आधार बायोमैट्रिक्स से नहीं हो सकती मरे हुए लोगों की पहचान: UIDAI

अदालत सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केन्द्र और यूआईडीएआई को अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमैट्रिक्स के इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

भाषा
Updated: November 12, 2018, 7:48 PM IST
आधार बायोमैट्रिक्स से नहीं हो सकती मरे हुए लोगों की पहचान: UIDAI
अदालत सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केन्द्र और यूआईडीएआई को अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमैट्रिक्स के इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
भाषा
Updated: November 12, 2018, 7:48 PM IST
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि किसी अज्ञात शव के फिंगरप्रिंट का मिलान उसके डेटाबेस में संरक्षित 120 करोड़ लोगों के बायोमैट्रिक्स से कराना तकनीकी रूप से संभव नहीं है.

यूआईडीएआई ने मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ से कहा कि फिंगरप्रिंट, आंख की पुतली सहित बायोमैट्रिक्स का मिलान आमने-सामने से किया जाता है और इसके लिए आधार संख्या की जरूरत पड़ती है. अदालत सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केन्द्र और यूआईडीएआई को अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमैट्रिक्स के इस्तेमाल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

पीठ ने यूआईडीएआई से जानकारी रिकॉर्ड में लाने और याचिका पर अपने जवाब में यह बताने को कहा कि आधार डेटाबेस के साथ फिंगरप्रिंट का मिलान संभव क्यों नहीं है. अदालत ने याचिका पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का जवाब मांगा.

अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए अगले साल पांच फरवरी की तारीख तय की.

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First published: November 12, 2018, 7:25 PM IST
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