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कश्मीर में हालात हो रहे सामान्य, हिरासत से नेताओं को रिहा किया जाएगा, समय-सीमा तय नहीं: गृह मंत्रालय

भाषा
Updated: November 16, 2019, 5:57 AM IST
कश्मीर में हालात हो रहे सामान्य, हिरासत से नेताओं को रिहा किया जाएगा, समय-सीमा तय नहीं: गृह मंत्रालय
सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में हिरासत (Custody) में लिए गए नेताओं को छोड़ने के सवाल पर केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला (Union Home Secretary Ajay Kumar Bhalla) और उनकी टीम के अधिकारियों ने बताया कि कुछ नेताओं (Some leaders) को रिहा किया जा चुका है और बाकी को धीरे-धीरे रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन वे समय-सीमा बताने से बचते रहे.

सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में हिरासत (Custody) में लिए गए नेताओं को छोड़ने के सवाल पर केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला (Union Home Secretary Ajay Kumar Bhalla) और उनकी टीम के अधिकारियों ने बताया कि कुछ नेताओं (Some leaders) को रिहा किया जा चुका है और बाकी को धीरे-धीरे रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन वे समय-सीमा बताने से बचते रहे.

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नई दिल्ली. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को संसद की एक समिति (Standing Committee of Parliament) को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में हालात सामान्य हो रहे हैं तथा पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किया जाएगा लेकिन इसके लिए उन्होंने कोई समय-सीमा नहीं बताई. यह जानकारी सूत्रों ने दी.

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हालात से अवगत कराया. समझा जाता है कि समिति के कुछ सदस्यों ने सरकारी अधिकारियों से कहा कि उन्हें कश्मीर जाने दिया जाने दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मांग को खारिज कर दिया गया.

पीएसए के तहत हिरासत में लिए जाने को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं फारूख अब्दुल्ला
लोकसभा और राज्य सभा के सदस्यों ने सरकार के शीर्ष अधिकारियों से हिरासत में लिए गए नेताओं खासतौर पर तीन बार मुख्यमंत्री रहे एवं श्रीनगर से सांसद फारूख अब्दुल्ला के बारे में सवाल किए, जिन्हें 17 सितंबर को जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया कि जिन्हें जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है, वे इसे अधिकृत न्यायाधिकरण में चुनौती दे सकते हैं और उसके आदेश से अंसतुष्ट होने पर उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं. अब्दुल्ला एकमात्र नेता हैं जिन्हें कश्मीर में पीएसए कानून के तहत हिरासत में रखा गया है.

5 अगस्त से हिरासत में हैं उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती
सूत्रों के मुताबिक सांसदों ने लंबे समय तक अब्दुल्ला के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को लंबे समय तक हिरासत में रखने का विरोध किया. दोनों पांच अगस्त से हिरासत में हैं जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया था.

जम्मू-कश्मीर में स्कूल खुल गए हैं और सेब का कारोबार हो रहा हैसूत्रों के मुताबिक गृह सचिव ने सांसदों को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं, स्कूल खुल गए हैं और सेब का कारोबार हो रहा है. सांसदों ने कश्मीर घाटी में पांच अगस्त से इंटरनेट सेवाओं पर अंकुश लगाने का मुद्दा उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध आतंकवादियों को विध्वंसक कार्रवाई को अंजाम देने से रोकने और असामाजिक तत्वों को अफवाह फैलाने से रोकने के लिए लगाया गया है.

जम्मू-कश्मीर के अन्य कानूनों को बनाया जाएगा भारतीय संविधान के अनुकूल
सांसदों को अधिकारियों ने बताया कि 1990 से अबतक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा की 71,254 घटनाएं हुई जिनमें 14,049 नागरिकों की मौत हो गई और 5,293 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए. इसी दौरान 22,552 आतंकवादी भी मारे गए. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को बताया कि सभी केंद्रीय कानून नए केंद्र शासित प्रदेश में लागू होंगे. जिन राज्य कानूनों का अधिकार क्षेत्र केंद्रीय कानून के अधिकार क्षेत्र में दखल देता हैं, वे निरस्त हो गए हैं. जम्मू-कश्मीर के अन्य कानूनों को भारतीय संविधान के अनुकूल बनाया जाएगा.

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हैं 22 जिले
सांसदों के सामने दी गई प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों ने भारत के नए राजनीतिक मानचित्र को भी प्रदर्शित किया जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेशों के रूप में दिखाया गया है तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान को भी इन केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल किया गया है. प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 22 जिले हैं और कुल आबादी करीब एक करोड़ 22 लाख है. वहीं केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में दो जिले कारगिल और लेह हैं.

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First published: November 16, 2019, 5:57 AM IST
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