तालिबान से वार्ता पर विवाद, विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत गैर आधिकारिक तौर पर शामिल

भारत तालिबान के साथ किसी भी तरह की बातचीत को तैयार नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भारत के रुख पर स्पष्टीकरण दिया है.

News18Hindi
Updated: November 9, 2018, 4:34 PM IST
तालिबान से वार्ता पर विवाद, विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत गैर आधिकारिक तौर पर शामिल
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: November 9, 2018, 4:34 PM IST
अफगानिस्तान में शांति बहाली को लेकर शुक्रवार को रूस की राजधानी मॉस्को में हो रही वार्ता में भारत के शामिल होने पर विवाद बढ़ गया है. जिसके बाद सरकार ने इसपर सफाई दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हमारी भागीदारी गैर आधिकारिक है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि लोग कैसे इसे भारत-तालिबान के बीच बातचीत कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति, एकता और बहुलता को संरक्षित करने वाले मेल-मिलाप के सभी प्रयासों का समर्थन करता है.

रवीश कुमार ने कहा कि यदि कोई प्रक्रिया अफगानिस्तान पर हमारी नीति के अनुरूप है, तो हम इसका हिस्सा बनेंगे. उन्होंने कहा, 'हमने इससे पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हमारी भागीदारी गैर-आधिकारिक स्तर पर है. पता नहीं लोगों ने यह कैसे निष्कर्ष निकाल लिया है कि तालिबान के साथ बातचीत होगी. यह मॉस्को में अफगानिस्तान पर एक बैठक है.'

इस बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला. उमर ने लिखा, "अगर मोदी सरकार को तालिबान के साथ ग़ैर आधिकारिक स्तर पर बातचीत मंज़ूर है तो जम्मू कश्मीर में मुख्य धारा से अलग संगठनों से इस तरह की बातचीत क्यों नहीं हो सकती है? जम्मू कश्मीर की छीनी हुई स्वायतत्ता और उसकी बहाली पर ग़ैर आधिकारिक बातचीत क्यों नहीं?"

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दरअसल, अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए आज भारत पहली बार तालिबान के साथ मंच साझा करेगा. ये बातचीत रूस के मॉस्को में होने जा रही है. भारत इस बातचीत में गैर आधिकारिक स्तर पर शामिल होगा. भारत के अलावा पाकिस्तान, चीन, ईरान और अमेरिका भी बातचीत में शामिल हो सकते हैं.

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बता दें, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि भारत की विदेश नीति में इस बात का ज़ोर है कि अफ्गानिस्तान के साथ उनके अच्छे संबध रहें. इस कोशिश में अफगान-नेतृत्व में, अफगान-स्वामित्व वाले और अफगान-नियंत्रित तथा अफगानिस्तान सरकार की भागीदारी होना जरूरी है.
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