कोरोना की सेकेंड वेव में पूर्वोत्तर रेलवे ने बनाया‌ रिकॉर्ड, 131.85% ज्यादा माल ढोया...

रेलवे को कोरोना काल में बड़ा राजस्व भी अर्जित हो रहा है. इसका बड़ा उदाहरण रेलवे के जोनों में गत वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में माल लदान के रिकॉर्ड भी बन रहे हैं. (Photo-MR/Twitter)

रेलवे को कोरोना काल में बड़ा राजस्व भी अर्जित हो रहा है. इसका बड़ा उदाहरण रेलवे के जोनों में गत वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में माल लदान के रिकॉर्ड भी बन रहे हैं. (Photo-MR/Twitter)

Indian Railways: पूर्वोत्तर रेलवे ने वर्ष 2021-22 के मई माह, 2021 में 0.2560 मीलियन टन माल का लदान किया जो गत वर्ष के मई माह की तुलना में 87.40 प्रतिशत अधिक है. वर्ष 2021-22 में मई माह तक 0.6464 मीलियन टन माल लदान हुआ, जो गत वर्ष के इसी अवधि की तुलना में 131.85 प्रतिशत अधिक है.

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नई दिल्ली. देशभर में कोरोना (Corona) संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते अभी ट्रेनों (Trains) का पूरी तरीके से संचालन नहीं किया जा रहा है. इसके वजह से रेलवे माल लदान पर पूरी तरीके से फोकस किए हुए हैं. इसका बड़ा फायदा यह हो रहा है कि जहां रेल के जरिए माल (Freight) को ज्यादा से ज्यादा सही समय पर पहुंचाया जा रहा है. वहीं, रेलवे को कोरोना काल में बड़ा राजस्व भी अर्जित हो रहा है. इसका बड़ा उदाहरण रेलवे (Railway) के जोनों में गत वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में माल लदान के रिकॉर्ड भी बन रहे हैं.

पूर्वोत्तर रेलवे प्रवक्ता पंकज कुमार सिंह के मुताबिक जोनल रेलवे पर माल यातायात में वृद्धि हेतु उठाये गये प्रभावी कदमों के फलस्वरूप माल लदान में बढ़ोत्तरी का क्रम पिछले वर्ष से निरन्तर जारी है.

वर्ष 2021-22 के मई माह, 2021 में 0.2560 मीलियन टन माल का लदान हुआ जो गत वर्ष के मई माह की तुलना में 87.40 प्रतिशत अधिक है. वर्ष 2021-22 में मई माह तक 0.6464 मीलियन टन माल लदान हुआ, जो गत वर्ष के इसी अवधि की तुलना में 131.85 प्रतिशत अधिक हैै.

कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में यह उपलब्धि पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के योजनाबद्ध रूप से समेकित प्रयासों का परिणाम है.मंडल, मुख्यालय तथा रेलवे बोर्ड स्तर पर लोडिंग/अनलोडिंग के विभिन्न आयामों पर त्वरित निर्णय हेतु बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट का गठन किया गया है, जिनके प्रयासों से पूर्वोत्तर रेलवे पर नये माल यातायात को रेलवे पर लाने में सफलता मिली.
पूर्वोत्तर रेलवे पर मालगाड़ियों की औसत गति बढ़कर 50 किमी. प्रति घंटा हो गई है, जिससे सामान तीव्र गति से गन्तव्य स्थानों पर पहुंच जा रहा है तथा पुनः लोडिंग के लिए वैगन भी जल्दी उपलब्ध हो जा रहा है. माल यातायात में वृद्धि हेतु बिजनेस डेवलेपमेंट यूनिट (बी.डी.यू.) टीमों द्वारा व्यवसायियों एवं औद्योगिक संस्थानों से सम्पर्क किया गया तथा उनकी आवश्यकतानुसार मालगोदामों में सुधार एवं विस्तार किया गया.

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