नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी बोले- कृषि क्षेत्र में सुधार जरूरी लेकिन सरकार दूसरी फसलों के लिए भी दे ज्यादा MSP

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (फ़ाइल फोटो)

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (फ़ाइल फोटो)

Kisan Andolan: सरकार और किसानों के बीच अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक तक इस बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2021, 2:35 PM IST
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(सुजीत नाथ)

कोलकाता. केंद्र के नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के खिलाफ किसानों (Farmers Protest) का प्रदर्शन लगातार जारी है. इस बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijeet Banerjee) का कहना है कि कृषि सेक्टर में सुधार की जरूरत है, लेकिन सरकार को सिर्फ धान ही नहीं बल्कि बाक़ी अनाजों पर भी न्यनतम समर्थन मूल्य (MSP) देना चाहिए. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर पारदर्शिता दिखाने की जरूरत है. बता दें कि दिल्ली की सीमा पर किसान पिछले एक महीने से ज्यादा समय से लगातार आंदोलन कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि सरकार तीनों नए कृषि कानून को रद्द करे. साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दे.

न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए अभिजीत बनर्जी ने कहा कि धान के उत्पादन से पंजाब में पानी खत्म हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले 20 सालों में यहां पानी नहीं बचेगा. उन्होंने कहा, 'इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है धान के लिए ऊंची एमएसपी की दरें. हमें इसके लिए कोई ठोस कदम उठाना होगा. बनर्जी का मानना है कि दूसरे अनाजों पर अगर एमएसपी दी जाए जो इसका समाधान निकाला जा सकता है.'

एमएसपी प्रणाली को न बदलना समाधान नहीं
हालांकि बनर्जी का कहना है कि एमएसपी प्रणाली को न बदलना इसका कोई समाधान नहीं है. उन्होंने कहा "सरकार का कहना है कि मौजूदा एमएसपी प्रणाली नहीं बदली जाएगी, लेकिन फिर चावल और गेहूं की कीमतें इतनी अधिक रहेंगी, कॉर्पोरेट्स को बाजारों में प्रवेश करने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं होगा'

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अब तक नहीं बनी है बात



सरकार और किसानों के बीच अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक तक इस बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. बुधवार को किसान संगठनों और सरकार के बीच बिजली की कीमतें और पराली जलाने पर जुर्माने को लेकर बातचीत हुई. कहा जा रहा है कि दोनों पक्षों में इस मुद्दे को लेकर कुछ सहमति भी बनी है. लेकिन तीन नए कृषि कानून को वापस लेने और MSP को कानूनी दर्जा देने के लिए अब तक बात नहीं बनी है. अब 4 जनवरी को एक बार फिर से किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत होगी.

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