नई मुसीबत: अब कोविड-19 मरीजों में गैंग्रीन की आशंका बढ़ी, आंत में थक्कों के मामले आए सामने

आंतों में थक्के की शिकायत वाले मरीज गंभीर मेसेन्टेरिक इस्किमिया का शिकार हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आंतों में थक्के की शिकायत वाले मरीज गंभीर मेसेन्टेरिक इस्किमिया का शिकार हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Covid-19 Side Effects: आंतों में थक्के की शिकायत वाले मरीज गंभीर मेसेन्टेरिक इस्किमिया (AMI) का शिकार हो सकते हैं. यह पेट से जुड़ी एक दुर्लभ स्थिति होती है, जो रोगों और मृत्यु दर के उच्च स्तर से जुड़ी होती है.

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नई दिल्ली. तीन रंगों के फंगस के बीच अब कोविड-19 के मरीजों में आंत में थक्के (Intestinal Clots) और गैंग्रीन (Gangerine) जैसी परेशानियां भी सामने आ रही हैं. जानकार पेट में होने वाले अनजाने दर्द के कारण तत्काल जांच की बात कह रहे हैं. वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने देशभर से स्वतंत्र शोधकर्ताओं को कोविड-19 से जुड़ी जानकारियों में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया है. हाल ही में कोविड-19 से उबर रहे मरीजों में फंगस के मामले देखे गए थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया कि रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के अस्पतालों में फिजिशियंस और सर्जंस ने एक दर्जन के आसपास मामलों का इलाज किया है. उन्होंने पेट में होने वाले अनजान दर्द को लेकर चेतावनी दी है. साथ ही तुरंत इन मामलों की जांच की सलाह दी है. स्टडीज बताती हैं कि 16-30 फीसदी कोविड-19 मरीजों को गैस्ट्रोइन्टेस्टेनल लक्षण भी नजर आते हैं. ये लक्षण बेहद मामूली से लेकर ना के बराबर भी हो सकते हैं.

टीओआई के मुताबिक, कोरोना वायरस फेफड़ों के अलावा गैस्ट्रोइन्टेस्टेनल ट्रैक्ट पर भी हमला कर सकता है. दुर्लभ मामलों में कोविड की वजह से मरीजों में आंतों में थक्के हो जाते हैं, जिसे एक्यूट मेसेन्ट्रिक इस्कीमिया (AMI) कहा जाता है. AMI के चलते छोटी आंत के हिस्सों में खून की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे गैंग्रीन की समस्या होती है.

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आंतों में थक्के की शिकायत वाले मरीज गंभीर मेसेन्टेरिक इस्किमिया का शिकार हो सकते हैं. यह पेट से जुड़ी एक दुर्लभ स्थिति होती है, जो रोगों और मृत्यु दर के उच्च स्तर से जुड़ी होती है. अखबार से बातचीत में वैस्क्युलर सर्जन डॉक्टर अनिरुद्ध भुइयां ने बताया कि अगर इसका तुरंत इलाज नहीं किया गया, तो यह घातक साबित हो सकता है.


आंकड़े बताते हैं कि देश में पैर पसार रहे म्यूकर माइकोसिस के 12 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं. आशंका जताई जा रही है कि देश में ऐसे कई मामले भी हो सकते हैं, जिनकी जानकारी सामने नहीं आई है. केंद्र सरकार भी इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरेसिन बी की सप्लाई व्यवस्था बढ़ाने में जुट गई है.

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