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सत्यपाल मलिक बोले- जम्मू कश्मीर में हर दिन ‘आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे’ याद आती थी

भाषा
Updated: November 28, 2019, 10:55 PM IST
सत्यपाल मलिक बोले- जम्मू कश्मीर में हर दिन ‘आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे’ याद आती थी
गोवा के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने इफ्फी के समापन समारोह में शिरकत की

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) ने गुरुवार को 50वें अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्मोत्सव (International Film Festival of India) के समापन समारोह को संबोधित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा आज अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटने के बाद, भारतीय बलों ने एक गोली भी नहीं चलाई है.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 10:55 PM IST
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पणजी. जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) ने वहां पर अपने कार्यकाल के दौरान सुरक्षा हालात का गुरुवार को जिक्र करते हुए कहा कि हर रात उन्हें ‘पाकीजा’ फिल्म की एक गजल की आखिरी लाइन ‘आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे’ याद आती थी.उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को हटाने के बाद वहां कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है.

इस महीने के शुरू में गोवा (Goa) के राज्यपाल के तौर पर शपथ लेने वाले मलिक का कहना है कि उनमें कश्मीर का ‘खुमार’ अबतक खत्म नहीं हुआ है. वह जम्मू कश्मीर राज्य के आखिरी राज्यपाल थे. केंद्र ने पांच अगस्त को राज्य के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था.

कश्मीर में याद आती थी ये ग़ज़ल
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे पाकीजा फिल्म की एक ग़ज़ल की आखिरी लाइन हर रात याद आती थी . गजल कुछ इस तरह थी ‘आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे, तीरे नजर देखेंगे ,आप तो आंख मिलाने से भी शर्माते हैं, आप तो दिल के धड़कने से भी डर जाते हैं ,उस पर जिद ये है कि हम जख्में जिगर देखेंगे,’ लेकिन मुझे इसकी आखिरी पंक्ति ही याद आती थी कि ‘आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे.’ उन्होंने कहा कि इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां हालात कितने खराब थे और जिंदगी हर समय दांव पर लगी होती थी.

उन्होंने कहा, ‘‘आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे. वहां काफी खतरे थे... मेरे वहां पहुंचने के बाद, 17 साल के अंतराल के पश्चात वहां पंचायत चुनाव हुए. सभी पार्टियों ने उनका बहिष्कार किया, हुर्रियत ने बहिष्कार किया, आतंकवादियों ने धमकी दी थी कि वे सभी प्रत्याशियों को मार देंगे.’’ मलिक ने कहा, ‘‘आपको जानकर खुशी होगी कि 4000 लोगों को चुना गया था और कोई हताहत नहीं हुआ था. एक चिड़िया तक हताहत नहीं हुई. यह कश्मीर के इतिहास में अनोखी घटना थी.’’

इफ्फी के समापन समारोह में पहुंचे थे मलिक
मलिक ने गुरुवार को 50वें अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्मोत्सव (International Film Festival of India) के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने के बाद से घाटी में कोई हताहत नहीं हुआ है.
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उन्होंने कहा, ‘‘ अगर वहां पर मामूली घटना भी होती थी तो हजारों मर जाते. 2010 में अशांति थी, 50 व्यक्ति मारे गए थे. जब बुरहान वानी (Burhan Wani) का मामला हुआ तो 110 लोगों की मौत हुई. हर हफ्ते वहां लोग हताहत होते थे. लोग मरते थे. लोगों को उकसाया जाता था. वे थानों पर हमले करते थे.’’

मलिक ने कहा, ‘‘ आज अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटने के बाद, भारतीय बलों ने एक गोली भी नहीं चलाई है... इसके हटने के एक दिन बाद, एक लड़के ने मुझसे कहा था कि ‘मैं आपको चाय के लिए लाल चौक ले चलता हूं.’’ उन्होंने कहा कि लोगों के मिज़ाज में एक बदलाव आया है.

युवाओं से की थी हथियार छोड़ने की अपील
मलिक ने कहा, ‘‘ मैंने सार्वजनिक तौर पर युवाओं से हथियार छोड़ने की अपील की थी और कहा था कि आप मेरे घर आएं और खाना खाएं तथा मुझे समझाएं कि हथियारबंद 250 लोग कैसे भारत जैसी महाशक्ति को हरा सकते हैं और कुछ ले जा सकते हैं.’’

मलिक ने कहा कि पहले नौकरशाही द्वारा आशंका जतायी जा रही थी कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद पुलिस बगावत कर देगी लेकिन ईद के मौके पर किसी भी पुलिसकर्मी ने छुट्टी नहीं ली और मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाई .

उन्होंने इफ्फी (IFFI) समारोह में मौजूद केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी, रोहित शेट्टी और अन्य जानी मानी हस्तियों से सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों का निर्माण करने का भी अनुरोध किया. उन्होंने साथ ही कॉरपोरेट घरानों से देश में बेरोजगारी, शिक्षा, सैनिकों और किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए आगे आने का अनुरोध किया.

किताबों से ज्यादा होता है फिल्मों का असर
मलिक ने कहा कि फिल्मों का असर किताबों से कहीं अधिक होता है और इसलिए फिल्मकारों को समाज की विसंगतियों पर फिल्मों का निर्माण कर उन्हें बेनकाब करना चाहिए.

उन्होंने इस मौके पर राजकपूर और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म ‘‘तीसरी कसम’’ को अपनी पसंदीदा फिल्म बताया और कहा कि फिल्मों का संदेश गहराई तक प्रभावित करता है और इसीलिए फिल्म बनाते समय समाज पर उसके असर को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

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First published: November 28, 2019, 10:55 PM IST
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