जो बाइडन से अमेरिकी ड्रीम सच होने की उम्मीद, लेकिन सामने है चुनौतियों का अंबार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन.

ट्रंप समर्थकों (Trump Supporters) के उपद्रव के बाद जो बाइडन (Joe Biden) के राष्ट्रपति बनने से अमेरिका ने राहत की सांस ली है. बाइडन ने अमेरिका को आशाएं दिखाई हैं लेकिन उनके सामने चुनौतियों का अंबार इंतजार कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 6:53 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडन (Joe Biden) ने 20 जनवरी को दोपहर 12 बजे के कुछ देर पहले ही शपथ ले ली. संवैधानिक तौर पर ये शपथ दोपहर 12 बजे ही होनी चाहिए लेकिन इस जल्दीबाजी ने उस छटपटाहट को भी प्रदर्शित किया जो अमेरिका चाहता था. दरअसल ये छटपटाहट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उपद्रवी और बुरे प्रशासन पर पर्दा डालने की भी थी.

अमेरिका और विश्व ने ली राहत की सांस

सत्ता के इस हस्तांतरण के बाद अमेरिका और विश्व ने भी राहत की सांस ली. ये राहत की सांस इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि महज कुछ दिनों पहले यानी 6 जनवरी को ठीक शपथग्रहण वाली जगह पर डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों ने अपने नेता के उकसाने पर उपद्रव और हिंसा का रास्ता अख्तियार कर लिया था. इसके अलावा कमला हैरिस ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली जो ऐतिहासिक है. पहली बार देश की उपराष्ट्रपति एक अश्वेत महिला बनी. उनका भारतीय-अफ्रीकी मूल का होना भी इसे ऐतिहासिक बनाता है.

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बाइडन-हैरिस की जोड़ी के सामने चुनौतियां

ट्रंप का शासनकाल नस्लीय और लैंगिंक मामलों को लेकर स्पष्ट तौर पर असंवेनशील रहा है. बाइडन-हैरिस की टीम को इस मुद्दे के अलावा कई चुनौतियों का सामना करना है जिसमें क्षेत्रीय राजनीतिक ध्रुवीकरण से लेकर विदेश नीति तक शामिल है. ओबामा के शासनकाल में उपराष्ट्रपति रहते हुए जो बाइडन ने अमेरिकी समाज के एक सेक्शन में ग्लोबलाइजेशन को लेकर एक गुस्सा देखा है. इसमें रोजगार के अवसर घटना एक बड़ा विषय है.

बाइडन का अनुभव आएगा काम



अब बाइडन की टीम को इस विषय पर गंभीरता से काम करना होगा. बाइडन महज तीस साल की उम्र में सीनेटर बन गए थे और वो सबसे ज्यादा उम्र में अमेरिकी राष्ट्रपति बनने वाले नेता हैं. उनकी पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर होती है जो बेहद शानदार तरीके से समन्वय स्थापित कर सकता है. अब उनके सामने यह चैलेंज होगा कि वो कैसे रोजगार का सृजन करते हैं और कैसे अप्रवासियों के बारे में भी सोचते हैं. क्योंकि सामान्य तौर पर अमेरिकी अप्रवासी समुदाय डेमोक्रेट पार्टी का समर्थक माना जाता है. हालांकि अपने शपथग्रहण भाषण में उन्होंने बंटे हुए देश को एक करने के संकते दिए हैं.

कोरोना वैक्सिनेशन के वादे की चुनौतियां

इसके अलावा अमेरिका में पब्लिक हेल्थ सिस्टम भी अव्यवस्था का शिकार है. और इसका सबसे बड़ा कारण कोविड-19 महामारी है और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शुरुआती समय में इसे बेहद हल्के तरीके से लिया था. अमेरिका कोरोना से दुनिया में सर्वाधिक प्रभावित देश है. अब 4 लाख 15 हजार लोग इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं. ढाई करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हुए. बाइडन ने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति चुने जाने पर सौ दिनों के भीतर 10 करोड़ लोगों के वैक्सिनेशन की बात कही थी. इसके अलावा आर्थिक, सिक्योरिटी और रणनीतिक नीतियों संबंधी भी कई चैलेंज बाइडन के सामने हैं.

(सी. उदयाभास्कर का पूरा लेख यहां क्लिक कर पढ़ा जा सकता है.)
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