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गैर-मुस्लिम नागरिकता बिल की चर्चा के बीच 'बाहरी' लोगों को रोकने की तैयारी कर रहे पूर्वोत्‍तर के राज्‍य

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 12:58 PM IST
गैर-मुस्लिम नागरिकता बिल की चर्चा के बीच 'बाहरी' लोगों को रोकने की तैयारी कर रहे पूर्वोत्‍तर के राज्‍य
एक तरफ केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल को आगे बढ़ा रही है. वहीं, पूर्वोत्‍तर के राज्‍य 'बाहरी' लोगों को अपने यहां आने से रोकने की कानूनी तैयारी कर रहे हैं.

एक तरफ राज्‍य सरकारें (State Governments) कैब के कारण आने वाले 'बाहरी' लोगों को रोकने के लिए कानून (Legislation) बना रही हैं. वहीं, पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के कई संगठन (Organisations) इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन (Protest) करने की तैयारी पूरी कर चुके हैं. ये संगठन घर-घर जाकर लोगों को विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship (Amendment) Bill) के बारे में जागरूक करने की तैयारी में हैं.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 12:58 PM IST
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अनूप शर्मा

गुवाहाटी. केंद्र सरकार बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान या अफगानिस्‍तान में धार्मिक उत्‍पीड़न (Religious Persecution) के कारण भारत आए गैर-मुस्लिम (Non-Muslims) शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) देने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को आगे बढ़ा रही है. वहीं, पूर्वोत्‍तर राज्‍यों (Northeast States) की सरकारें कैब के कारण उनके प्रदेशों में आने वाले 'बाहरी' लोगों को रोकने के लिए कानूनी तैयारियां कर रही हैं. जहां नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) ने असम के लोगों को अवैध घुसपैठ (Illegal Infiltration) के मामले में राहत दी. वहीं, मेघालय (Meghalaya) सरकार ने राज्‍य में घूमने आने वाले लोगों (Visitors) के पंजीकरण को अनिवार्य (Mandatory) करने वाला अध्‍यादेश (Ordinance) पारित कर दिया है.

मेघालय में तत्‍काल प्रभाव से लागू होगा संशोधन, उल्‍लंघन पर होगी जेल
राज्‍य सरकार ने मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्‍योरिटी एक्‍ट (MRSSA), 2019 को अध्‍यादेश के तौर पर संशोधित कर दिया है. मेघालय सरकार ने कहा कि संशोधन तत्‍काल प्रभाव से लागू होगा. इसे विधानसभा के अगले सत्र में नियमित (Regularize) कर दिया जाएगा. अध्‍यादेश के जरिये अनिवार्य कर दिया गया है कि मेघालय से बाहर का कोई भी महिला या पुरुष अगर राज्‍य में घूमने या रुकने आना चाहता है तो उसे पंजीकरण कराना होगा. साथ ही इसमें कहा गया है कि जानबूझकर इसका उल्‍लंघन करने वाले व्‍यक्ति को आईपीसी की धारा-176 या 177 के तहत दंड दिया जाएगा, जो जुर्माना या जेल या दोनों हो सकता है. ऐसे में अब जो लोग मेघालय में 24 घंटे से ज्‍यादा रुकना चाहते हैं उन्‍हें राज्‍य में प्रवेश के दौरान अपना पंजीकरण (Registration) कराना होगा.

नगालैंड आरआईआईएन की तैयारी पर कर रहा है विचार, केंद्र से की बात
नगालैंड (Nagaland) सरकार भी राज्‍य में रहने वाले बाहरी लोगों का पता लगाने के लिए रजिस्‍टर ऑफ इंडिजीनियस इंहैबिटैंट्स ऑफ नगालैंड (RIIN) की तैयारी पर विचार कर रही है. राज्‍य सरकार इससे यह भी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कैब लागू होने पर नगालैंड की जनसांख्यिकीय पैटर्न (Demographic Pattern) में बदलाव नहीं होने पाए. हालांकि, आरआईआईएन और इसे लागू करने के तरीके को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है, लेकिन नगालैंड के सभी मूल निवासियों के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा मानक लागू करने को लेकर एकमत हैं. राज्‍य सरकार ने आरआईआईएन को तैयार करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ भी विचार-विमर्श किया है. अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को कैब पर विभिन्‍न पक्षों के साथ अंतिम चर्चा करने और सिफारिशें केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने का सर्वसम्‍मति से फैसला किया.

पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों ने 'बाहरी' लोगों को रोकने के लिए या तो विधेयक पारित कर दिए हैं या इसकी तैयारी में हैं.

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अरुणाचल प्रदेश भी 'बाहरी' लोगों को रोकने के लिए ला रहा है कानून
कैब पर अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के गृह मंत्री बमांग फेलिक्‍स की अध्‍यक्षता वाली सलाहकार समिति ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान अपनी रिपोर्ट राज्‍य सरकार को सौंप दी. इसके बाद तय किया गया कि सभी पक्षों के साथ बुधवार को अंतिम दौर की बातचीत कर ली जाए. नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत सरकार बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान से शरण लेने  आए उन हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध व पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देना चाहती है, जो भारत में कम से कम सात साल रह चुके हैं. उनके लिए दस्‍तावेजों की बाध्‍यता भी नहीं रहेगी. इसका विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि सरकार मुस्लिमों के साथ पक्षपात कर रही है. साथ ही आरोप लगाया जा रहा है कि यह केंद्र सरकार का सांप्रदायिक कदम है.

मणिपुर-मिजोरम ने कानून पारित कर मंजूरी के लिए राष्‍ट्रपति को भेजा
पूर्वोत्‍तर के दो राज्‍य मणिपुर (Manipur) और मिजोरम (Mozoram) ने स्‍थानीय लोगों की सुरक्षा और बाहरी लोगों को राज्‍य में रहने से रोकने के लिए पहले ही कानून पारित कर दिया है. इस पर राष्‍ट्रपति की मुहर लगना बाकी है. मिजोरम की एमएनएफ सरकार ने 18 मार्च को मेंटिनेंस ऑफ हाउसहोल्‍ड रजिस्‍टर बिल पारित कर राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया था. मणिपुर की बीजेपी की नेतृत्‍व वाली सरकार ने भी मणिपुर पीपुल्‍स प्रोटेक्‍शन बिल पारित कर केंद्रीय मंत्रालय को राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है. मिजोरम में पारित किया गया कानून स्‍थानीय लोगों के लिए विश्वसनीय व्यक्तिगत पहचान प्रणाली तैयार करना चाहता है. साथ ही बाहरी लोगों को राज्‍य की विकास योजनाओं का लाभ लेने से रोकना चाहता है. इसमें राज्‍य के स्‍थायी निवासियों का व्यापक डेटाबेस बनाने का प्रावधान भी है. वहीं, मणिपुर के कानून में मणिपुरी और गैर-मणिपुरी लोगों को परिभाषित करने के साथ ही बाहरी लोगों के आने-जाने का नियमन करने की व्‍यवस्‍था देता है.

आसू और नेसो कर रहे हैं नारिकता संशोधन विधेयक का विरोध
ऑल असम स्‍टूडेंट्स यूनियन (Aasu) के मुख्‍य सलाहकार समुज्‍जल भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार कैब लागू करना चाहती है. हम इसका विरोध कर रहे हैं. असम के साथ अन्‍य पूर्वोत्‍तर राज्‍य पहले ही विदेशियों के बोझ से दब चुके हैं. अब और बाहरी लोगों को नहीं ढोया जा सकता. हम असम और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों का अवैध विदेशियों का डंपिंग ग्राउंड नहीं बनने देंगे. नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (NESO) कैब का विरोध करने के लिए पहले ही पूरी योजना बना चुकी है. नेसो के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को विवादित विधेयक के बारे में जागरूक करेंगे. नेसो के अध्‍यक्ष सैमुअल जयरवा ने कहा कि पूर्वोत्‍तर के सभी राज्‍य 1971 के युद्ध के कारण हिंदू शरणार्थियों से पहले ही भरे पड़े हैं. अब नागरिकता संशोधन बिल पूर्वोत्‍तर राज्‍यों पर बोझ बढ़ाने का काम करेगा. हम इसका लगातार विरोध कर रहे हैं.

(लेखक एक स्‍वतंत्र पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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First published: November 21, 2019, 12:27 PM IST
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