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महामारी, अकाल और तरह-तरह की बीमारियां... जानिए 2021 के लिए नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां

नास्त्रेदमस ने लेस प्रोफीटीस नाम की अपनी किताब में 6 हजार से ज्यादा भविष्यवाणियां की हैं.
नास्त्रेदमस ने लेस प्रोफीटीस नाम की अपनी किताब में 6 हजार से ज्यादा भविष्यवाणियां की हैं.

नास्त्रेदमस (Nostradamus) कि किताब लेस प्रोफीटीस में 6 हजार से ज्यादा भविष्यवाणियां हैं, जिनके सच साबित होने को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 7, 2020, 9:34 PM IST
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नई दिल्ली. साल 2020 में अब कुछ ही दिन बचे हैं और 2021 का इंतजार पूरी दुनिया को बड़ी बेसब्री से है. कोरोना वायरस महामारी (Corornavirus), आर्थिक सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय तनातनी के बीच दुनिया भर के लोग नए साल का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन, नास्त्रेदमस (Nostradamus) की भविष्यवाणियों को देखें, तो 2021 में भी अकाल, महामारी, भूकंप के खतरों से दुनिया को जूझना होगा. नास्त्रेदमस का पूरा नाम माइकल दि नास्त्रेदमस था और कोरोना वायरस महामारी को भी बहुत सारे लोग नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी से जोड़कर देखते हैं. 2021 के लिए नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को देखें तो नए साल में अकाल, भूकंप, तरह-तरह की बीमारियां और महामारी बढ़ेगी.

नास्त्रेदमस के अनुसाार एक रशियन वैज्ञानिक ऐसा जैविक हथियार और वायरस विकसित करेगा, जो इंसान को जॉम्बी बना सकता है. ये इंसानी प्रजाति के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा और इससे मनुष्य प्रजाति का विनाश होने की आशंका बढ़ जाएगी. एक भविष्यवाणी में नास्त्रेदमस ने ये भी कहा है कि सूर्य की तबाही पृथ्वी के नुकसान का कारण बनेगी. समुद्र तल के बढ़ने और पृथ्वी के उसमें समाने की बात भी आने वाले वर्षों में कही गई है.

2021 के लिए नास्त्रेदमस की एक और भविष्यवाणी के मुताबिक पृथ्वी से धूमकेतु के टकराने की बात भी कही है, जो भूकंप और कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकता है. नासा के वैज्ञानिकों ने भी इस साल एक बड़े धूमकेतु के पृथ्वी से टकराने की आशंका जताई है. बता दें कि नासा 2009KF1 नाम के एक एस्टेरॉयड पर नजर भी रख रही है, जिसके मई 2022 में पृथ्वी से टकराने का खतरा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एस्टेरॉयड की ताकत 1945 में जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से भी ज्यादा हो सकती है.



नास्त्रेदमस से सदियों पहले लेस प्रोफीटीस नाम की अपनी किताब में दुनिया को लेकर कई अहम भविष्यवाणियां भी हैं. किताब का पहला संस्करण 1555 में आया था, जिसके बाद इस किताब को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रही हैं.

इस किताब में 6 हजार से ज्यादा भविष्यवाणियां हैं, जिसमें कईयों के सच होने के दावे किए जाते हैं.
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