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बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन का साइड इफेक्ट, तमिलनाडु और बंगाल में गठबंधन वाले दलों में बढ़ी चिंता

बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन का साइड इफेक्ट, तमिलनाडु और बंगाल में गठबंधन वाले दलों में बढ़ी चिंता

रामचंद्र गुहा ने कहा है कि कांग्रेस वर्तमान अवतार में बीजेपी का विकल्प नहीं साबित हो सकती. (फाइल फोटो)

रामचंद्र गुहा ने कहा है कि कांग्रेस वर्तमान अवतार में बीजेपी का विकल्प नहीं साबित हो सकती. (फाइल फोटो)

कांग्रेस (Congress) के प्रदर्शन की कीमत तो राजद (RJD) को चुकानी पड़ेगी. क्योंकि तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के मुख्यमंत्री बनने के सपने को पूरी नहीं होने देने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका मानी जा रही है.

    पल्लवी घोष

    नई दिल्ली. बिहार चुनाव (Bihar Election) पूरा हो चुका है. राज्य की जनता जनादेश दे चुकी है. यह तो खैर हर चुनाव की प्रक्रिया है, लेकिन इस बार के चुनावी दंगल ने कांग्रेस और उसके करीबी दलों के सामने साझेदारी की तस्वीरें साफ कर दी हैं. अभी केवल बिहार चुनाव पूरा हुआ. जबकि, बंगाल और तमिलनाडु अभी बाकी है. कांग्रेस के प्रदर्शन ने निश्चित तौर पर ही दोनों राज्यों के साथियों को सीट बंटवारे को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है.

    बिहार में सामने आने लगे हैं असहमति के सुर
    बिहार के महासचिव तारिक अनवर ने ट्वीट किया है, 'हमें इस बात को मानना होगा कि कांग्रेस के प्रदर्शन के कारण तेजस्वी को गद्दी नहीं मिल पाई.' एक अन्य आरजेडी नेता का कहना है, 'हमें कांग्रेस को 70 सीटें देने के दबाव में आने की जरूरत नहीं थी. कांग्रेस इस बात को जानती थी कि वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, क्योंकि सीटें आसान नहीं थीं.' उन्होंने कहा, 'इसके बावजूद हम पार्टी के साथ सख्ती से बात नहीं कर पाए.' खास बात है कि महागठबंधन (Mahagathbandhan) में हुए सीट बंटवारे में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं, लेकिन वह जीत केवल 19 पर ही सकी.

    खैर, कांग्रेस के प्रदर्शन की कीमत तो राजद को चुकानी पड़ेगी. क्योंकि कांग्रेस तेजस्वी के मुख्यमंत्री बनने के सपने को पूरी नहीं होने देने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. वहीं, जेडीयू के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) 7वीं बार सीएम बनने की तैयारी कर रहे हैं.

    आगामी चुनावों को लेकर सतर्क हुए कांग्रेस के साथी
    तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में जल्द ही चुनाव होने हैं. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस, वाम दल और डीएमके के साथ गठबंधन में है. हालांकि, दोनों राज्यों में अब तक सीट बंटवारे को लेकर चर्चा नहीं हुई है और बिहार चुनाव का असर इस पर पड़ सकता है.

    बंगाल की बात करें, तो बिहार चुनाव में प्रदर्शन के बाद वाम दलों को कांग्रेस के दबाव में आने की जरूरत नहीं होगी. वहीं, तमिलनाडु में डीएमके सत्ता की कोशिशों में लगी हुई है. यहां भी पुराने आंकड़ों पर गौर करें, तो कांग्रेस ने 2016 में 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था और केवल 8 सीटें ही जीत सकी थी. डीएमके के एक सूत्र ने न्यूज18 को बताया, 'कांग्रेस के पास न ताकत है और न ही पैसा. हमने देखा कि बिहार चुनाव में पार्टी कैसे महागठबंधन को नीचे ले आई. हम नहीं चाहते कि यहां ऐसा हो.' इससे साफ होता है कि क्षेत्रीय पार्टियों के बीच कांग्रेस को पसंद नहीं किया जा रहा है. वहीं, बिहार के प्रदर्शन के बाद अब कांग्रेस सीट बंटवारे को लेकर भी मजबूती से दावा नहीं ठोक सकती.

    कांग्रेस के भीतर भी चर्चाएं शुरू
    सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की परेशानियों को उठाते हुए पत्र लिखने वाले नेताओं की पहले दौर की मीटिंग हो चुकी है. पत्र लिखने वालों में शामिल एक नेता ने न्यूज18 को बताया, 'हम पोल के नतीजों का इंतजार कर रहे थे. हमें लगा था कि कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन जैसा हुआ उससे हमारी बात सार्थक साबित हुई है.' उन्होंने कहा, 'यहां कोई प्लान नहीं है, कोई सफाई नहीं है और लीडरशिप कंफ्यूज है.' जो भी हो बिहार जीतने के बाद भगवा पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण पर ध्यान लगाना शुरू कर दिया है, जहां उसका सीधा मुकाबला ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) से होगा.undefined

    Tags: Bihar election, Congress party, Nitish kumar

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