क्यों इस मामले को लेकर पहले नहीं आए और उन्होंने दिल्ली चुनाव से ठीक पहले ये मुद्दा क्यों उठाया.

भूषण ने कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की सुनवाई तुंरत हो. उनकी दलील है कि इलेक्टोरल बॉन्ड का चुनाव फंडिंग के लिए गलत इस्तेमाल हो रहा है. चुनाव आयोग की तरफ से राकेश द्विवेदी ने इस मामले में जवाब देने के लिए कोर्ट से 4 हफ्ते का वक्त मांगा. लेकिन CJI बोबडे सिर्फ दो हफ्ते का वक्त देने के लिए तैयार हुए.

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड?

चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक चंदे के लिए नकदी के एक विकल्प के रूप में पेश किया गया है. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारर्दिशता लाने के लिए ये व्यवस्था शुरू की गई है. आपको बता दें कि चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी पार्टी को देने से 'बॉन्ड खरीदने वाले' को कोई फायदा नहीं होगा. न ही इस पैसे का कोई रिटर्न है. ये पैसा पॉलिटिकल पार्टियों को दिए जाने वाले दान की तरह है.

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First published: January 20, 2020, 12:11 PM IST
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