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नित्‍यानंद केस: कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश- ट्रांसफर नहीं होगा केस, स्‍थानीय अदालत जल्‍द पूरी करे सुनवाई

News18Hindi
Updated: February 18, 2020, 11:23 PM IST
नित्‍यानंद केस: कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश- ट्रांसफर नहीं होगा केस, स्‍थानीय अदालत जल्‍द पूरी करे सुनवाई
नित्‍यानंद केस को ट्रांसफर करने से कर्नाटक हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है.

Nithyananda Case: मूल शिकायतकर्ता लेनिन कुरुप्पन ने पिछले साल हाईकोर्ट का रूख किया था. लेनिन ने सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए केस को बेंगलुरु ग्रामीण से बेंगलुरु शहर ट्रांसफर करने की मांग की थी.

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  • Last Updated: February 18, 2020, 11:23 PM IST
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 (स्टेसी परेरा) 

बेंगलुरु. कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने सोमवार को रेप आरोपी नित्‍यानंद केस को रामनगरम जिले से स्‍थानांतरित करने संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्‍य याचिकाकर्ता लेनिन कुरुप्पन ने ही ये याचिका दायर की थी.

इससे पहले मूल शिकायतकर्ता लेनिन कुरुप्पन ने पिछले साल हाईकोर्ट का रूख किया था. लेनिन ने सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए केस को बेंगलुरु ग्रामीण से बेंगलुरु शहर ट्रांसफर करने की मांग की थी. लेकिन, हाईकोर्ट के जस्टिस बीए पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुकदमे को खींचने के लिए याचिकाकर्ता को डांट भी लगाई.



न्‍यायमूर्ति पाटिल ने कहा- याचिकाकर्ता को आगे आना चाहिए था



लेनिन कुरुप्पन पर उदासीन रवैया का आरोप लगाते हुए न्‍यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे. लेकिन जब तक आरोपी सामने नहीं आ गया तब तक वह गवाह के बॉक्‍स में आने से कतराते रहे. अगर वह वाकई न्‍याय चाहते तो ऐसी परिस्थिति में उन्‍हें आगे आना चाहिए. उन्‍हें पक्ष को मजबूत करने के लिए सबूत पेश करना चाहिए.

वहीं वर्ष 2010 से चल रहे इस मामले पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत को जल्‍द सुनवाई का आदेश भी दिया.

पीठ ने निचली अदालत को दिए ये निर्देश
इस केस में आरोपी और गवाह दोनों सहयोग नहीं कर रहे हैं. पीठ ने कहा कि निचली अदालत को अकील बनाम एनसीटी के मामले में उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा. ताकि जल्‍द से जल्‍द सुनवाई पूरी हो सके. इससे पहले नित्‍यानंद की तरफ से वकील सीवी नागेश ने तर्क दिया था कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूतों को फिर से दर्ज किया जाना चाहिए. क्‍योंकि जिस अनुवादक की मदद से सबूत पेश किए गए, वह शख्‍स इस मामले की चार्जशीट में गवाह था.

वकील की इस दलील को ध्‍यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत को नए सिरे से सबूतों की रिकॉर्डिंग करने के निर्देश दिए थे.

कोर्ट ने दिया था हिरासत में लेने का आरोप
हाईकोर्ट ने 5 फरवरी को अपने आदेश में जांच एजेंसी (कर्नाटक CID) को नित्यानंद को हिरासत में लेने के लिए कहा और अगली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया था. हालांकि नित्‍यानंद फरार चल रहे हैं. उनके देश छोड़कर भाग जाने की रिपोर्ट मिल रही है. सीआईडी चाहकर भी नित्‍यानंद को हिरासत में नहीं ले पा रही है. अगर अगले ट्रायल तक वह कोर्ट के सामने पेश नहीं होता है तो उसके खिलाफ रेड-कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया जाएगा.

तमिलनाडु का रहने वाला है नित्यानंद, रेप केस का है आरोपी
नित्यानंद जिसका असली नाम राजशेखरन है, वह तमिलनाडु का रहने वाला है. वह साल 2000 में बेंगलुरु के पास एक आश्रम बनाने के बाद प्रभावशाली हो गया था. उसके ज्यादातर भाषण कमोबेश आध्यात्मिक गुरू ओशो रजनीश के विचारों पर ही आधारित होते हैं.

2010 में नित्यानंद तब खबरों में आ गया था जब उसका एक एक्ट्रेस के साथ आपत्तिजनक हालत में वीडियो वायरल हो गया था. बाद में उस पर रेप (Rape) के आरोप लगे थे और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. इस केस के अलावा एक अन्य रेप केस में भी उस पर चार्जशीट दाखिल की गई थी.

कुछ महीने पहले खुला नित्यानंद के भारत से भागने का राज
एक सेक्स स्कैंडल (Sex Scandal) और उसके अहमदाबाद के पास के आश्रम में लड़कियों के कथित शोषण की खबरों के बाद कुछ महीने पहले गुजरात पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि नित्यानंद भारत में उपलब्ध नहीं है.

कर्नाटक पुलिस के सूत्रों के मुताबिक नित्यानंद 2018 के अंत में अपनी जमानत का फायदा उठाते हुए देश से भाग गया. उसका पासपोर्ट (Passport) सितंबर, 2018 में ही एक्सपायर हो चुका है और स्थानीय पुलिस ने उसकी इसके रिन्यूअल की रिक्वेस्ट को भी खारिज कर दिया था.

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First published: February 18, 2020, 8:41 PM IST
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