राफेल डील को लेकर फिर हमलावर हुए राहुल, कहा- PM मोदी ने 'लूट की छूट' दी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'हर डिफेंस डील में एंटी करप्शन क्लॉज होता है. लेकिन हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने राफेल डील से ये एंटी करप्शन क्लॉज ही हटा दिया है. इससे साफ है कि उन्होंने 'लूट की छूट' दी है.'

News18Hindi
Updated: February 11, 2019, 2:37 PM IST
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Updated: February 11, 2019, 2:37 PM IST
राफेल डील को लेकर अंग्रेजी अखबार 'द हिन्दू' के ताज़ा खुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'लूट की छूट' देने का आरोप लगाया है. दरअसल अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि फ्रांस के साथ 36 राफेल जेट खरीदने की डील से कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में जुर्माना लागने जैसे सख्त प्रावधान हटा लिए थे.

इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'हर डिफेंस डील में एंटी करप्शन क्लॉज होता है. लेकिन हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने राफेल डील से ये एंटी करप्शन क्लॉज ही हटा दिया है. इससे साफ है कि उन्होंने लूट की छूट दी है.'

राहुल गांधी आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर एक दिन के उपवास पर बैठे चंद्रबाबू नायडू के प्रति समर्थन जताने के लिए आंध्रे भवन पहुंचे थे, जहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह बात कही.



कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके बाद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पीएम मोदी पर एयरफोर्स से '30,000 करोड़ रुपये की चोरी' में मदद का आरोप लगाया.

राहुल गांधी का ट्वीट


बता दें कि अखबार ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भारत सरकार ने सप्लाई प्रोटोकॉल से मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) की उन धाराओं को हटा लिया था, जिनके तहत 'बेजा दबाव और दलालों तथा एजेंसियों के इस्तेमाल पर दंड लगाने' का प्रावधान था. इसके साथ 'दसॉ एविएशन व एमबीडीए फ्रांस के कंपनी खातों में पहुंच के अधिकार' देने वाले प्रावधानों को भी हटा लिया गया.

बता दें कि दसॉ राफेल विमानों की सप्लायर है, जबकि एमबीडीए फ्रांस भारतीय वायुसेना को हथियारों की सप्लायर है.
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अखबार के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की सुरक्षा कमेटी ने 24 अगस्त 2016 को इस डील से जुड़े दस्तावेज़ों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद् की सितंबर 2016 में हुई बैठक में इन प्रावधानों का हटाया गया.

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इस रिपोर्ट में साथ ही बताया गया कि फ्रांस के साथ इस सौदे के लिए बातचीत कर रही टीम में शामिल तीन अधिकारियों एमपी सिंह, एआर सुले, राजीव वर्मा ने इस प्रावधानों को हटाए जाने पर सख्त ऐतराज जताया था, लेकिन उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया.

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इससे पहले इसी अखबार ने रक्षा मंत्रालय के भेजे एक नोट के हवाले से बताया था कि राफेल डील को लेकर बातचीत में प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल दे रहा था और इस पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने एतराज़ जताया था.

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