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    कोरोना मरीजों का इलाज करने में नाकामयाब है प्लाज्मा थेरेपी, बंद कर सकता है भारत

    प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना इलाज की गाइडलाइंस से हटाया जा सकता है.
    प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना इलाज की गाइडलाइंस से हटाया जा सकता है.

    मेडिकल रिसर्च की अग्रणी संस्था ICMR के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव (Balram Bhargava) ने मंगलवार को कहा-कोरोना के इलाज की गाइडलाइंस में से प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) को हटाए जाने को लेकर विचार चल रहा है. इस पर विचार कोविड-19 के लिए बनी ICMR की नेशनल टास्क फोर्स कर रही है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 20, 2020, 7:55 PM IST
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    नई दिल्ली. कोविड-19 मरीजों की इलाज पद्धति में से प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) को हटाया जा सकता है. मेडिकल रिसर्च की अग्रणी संस्था आईसीएमआर (Indian Council of Medical Research-ICMR) के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा- 'कोरोना के इलाज की गाइडलाइंस में से प्लाज्मा थेरेपी को हटाए जाने को लेकर विचार चल रहा है. इस पर विचार कोविड-19 के लिए बनी ICMR की नेशनल टास्क फोर्स कर रही है.'

    कई राज्य कर रहे हैं इस्तेमाल, प्लाज्मा डोनेट करने का किया जा रहा था आग्रह
    प्लाज्मा थेरेपी को इलाज से हटाए जाने को बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कई राज्य गंभीर कोरोना मरीजों के इलाज में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. कई राज्यों ने कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का बड़ा रोल बताया है. राजधानी दिल्ली में आप की अगुआई वाली सरकार ने तो प्लाज्मा बैंक को भी प्रमोट किया था. वहीं उत्तर-पूर्वी राज्य असम में भी प्लाज्मा डोनेट करने वालों को कई तरह की सुविधाएं देने की बात कही गई थी.

    केंद्र सरकार ने दी थी चेतावनी
    गौरतलब है कि अप्रैल में केंद्र सरकार ने कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी मरीज की जिंदगी को मुश्किल में भी डाल सकती है. तब इस थेरेपी को एक्पेरिमेंटल बताया गया था. स्वास्थ्य मंत्रालय में जाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने तो इस थेरेपी को गैरकानूनी तक बताया था. उन्होंने कहा था कि जब तक आईसीएमआर की निरीक्षण टीम से संबंधित कोई व्यक्ति इलाज न देख रहा हो तब तक इस थेरेपी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.



    आईसीएमआर की स्टडी में खुलासा- नाकामयाब है प्लाज्मा थेरेपी
    अब बताया जा रहा है कि आईसीएमआर द्वारा की गई स्टडी में पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी मरीजों को फायदा पहुंचाने में नाकामयाब रही है. ये स्टडी देश के 39 अस्पतालों में की गई. इस स्टडी को आईसीएमआर ने कंडक्ट करवाया था. ये अप्रैल से जुलाई महीने के दौरान की गई. अब प्रोफेसर बलराम भार्गव ने कहा है कि हम बातचीत कर रहे हैं. इस स्टडी के नतीजे महत्वपूर्ण हैं. इन्हीं के आधार पर फैसला किया जाएगा.

    (Sneha Mordani की स्टोरी से इनपुट्स के साथ. पूरी स्टोरी यहां क्लिक कर पढ़ी जा सकती है.)
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