गुट-निरपेक्षता एक समय के लिए थी, भारत अब इससे आगे सोचता है: एस जयशंकर

गुट-निरपेक्षता एक समय के लिए थी, भारत अब इससे आगे सोचता है: एस जयशंकर
जयशंकर ने इस चर्चा में चीन के उदय, गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे कई विषयों पर बात की. (PTI)

जयशंकर (S Jaishankar) ने यह टिप्पणी एक निजी चैनल पर ऑनलाइन चर्चा के दौरान की. इस चर्चा में प्रमुख उद्योगपति सुनील कांत मुंजाल (Sunil Kant Munjal) और रणनीति मामलों के विशेषज्ञ प्रो. सी. राजा मोहन (Prof C Raja Mohan) भी शामिल थे.

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नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा है कि भारत ने पिछले वर्षों के दौरान जितने भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए उससे देश की अर्थव्यवस्था को ज्यादा फायदा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्षता (Non Alignment) एक विशिष्ट युग के लिए थी. भारत अब सिर्फ इसका दर्शक बनकर नहीं रहेगा, क्योंकि हाल के वर्षों में कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन जैसे मामलों में भारत का योगदान बढ़ा है. जयशंकर ने यह टिप्पणी ने एक निजी चैनल पर ऑनलाइन चर्चा के दौरान की. इस चर्चा में प्रमुख उद्योगपति सुनील कांत मुंजाल (Sunil Kant Munjal) और रणनीति मामलों के विशेषज्ञ प्रो. सी. राजा मोहन (Prof C Raja Mohan) भी शामिल थे.

जयशंकर ने इस चर्चा में चीन के उदय, गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे कई विषयों पर बात की. भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह जटिल पड़ोस है, जिसमें अक्सर भारत पर ही भड़ास निकाली जाती है. उन्होंने कहा कि देशों की घरेलू राजनीति के परिणामस्वरूप जो उतार- चढ़ाव की समस्या सामने आती है, उसे संपर्क कि बुनियादी कड़ियों को बिठाकर दूर किया जा सकता है.

पढ़ें उनसे बातचीत के खास अंश:-



प्रो सी राजा मोहन: यह कहा गया है कि कूटनीति बैंकिंग की तरह है. इसपर आप क्या कहना चाहेंगे?
जयशंकर: कूटनीति और बैंकिंग के बीच एक और सामान्य बिंदु है. दोनों ही विश्वास पर बहुत चलते हैं. इसलिए आपके द्वारा बनाई गई पूंजी आपके द्वारा उत्पन्न विश्वास और विश्वसनीयता का एक बहुत बड़ा रोल अदा करती है. हर दिन दुनिया बदलती है. मुझे लगता है कि विभाग में एक मंत्री होने के नाते यह बहुत बड़ा लाभ है कि आपने जीवन भर काम किया है. मैं अपने सहयोगियों और मुद्दों को जानता हूं.

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प्रो सी राजा मोहन: आज दुनिया इतनी चुनौतीपूर्ण क्यों है? इसके क्या कारण हो सकते हैं.
जयशंकर: आज दुनिया इतनी चुनौतीपूर्ण है. इसके तीन कारण हैं. पहला- इन चालीस वर्षों में भारी असंतुलन देखने को मिला है. अगर हम शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं या आसपास के अन्य तरीकों को देखें, तो वे बदल गए हैं. दूसरा- दुनिया में वैश्वीकरण हुआ है. हम परस्पर एक दूसरे पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़े हुए हैं. तीसरा- प्रभाव, शक्ति और कूटनीति के मेट्रिक्स बदल गए हैं. हमारे पास प्रभाव को आंकने के लिए अर्थशास्त्र है. यह सिर्फ इतना नहीं है कि खिलाड़ी बदल गए हैं बल्कि पूरा परिदृश्य बदल गया है.

प्रो सी राजा मोहन: जब आप 40 साल पहले विदेशी सेवा में शामिल हुए थे, तब दो बड़े देश थे. अब अमेरिका और चीन ही रह गए हैं?
जयशंकर: मुझे लगता है कि तब द्विध्रुवीकरण थी, हालांकि निरपेक्ष नहीं थी. आज भी कुछ प्रकार की द्विध्रुवीयता है, लेकिन हम एक बहु-ध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं. स्पष्ट रूप से यूएस-चीन दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावशाली हैं. मैं अभी भी कहूंगा कि पहले द्विध्रुवी दुनिया में बहु-ध्रुवीय विशेषताएं थीं. इस बार यह दूसरे तरीके से होने जा रहा है.

प्रो सी राजा मोहन: कई लोग मानते हैं कि उन्होंने चीन की गति और वृद्धि को कम करके आंका. क्या आप इससे सहमत हैं?
जयशंकर: 1988 में जब राजीव गांधी चीन गए, तो वह युद्ध के बाद वहां जाने वाले पहले प्रधानमंत्री थे. तब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था समान थी. आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत की पांच गुना है. बेशक हम भी बड़े हो गए हैं. चीन ने एक बहुत प्रभावशाली रिकॉर्ड बनाया किया है. हमें अपनी वृद्धि पर भी चिंतन करना चाहिए.

प्रो सी राजा मोहन: चीन जिस तरह से दुनिया के बारे में सोचता है, लगता है वह भी बदल गया है. क्या आपको लगता है कि हमारा इस्टैब्लिशमेंट अभी भी पुराने तरीके से सोचता है?
जयशंकर: मैं यहां चालीस साल से हूं और लोगों के सोचने के तरीके में बदलाव देखा है. आज हमारी पहुंच कैरेबियन से दक्षिण प्रशांत तक है. हमारे 51 देशों में प्रोजेक्ट हैं. 40 साल पहले यह असंभव था. ऐसा नहीं है कि हम अधिक प्रभावशाली नहीं हैं, विकास का मुद्दा सापेक्ष है. हमारे लिए सभी उद्योगों में वास्तव में गहरी सुधार लाना एक चुनौती है.

प्रो सी राजा मोहन: गुटनिरपेक्षता को आज संयुक्त राष्ट्र से दूर होने के रूप में परिभाषित किया गया है. उस दिशा में हमारे कदम क्या हैं?
जयशंकर: गुटनिरपेक्षता एक विशिष्ट युग और एक विशेष संदर्भ के लिए थी. जब ये 50 और 60 के दशक में आया, तब हम बहुत कमजोर थे. लेकिन आज लोग समाधान के लिए हमारी ओर रुख करते हैं. कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन बड़े मुद्दे हैं, जिनमें हमारा योगदान दुनिया भी मानती है. अब भारत गुट निरपेक्षता का दर्शक नहीं बना हुआ है.

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प्रो सी राजा मोहन: फ्रांस और जापान का महत्व आज हमारी विदेश नीति में बढ़ा है?
एस जयशंकर: इसमें से कुछ अमेरिका के विरोध का परिणाम है. बड़ा छाता अब पहले की तुलना में छोटा या कम मोटा हो गया है. इसने अन्य देशों को बहुत अधिक स्वायत्त नियमों को चलाने की अनुमति दी है.
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