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पाकिस्‍तान से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए नागरिकता ही पर्याप्‍त नहीं, उन्‍हें भारतीय कहलाने का सम्‍मान भी चाहिए

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 2:46 PM IST
पाकिस्‍तान से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए नागरिकता ही पर्याप्‍त नहीं, उन्‍हें भारतीय कहलाने का सम्‍मान भी चाहिए
पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत से आईं शांति हरिद्वार घूमने आई थीं और दिल्‍ली में रुक गईं.

पाकिस्‍तान (Pakistan) से आए ज्‍यादातर हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) के लिए सभी राजनीतिक दल एक जैसे हैं. उनका कहना है कि सभी दल भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) दिलाने का वादा करते हैं, लेकिन हमें इससे ज्‍यादा चाहिए. हमें बराबरी के दर्जे (Equality) के साथ ही भारतीय माना भी जाए.

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  • Last Updated: February 7, 2020, 2:46 PM IST
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राका मुखर्जी

नई दिल्‍ली. एक महीने पहले 30 साल की शांति ने लोहे के एक संदूक में कुछ कपड़े, खाना बनाने का सामान, पासपोर्ट (Passport) लिया और 40 दिन के वीजा पर पाकिस्‍तान (Pakistan) के सिंध प्रांत को छोड़कर भारत (India) आ गईं. उनके साथ उनके पति और दो बच्‍चे भी थे. वह जीवन में एक बार हरिद्वार की यात्रा करना चाहती थीं. ये वो वजह है जो उन्‍होंने वीजा (Visa) अधिकारियों को बताई थी. लेकिन, जब शांति दिल्‍ली पहुंचीं तो उन्‍होंने यहीं रुकने का फैसला कर लिया. उत्‍तरी दिल्‍ली (North Delhi) की अरुणा नगर कॉलोनी के छोटे से हिस्‍से में झोपड़ियों में रहने वाले हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) के 170 परिवारों का एक ही सपना है. वे सब सम्‍मान के साथ भारत में ही रहना चाहते हैं.

स्‍थानीय लोग उनके पाकिस्‍तानी होने की याद दिलाते हैं
अरुणा नगर कॉलोनी के इस छोटे से जमीन के टुकड़े से एक किमी से भी कम दूरी पर तिब्‍बती लोगों की रिफ्यूजी कॉलोनी (Tibetian Refugee Colony) है. इस कॉलोनी में खाने-पीने की दुकानें हैं. यहां कपड़ों के डिजाइनर ब्रांड्स की दुकानें हैं. कुल मिलाकर यहां काफी चहल-पहल रहती है. स्‍थानीय लोग यहां से जमकर खरीदारी करते हैं. वहीं, दिल्‍ली (Delhi) के सिग्‍नेचर ब्रिज की हिंदू शरणार्थियों की कॉलोनी से स्‍थानीय लोग दूरी बनाकर रखते हैं. स्‍थानीय लोग उन्‍हें याद दिलाते रहते हैं कि वे पाकिस्‍तानी हैं. इस कॉलोनी के ज्‍यादातर घर टिन शीट्स से बने हुए हैं. किसी-किसी घर की दीवारें ही कंक्रीट की हैं.

रिफ्यूजी कॉलोनी में सिर्फ एक मंदिर है, जो प्रधान सोना दास ने बनवाया है.


सताता रहता है पाकिस्‍तान वापस भेजे जाने का डर
पाकिस्‍तान से आए दयाल दास कहते हैं कि कौन है पाकिस्‍तानी. हम इंडियन ही हैं. वह पाकिस्‍तान के हैदराबाद से दिल्‍ली आए थे. जब वह ये सब कह रहे थे तो उन्‍हें किसी भी समय पाकिस्‍तान प्रत्‍यर्पण (Deport) का डर भी सता रहा था. उनके घर में एक पोल पर तिरंगा (Indian Flag) लहरा रहा था. दास की बेटी ने 9 दिसंबर को एक बच्‍चे को जन्‍म दिया है. दो महीने की ये बच्‍ची 'नागरिकता' हर डर से अनजान सुकून के साथ सो रही थी. दास का कहना है कि नागरिकता का जन्‍म भारत में ही हुआ है. इसलिए वह भारतीय नागरिक (Indian Citizen) ही है. उसके माता-पिता को भी पाकिस्‍तान भेजे जाने का डर सताता रहता है.सब वादे कर रहे, लेकिन किसी ने नहीं बताई प्रकिया
नगारिकता संशोधन कानून 2019 (CAA 2019) लागू होने के बाद अरुणा नगर कॉलोनी में रहने वाले इन शरणार्थियों को कई बार भारतीय नागरिकता दिए जाने के वादे किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी ने उन्‍हें ये नहीं बताया है कि इसकी प्रक्रिया क्‍या होगी? नेताओं ने उन्‍हें बताया है कि सभी को दिल्‍ली चुनाव के बाद नागरिकता दे दी जाएगी. सीएए 2019 की खबर सुनने के बाद चंद्रमा भारत आ गई थीं. वह कहती हैं, 'मोदी जी ने कहा कि हम भारतीय नागरिक बन जाएंगे. हम सब डॉक्‍यूमेंट्स लेकर आए हैं.' उन्‍हें नहीं पता कि भारतीय नागरिकता पाने के लिए उनका यहां छह साल रहना जरूरी है. उन्‍हें ये भी नहीं पता कि 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए लोगों को ही नागरिकता मिलेगी.

अरुणा नगर कॉलोनी में रहने वाले पाकिस्‍तान से आए हिंदू शरणार्थी छोटे-छोटे काम कर गुजर-बसर करते हैं. पाकिस्‍तान से आई बीबा बताती हैं कि उन्‍होंने भारत आने के बाद ही अपने हाथ पर ओम बनवाया.


नागरिकता के साथ रोजगार, घर, शिक्षा भी चाहते हैं
चंद्रमा बताती हैं कि उन्‍होंने 12वीं तक पढ़ाई की हुई है, लेकिन पाकिस्‍तान में उन्‍हें मजदूरी के अलावा कोई काम नहीं मिलता था. उनके मुताबिक, उन्‍होंने कभी दीपावली, दशहरा, होली या दूसरे हिंदू त्‍योहार नहीं मनाए. मेरे बच्‍चे हिंदी लिखना नहीं जानते. मैं अपने बच्‍चों को पढ़ाना चाहती हूं. उनके पति किशन कुमार ने कहा कि वहां हमारी कोई इज्‍जत नहीं थी. यहां रहने वाले ज्‍यादातर हिंदू शरणार्थियों के लिए सभी राजनीतिक दल समान हैं. सभी नेता उनसे नागरिकता दिलाने का वादा तो करते हैं, लेकिन कोई इसकी प्रक्रिया नहीं बताता. यहां रहने वाले नागरिकता के साथ ही सम्‍मान भी चाहते हैं. वे चाहते हैं कि सरकार उन्‍हें रोजगार, घर, शिक्षा दे. साथ ही कोई उन्‍हें बार-बार ये अहसास न कराए कि वे पाकिस्‍तानी हैं.

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First published: February 7, 2020, 1:21 PM IST
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