हॉकिंग जैसा था यह छात्र, बीच परीक्षा हुई मौत, तीन सब्जेक्ट में मिले 100% मार्क्स

10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में टॉप करना, अंतरिक्ष यात्री बनना और रामेश्वरम की यात्रा करना श्रीधर की अधूरी इच्छाएं बनकर रह गयीं.

News18Hindi
Updated: May 8, 2019, 1:56 PM IST
हॉकिंग जैसा था यह छात्र, बीच परीक्षा हुई मौत, तीन सब्जेक्ट में मिले 100% मार्क्स
फोटो- विनायक.
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Updated: May 8, 2019, 1:56 PM IST
स्टीफन हॉकिंग को अपना आदर्श मानने वाले विनायक श्रीधर ने अपनी मृत्यु से पहले सीबीएसई की दसवीं की जिन तीन विषयों की परीक्षा दी थी उन सभी में उसने लगभग 100 प्रतिशत अंक हासिल किए. दुर्भाग्यवश वो सिर्फ तीन ही परीक्षा दे पाए थे. बाक़ी दो विषयों की परीक्षा में बैठने से पहले ही मार्च में उसकी मृत्यु हो गई थी.

उसने अंग्रेजी में 100 अंक हासिल किए, विज्ञान में 96 और संस्कृत में 97 अंक हासिल किए. वह कंप्यूटर साइंस और सोशल स्टडीज की परीक्षा नहीं दे पाया था. 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में टॉप करना, अंतरिक्ष यात्री बनना और रामेश्वरम की यात्रा करना श्रीधर की अधूरी इच्छाएं बनकर रह गयीं. श्रीधर जब महज दो साल का था तब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित हो गया था.

डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) एक आनुवांशिक बीमारी है, जो मांसपेशियों के विकास को अवरूद्ध करती है और वो सिकुड़ने लगता है और अंग बेहद कमजोर हो जाता है. ये डिस्ट्रोफिन की कमी के कारण होता है.

विनायक नोएडा के एमिटी स्कूल में पढ़ता था. इस साल सीबीएसई बोर्ड से 10वीं की परीक्षा दी थी. लेकिन महान वैज्ञानिक हॉकिंग की तरह से उसकी भी जिंदगी व्हील चेयर पर गुजर रही थी. परीक्षाएं शुरु हुई तो विनायक की मदद के लिए एक राइटर मिला. लेकिन संस्कृत की परीक्षा में विनायक ने खुद से अपनी कॉपी लिखी. जबकि अंग्रेजी और विज्ञान में उसने राइटर की मदद ली.

विनायक की मां ममता बताती हैं कि परीक्षा के बाद विनायक रामेश्वरम घूमना चाहता था. लेकिन तीन विषयों की परीक्षा देने के बाद ही उसने इस दुनिया को छोड़ दिया. आज जब विनायक का रिजल्ट आया है तो उसके नम्बर देखकर सबकी आंखे खुली की खुली रह गई. विनायक को अंग्रेजी में 100, विज्ञान में 96 और संस्कृत में 97 नम्बर मिले हैं.

ममता बताती हैं कि विनायक की बहन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में पढ़ती है. वहीं बिट्रिश कोलंबिया यूनिवसिर्टी से पीएचडी कर रही है. पिता एक कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट हैं.

व्हील चेयर पर अंतरिक्ष में जाऊंगा
मां ममता का कहना है कि जब अक्सर पढ़ाई की बात हुआ करती थी तो विनायक कहता था कि मां जब स्टीफन सर व्हील चेयर पर बैठकर यूनिवसिर्टी जाकर कॉस्मोलॉजी में नाम कमा सकते हैं तो मैं अंतरिक्ष में क्यों नहीं जा सकता. मैं एक दिन व्हील चेयर पर बैठकर अंतरिक्ष में जाऊंगा.

विनायक का सपना पूरा करने रामेश्वरम पहुंचे मां-बाप

परीक्षा के दौरान विनायक मां-बाप से कहता था कि पूरीक्षा देने के बाद मैं रामेश्वरम घूमने जाऊंगा. इस साल हम वहीं पर छुट्टी बिताएंगे. लेकिन विनायक की ये ख्वाहिश अधूरी ही रह गई. लेकिन उसके मां-बाप विनायक का ये सपना पूरा करने के लिए रामेश्वरम पहुंच गए है. सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट आने के बाद ही वो रवाना हो गए थे.

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